🙏 कबीरवाणी: दया, क्षमा और आत्मा 🙏॥११॥-🗣️, 💡🕊️, ✨🔥, 😠💰, 😈💖, 🙏

Started by Atul Kaviraje, November 09, 2025, 07:31:54 PM

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Atul Kaviraje

कबीर दास जी के दोहे-

जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप।
जहाँ क्रोध तहाँ पाप है, जहाँ क्षमा तहाँ आप॥११॥

🙏 कबीरवाणी: दया, क्षमा और आत्मा 🙏

मूल दोहा 📜
जहाँ दया है, वहाँ धर्म है, जहाँ लोभ है, वहाँ पाप है।
जहाँ क्रोध है, वहाँ पाप है, जहाँ क्षमा है।

संक्षिप्त अर्थ 📜
संत कबीर कहते हैं: जहाँ दया है, वहाँ धर्म है;
जहाँ लोभ है, वहाँ पाप है।
जहाँ क्रोध है, वहाँ पाप है;
और जहाँ क्षमा है, वहाँ परमात्मा (आत्मस्वरूप) है।

दीर्घ मराठी कविता (7 कड़वे) - अर्थ ✍️

कड़वा 1 - (सदाचार का आधार)
हे मन, कबीर के सत्य वचन सुन, 🗣�
जीवन में सदाचार का बड़ा महत्व है।
न मंदिर में धर्म है, न तीर्थ के जल में,💧
धर्म तो केवल दया के पवित्र हृदय में ही निवास करता है।

कड़वा 2 - (दया और धर्म)
जिस हृदय में करुणा, प्रेम और सहानुभूति हो,💖
वही सच्ची भक्ति है, वही सच्चा धार्मिक आचार है।
जब आत्मा जीवों के प्रति स्नेह का अनुभव करती है,🌱
वही ईश्वर की कृपा है, धर्म की शक्ति मिलती है।

कड़वा 3 - (लोभ और पाप)
जहाँ लोभ, वासना और कामना है,💰
वही सच्चा पाप है, जो बुरे कर्म करता है।
जिसकी तृष्णा कभी शांत नहीं होती, जो धन के पीछे भागता है,⛓️
उसी लोभ के कारण प्राणी पाप के जाल में फँस जाता है।

कड़वा 4 - (क्रोध और पाप)
एक और दुर्गुण है, वह क्रोध जो भयंकर है,🔥
वह बुद्धि का नाश करता है, वह विनाश का अंबर है।
जहाँ कहीं भी क्रोध, वाणी या कर्म होता है,🔪
वहाँ, पाप व्यक्ति पर तुरंत ही आ पड़ता है।

कड़वा 5 - (पाप का स्वभाव)
लोभ और क्रोध पाप की जुड़वाँ जड़ें हैं,🌳
जो मन से धीरे-धीरे शांति को भंग कर देंगे।
इन दो विकारों के कारण आत्मा मलिन हो जाती है,🖤
सुख के क्षण भी कष्टदायक और दुःखद लगते हैं।

कड़वा 6 - (क्षमा और ईश्वर)
परन्तु जहाँ क्षमा का निवास है, वहाँ शांति आती है,🕊�
वैर-भाव त्यागकर मन मुक्त हो जाता है।
जो क्षमा करना सीखता है, वही सच्चा योगी है,🧘
क्षमा सबसे बड़ी तपस्या है, रोगनाशक है।

कड़वा 7 - (स्व-स्वभाव और निष्कर्ष)
जिसके मन में क्षमा है, वहाँ परमात्मा निवास करते हैं,🌟
'आप' अर्थात् ईश्वर, वही आपका स्वभाव है।
इसलिए क्रोध का त्याग करो, दया-क्षमा को धारण करो,✅
कबीर का यह संदेश, जीवन में शांति के लिए।

प्रत्येक पद मराठी अर्थ

पद (चरण) मराठी अर्थ (अर्थ)

जहाँ दया है, वहाँ धर्म है, जहाँ दया है, वहाँ धर्म है।
जहाँ लोभ है, वहाँ पाप है। जहाँ लोभ है, वहाँ पाप है।
जहाँ क्रोध है, वहाँ पाप है, जहाँ क्रोध है, वहाँ पाप है।
जहाँ क्षमा है, वहाँ आप हैं। और जहाँ क्षमा है, वहाँ ईश्वर है।

इमोजी सारांश

कॉन्सेप्ट इमोजी
दया / धर्म 💖, 🙏
लोभ / पाप 💰, 😈
क्रोध / पाप 🔥, 😠
क्षमा / ईश्वर 🕊�, ✨
संत कबीर 🗣�, 💡

--अतुल परब
--दिनांक-09.11.2025-रविवार.
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