🌟 संत कबीर दोहा - ज्ञान ही सर्वश्रेष्ठ है 🌟॥१०॥-💖🤝✨🛡️🗑️⚔️🌟

Started by Atul Kaviraje, November 09, 2025, 07:26:29 PM

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Atul Kaviraje

कबीर दास जी के दोहे-

जाति न पूछो साधु की, पूछि लीजिए ज्ञान।
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥१०॥

🌟 संत कबीर दोहा - ज्ञान ही सर्वश्रेष्ठ है 🌟

📜 दोहा:
जतिनापुच्छो साधुकी
,
पुचिलिजीज (पद का अर्थ: सत्य और ज्ञान भक्ति से परिपूर्ण कबीर गुरु के वचनों को पूरे मन से सुनना चाहिए। संत की संगति अत्यंत लाभकारी होती है, परंतु जन्म (जाति) पर ध्यान नहीं देना चाहिए।)

2. पहली पंक्ति (जाति की निरर्थकता) 🙅�♀️📜

जाति न पूछो संत की, धर्म भेद का बंधन,
जन्म-मरण के खेल में, किस ओर झुकते हो?
जाति, वर्ण

(श्लोक का अर्थ: किसी संत से अनुभव और आत्मज्ञान का मार्ग पूछो। ज्ञान से बढ़कर संसार में कोई साधन नहीं है। ज्ञान का संग्रह करना चाहिए, व्यर्थ की बातों पर विचार नहीं करना चाहिए।)

4. दृष्टांत (तलवार और म्यान) ⚔️🛡�

कबीर ने सुंदर रूपक प्रस्तुत किया है,
तलवार का क्या मोल, क्या सिद्धांत कहा है!
तलवार तेज होती है, संकटों से लड़ती है,
म्यान कितना भी सुंदर क्यों न हो, उसका कोई महत्व नहीं है।

(पद का अर्थ: कबीर ने एक सुंदर उदाहरण दिया है - तलवार का मूल्य उसके गुण से समझो। तलवार तेज़ होती है और संकटों से लड़ती है, लेकिन उसका बाहरी आवरण (म्यान) कितना भी सुंदर क्यों न हो, उसका कोई महत्व नहीं है।)

5. तीसरी पंक्ति (बाह्य रूप का त्याग) 🚪🗑�

म्यान के साथ रहो, म्यान का क्या उपयोग है,
केवल बाह्य रूप, उसका नाम नहीं।
इसी प्रकार बाह्य रूप, रंग और वेश,
ज्ञान के आगे सब हैं, केवल एक ही भोर है।

(पद का अर्थ: म्यान (आवरण) को अलग रख दो; उसका कार्य नगण्य है। इसी प्रकार ज्ञान के आगे बाह्य रंग, रूप और वेश का कोई महत्व नहीं है।)

6. आंतरिक सत्य (आत्मा का स्वरूप) 💖👁�

ज्ञान आत्मा का तेजोमय रूप है,
बाह्य जाति कहीं काम की नहीं है।
मनुष्य महान बनता है, कर्मों और विचारों से,
उसे केवल जाति से मत आंको।

(श्लोक का अर्थ: ज्ञान ही आत्मा का सच्चा स्वरूप है। जाति कहीं काम की नहीं है। मनुष्य अपने अच्छे कर्मों और विचारों से महान बनता है। उसे केवल जाति से मत आंको।)

7. निष्कर्ष (कबीर की शिक्षाएँ) 🌈🤝

यही सच्चा संदेश है, कबीर का महान,
मानवता की ही, जाति ज्ञान हो।
भेदभाव छोड़ो, समानता का आह्वान करो,
भक्ति में जाति नहीं होती, विट्ठल का लाख होता है।

(पद का अर्थ: कबीर का यही महान संदेश है कि मनुष्य की एक ही जाति होनी चाहिए, वह है ज्ञान। सभी भेदभाव त्यागकर समानता का आह्वान करो। भक्ति में कोई जाति नहीं होती, ईश्वर का प्रेम और आशीर्वाद होता है।)

💫 इमोजी सारांश:
युगल सिद्धांत इमोजी/प्रतीक

जाति मत पूछो साधु - जातिगत भेदभाव से बचें 🙅�♀️📜
ज्ञान मांगो - ज्ञान महत्वपूर्ण है 🧠💡
तलवार का मूल्य क्यों - आंतरिक गुण ⚔️🌟
पाद रहन दो म्यान - बाह्य दिखावा व्यर्थ है 🛡�🗑�
पूर्ण भाव - समता और ज्ञान भक्ति 💖🤝✨

🌺 इति संत कबीर दोहा - "ज्ञान श्रेष्ठ" (ज्ञान, समता और भक्ति के संदेशों के साथ) 🌺

--अतुल परब
--दिनांक-08.11.2025-शनिवार.
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