संत सेना महाराज- ‘धूप दीप धृत साज आरती-🌼 आत्मचिंतन की आरती-🙏 🕉️ 🕯️ 💨 🧠 💡

Started by Atul Kaviraje, November 13, 2025, 11:33:49 AM

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Atul Kaviraje

संत सेना महाराज-

     'धूप दीप धृत साज आरती।

      वारणे दा कमला पती।

🌼 आत्मचिंतन की आरती (संत सेना महाराज अभंग) 🌼

॥ अभंग ॥
धूप, दीप और धृत से आरती।
वरणे दा कमला पति।

॥ भक्ति से परिपूर्ण कविता (7 छंद) ॥

कड़वा 1: पूजा के उपकरणों का समर्पण

मेरा जीवन सादा है,
इसमें भक्ति की आराधना पवित्र है;
मैंने धूप, दीप और घी सजाया,
मैंने सब कुछ प्रभु के चरणों में अर्पित कर दिया!

कड़वा 2: धूप और दीप का सच्चा अर्थ

धूप का अर्थ है काम का दहन,
दीप का अर्थ है ज्ञान का प्रकाश;
अज्ञान का अंधकार दूर हो,
मेरे मन को प्रकाश मिले!

कड़वा 3: धृत और आरती की भावना

धृत का अर्थ है स्नेह और प्रेम,
आत्मा में क्रोध न हो;
यह भावना मेरी आरती का श्रृंगार है,
हे विथुराय, तुम मेरे मुकुट हो!

कदवे 4: वरणे दा (समर्पण)

'वरणे दा' का अर्थ है समर्पित,
मैंने अपना कोमल मन आपकी ओर समर्पित कर दिया है;
नाई का काम, सच्ची सेवा,
मैं एक विनम्र सेवक का सेवक हूँ!

कदवे 5: कमल के पति (ईश्वर के स्वरूप)

आप कमल के पति श्री हरि हैं,
आप मेरे जगत के रक्षक हैं;
आपकी शक्ति सर्वत्र महान है,
आप भक्तों के महान आधार हैं!

कदवे 6: आंतरिक पूजा का महत्व

बाह्य उपचारों से मूर्ख मत बनो,
यह मेरी आत्मा का कोमल श्लोक है;
श्रद्धा और प्रेम ही धन हैं,
यही मैंने आपके चरणों में अर्पित किया है!

कदवे 7: निष्कर्ष और मुक्ति का मार्ग

सेना कहने का तात्पर्य है, यही सुगम मार्ग है,
यही निःस्वार्थ भक्ति का राजयोग है;
समर्पण ही भक्ति का फल है,
विट्ठल के चरणों में जीवन सफल है!

🌸 इमोजी सारांश 🌸

अवधारणा प्रतीक:

भक्ति/ईश्वर 🙏 🕉�
पूजा के साधन 🕯� 💨
मन/ज्ञान 🧠 💡
प्रेम/स्नेह 💖 ✨
समर्पण ✋ 🧘�♀️
विट्ठल/स्वामी 👑 🚩
जीवन/मुक्ति 🚶�♂️ 🌈

सभी शब्द और सभी इमोजी (क्षैतिज रूप से):

मेरा जीवन सरल है, इसमें भक्ति की आराधना केवल धूप, दीप, घी, श्रृंगार है, मैंने सब कुछ प्रभु के चरणों में अर्पित कर दिया।
धूप का अर्थ है वासना को जलाना, दीप का अर्थ है ज्ञान को प्रकाशित करना, अज्ञान का अंधकार दूर हो, मेरे मन को प्रकाश मिले।
धृत का अर्थ है स्नेह और प्रेम, भाव में क्रोध न हो, यही मेरी आरती है, विठुरय, आप ही मेरे मुकुट हैं।
वरणे दा का अर्थ है समर्पित, मैंने अपनी सूक्ष्म बुद्धि आपकी ओर लहराई, मैं नाई का काम करता हूँ, मैं विनम्र सेवक की सेवा करता हूँ, आप कमल के पति हैं, आप जगत के रक्षक हैं, आपकी शक्ति सर्वत्र है, आप भक्तों के महान आधार हैं।
बाह्य उपचारों से मूर्ख मत बनो, मेरे जीवन का यह कोमल श्लोक, श्रद्धा और प्रेम ही धन है, मैंने इसे आपके चरणों में अर्पित किया है।
सेना बुलाना ही सुगम मार्ग है, निःस्वार्थ भक्ति का यह राजयोग, समर्पण ही भक्ति का फल है, विट्ठल के चरणों में जीवन सफल है।

🙏 🕉� 🕯� 💨 🧠 💡 💖 ✨ ✋ 🧘�♀️ 👑 🚩 🚶�♂️ 🌈

--अतुल परब
--दिनांक-13.11.2025-गुरुवार.
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