चाणक्य नीति: प्रथम अध्याय – श्लोक 13-कविता-🙏📜🧠

Started by Atul Kaviraje, November 11, 2025, 11:05:31 AM

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Atul Kaviraje

चाणक्य नीति प्रथम अध्याय -

यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते ।
ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति अध्रुवं नष्टमेव हि ।।१३।।

आचार्य चाणक्य को प्रणाम! 🧭

चाणक्य नीति: प्रथम अध्याय – श्लोक 13

यो ध्रुवानि परित्यज्य अध्रुवम् सेवा करता है।
ध्रुवानि तस्य नश्यन्ति अध्रुवम् नास्त्रमेव हि ..13..

📝 प्रत्येक पाद (पाद और चरण) का मराठी अर्थ

संस्कृत/मूल पाद (चरण) | मराठी अर्थ

यो ध्रुवानि परित्यज्य – जो ध्रुव (स्थिर, स्थिर) वस्तुओं का त्याग करता है।
अध्रुव परिशेवते – और अध्रुव (अस्थिर, अनिश्चित) वस्तुओं का पालन करता है।
ध्रुवानि तस्य नाश्यन्ति – उसकी ध्रुव (निश्चित) संपत्ति भी नष्ट हो जाती है।
अध्रुवम् नास्त्रमेव हि – और अध्रुव (अनिश्चित) वस्तु निश्चित रूप से नष्ट हो जाती है।

🙏 भक्तिमय, लंबी मराठी कविता (07 कड़वी)

1️⃣ निश्चित को पीछे छोड़ना ⚓

जो व्यक्ति हाथ छोड़ देता है,
जो स्थिर आधार को भूल जाता है;
जो अपने हाथ में है उसका तिरस्कार करता है,
वह निश्चित मार्ग से बचता है!

2️⃣ क्षणिक प्रलोभन की सेवा करना 💰

वह क्षणिक लाभ के लिए तेज़ी से दौड़ता है,
वह अनिश्चित मार्ग की सेवा करता है;
वह ऊर्जा, समय और मन लगाता है,
जो उसके पास है उसके लिए वह कुछ भी नहीं रखता!

3️⃣ कुछ चीज़ों का नुकसान 💔

फिर धीरे-धीरे उसका ध्रुव आधार,
निश्चित धन भी नष्ट हो जाता है;
जिस चीज़ पर वह ध्यान देना बंद कर देता है,
वह चीज़ स्वतः ही खो देता है!

4️⃣ दोनों तरफ़ नुकसान है ⚖️

जो उसने त्याग दिया,
वह उसके हाथ से निकल गया;
जिसे पाने के लिए वह दौड़ा,
वह भी रास्ते में मिट जाता है!

5️⃣ अस्थिरता का परम सत्य 🌬�

जो निश्चित नहीं है, जिसका कोई आधार नहीं है, वह संसार में कैसे टिक सकती है
;
भाग्य से कोई अध्रुवीय वस्तु प्राप्त भी हो जाए,
तो वह क्षण भर में नष्ट हो जाती है!

6️⃣ विनाश का चक्र घूमता रहता है 🔄

निश्चित को छोड़कर, अनिश्चित को थामे रहना,
यह ज्ञान लोभ से आता है;
अतः, निश्चित और अनिश्चित दोनों ही,
नुकसान पहुँचाते हैं!

7️⃣ चाणक्य का स्पष्ट संदेश 💡

अतः, व्यक्ति को ध्रुव मार्ग का आधार थामे रहना चाहिए,
कर्म के प्रति सदैव निष्ठावान रहना चाहिए;
अध्रुवीय मोह को दूर करो,
तब यह धन सुखी होगा!

✨ कविता का संक्षिप्त अर्थ

चाणक्य कहते हैं कि,
जो व्यक्ति अपने पास मौजूद स्थिर (ध्रुवीय), निश्चित और मूल्यवान वस्तुओं की उपेक्षा या त्याग करके
अनिश्चित (अध्रुव), क्षणिक और अस्थायी लाभों के पीछे भागता है -
उसे दोहरी हानि होती है।
उसे न केवल अनिश्चित वस्तु नहीं मिलती,
बल्कि जिन निश्चित वस्तुओं का उसने त्याग किया है,
वे भी नष्ट हो जाती हैं।

🖼� चित्र, प्रतीक और इमोजी

नीति/ज्ञान: 📜 (चाणक्य नीति), 🧠 (विवेक), 💡 (संदेश)
ध्रुव (स्थिर): ⚓ (स्थिरता), 🌳 (समर्थन), 💰 (निश्चित धन)
ध्रुव (अस्थिर): 💨 (अस्थिरता), 💸 (अटकलें/लालच), 📉 (विनाश)
परिणाम: 💔 (हानि), ❌ (प्राप्त नहीं), ⚖️ (दोनों पक्ष)

🔠 इमोजी और शब्द सारांश (क्षैतिज मार्ग)

📜 | चाणक्य | नीति | ⚓ | ध्रुव | स्थिर | निश्चित | ❌ | परित्यक्त | परित्यक्त |
💨 | ध्रुव | अस्थिर | अस्थायी | 🏃 | भाग जाता है |
💔 | ध्रुव | नाशवान | स्थिर | आधार | नष्ट | 📉 | अध्रुवम् | नष्टमेव | नमस्ते |
अनिश्चित | निश्चित | खोया हुआ | 💡 | बुद्धि | महत्वपूर्ण |

🌿 अंतिम विचार:
जीवन की स्थिरता को पहचानना ही बुद्धिमत्ता है,
क्षणिक प्रलोभन से बचना ही बुद्धिमत्ता है।
चाणक्य कहते हैं - जो स्थिर को थामे रहता है, वह सुरक्षित रहता है,
जो अनिश्चित के पीछे भागता है, वह अंततः खाली हो जाता है! 🙏📜🧠

--अतुल परब
--दिनांक-11.11.2025-मंगळवार.
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