🚩सदगुरु कबीर की जय! 🌟 कबीर दासजी का दोहा: गुरु महिमा-🌟🙏

Started by Atul Kaviraje, November 11, 2025, 11:11:29 AM

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Atul Kaviraje

कबीर दास जी के दोहे-

कबीरा ते नर अन्ध है, गुरु को कहते और।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रुठै नहीं ठौर॥१३॥

🚩सदगुरु कबीर की जय! 🌟
कबीर दासजी का दोहा: गुरु महिमा (लंबी मराठी कविता) 🙏

कबीरा ते नर अंध है, गुरु को कहते और।
हरि रूठै गुरु ठौर है, गुरू रूठै नहिं ठौर॥13॥

📝 प्रत्येक पद का मराठी अर्थ (पद और चरणवार)
हिंदी पद (चरण) मराठी अर्थ
कबीरा ते नर अंध है कबीर दास कहते हैं, वे आदमी अंधे (अज्ञानी) हैं।
गुरु को कहते हैं और जो गुरु (सामान्य) को कुछ और ही समझते हैं।
हरि रूठे गुरु थोर है देव (हरि) भले ही रुस (नाराज) हो, गुरु ही सहारा है (थोर)।
गुरु रूठै नहिं ठौर लेकिन यदि गुरू स्वयं रूठै तो फिर कोई सहारा (थोर) नहीं।

🙏 भक्तिमय, लंबी मराठी कविता (07 कड़वी)

1. अज्ञान का अंधापन 🦯

कबीर कहते हैं, वे अंधे जानते हैं,
जिनका मन अज्ञानी है;
जो गुरु को साधारण समझते हैं,
वे ज्ञान के लक्षण नहीं हैं!

2. गुरु को साधारण समझना 😞

जो गुरु के महत्व को नहीं समझते,
जो उन्हें गुरु का अपमान समझते हैं;
वह साधारण व्यक्ति नहीं है,
वही ब्रह्म का सच्चा ज्ञान है!

3. ईश्वर के प्रकोप से मुक्ति 🕉�

भले ही मेरे प्रभु क्रोधित हों,
कर्म के कारण अप्रसन्नता हो;
फिर भी गुरु का सहयोग प्राप्त होगा,
गुरु ईश्वर की आवश्यकता पूरी करेंगे!

4. गुरु परम रक्षक हैं ⚓

गुरुदेव मार्ग प्रशस्त करते हैं,
कृपा की छत्रछाया प्रदान करते हैं;
ईश्वर की क्षमा प्राप्त होती है,
गुरु की शक्ति सर्वोच्च है!

5. जब गुरु की कृपा दूर हो 💔

परन्तु यदि गुरु स्वयं कभी रुष्ट हो जाएँ,
ज्ञान का प्रकाश रुक जाता है;
तब तीनों लोकों में कोई सहारा नहीं मिलता,
आत्मा संकट में है!

6. ज्ञान के बिना शरण नहीं मिलती 🚫

गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त नहीं होता,
ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं होती;
फिर यदि ईश्वर दयालु भी हों,
तो भी वे निकट नहीं आते!

7. गुरु ही परम सत्य हैं 🌟

इसलिए गुरु के चरण पकड़ने चाहिए,
गुरु की भक्तिपूर्वक सेवा करनी चाहिए;
गुरु ही मेरा परम सत्य हैं,
गुरु के बिना जीवन रहस्यमय है!

✨ कविता का संक्षिप्त अर्थ

संत कबीर कहते हैं कि,
जो लोग गुरु के महत्व को समझे बिना उन्हें साधारण समझते हैं, वे अज्ञानी हैं।
क्योंकि यदि ईश्वर अप्रसन्न हों, तो गुरु अपने ज्ञान और कृपा से भक्त को आश्रय प्रदान करते हैं,
परन्तु यदि गुरु स्वयं अप्रसन्न हों, तो भक्त को कहीं भी आश्रय या सहारा नहीं मिलता — क्योंकि गुरु मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।

🖼� चित्र, प्रतीक और इमोजी

अज्ञान: 🦯 (अंधापन), 😞 (दुःख)
ईश्वर/गुरु: 🕉� (हरि), 🌟 (गुरु), 🙏 (प्रणाम/भक्ति)
दया/सहायता: ⚓ (सहायता), ☔ (रक्षा), 💡 (ज्ञान)
परिणाम: 💔 (क्रोध), 🚫 (अवरुद्ध)

🔠 इमोजी और शब्द सारांश (क्षैतिज मार्ग)

🚩 | कबीर | दास | 🌟 | गुरु | महिमा |
🦯 | वह | पुरुष | अंधा | अज्ञानी | 😞 | गुरु | सामान्य | आस्तिक |
🕉� | हरि | क्रोधित | भगवान | क्रोधित | ⚓ | गुरु | सहारा | पाता है |
💔 | गुरु | क्रोधित | नहीं | सहारा | 💡 | ज्ञान | महत्वपूर्ण |
🙏 | चरण | पकड़ | भावनात्मक | सेवा | आराधना |

💫 निष्कर्ष

गुरु एक चलते-फिरते और बोलते हुए भगवान हैं -
जो भक्त को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
यदि भगवान क्रोधित भी हों, तो गुरु उन्हें बचाते हैं,
लेकिन यदि गुरु क्रोधित हों - तो भगवान भी चले जाते हैं। 🌟🙏

--अतुल परब
--दिनांक-11.11.2025-मंगळवार.
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