🌼 अज्ञान की नींद (संत कबीर दास जी दोहा) 🌼🙏 🗣️ 🛏️ 😴 🧠 💡 💀 ⏳ 🗡️ 🛡️ 🏡

Started by Atul Kaviraje, November 13, 2025, 11:47:51 AM

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Atul Kaviraje

कबीर दास जी के दोहे-

कबीरा सोया क्या करे, उठि न भजे भगवान।
जम जब घर ले जायेंगे, पड़ी रहेगी म्यान॥१५॥

🌼 अज्ञान की नींद (संत कबीर दास जी दोहा) 🌼

॥ दोहा ॥
कबीरा, क्या करूँ सोऊँ, ��उठूँ प्रभु का भय करूँ?
घर जाऊँ तो परदा रह जाएगा।
15॥

॥ भक्ति से परिपूर्ण एक कविता (7 मधुर-कटु पद) ॥

कड़वे 1: आलस्य और अज्ञान की नींद

कबीर कहते हैं, हे मनुष्य, उठो,
अज्ञान की शय्या से उठो;
तू क्यों व्यर्थ सोया,
अनमोल जीवन का एक क्षण गँवा दिया!

कड़वे 2: ईश्वर का स्मरण करो

तू क्यों नहीं जागता और प्रभु का स्मरण करता,
नाम के बिना शांति नहीं मिलेगी;
अच्छे कर्म और भक्ति पर ध्यान दो,
जीवन में मुक्ति की यात्रा पर अग्रसर हो!

कड़वे 3: समय का रहस्य

समय की घड़ी कोई नहीं जानता,
मृत्यु का रहस्य कोई नहीं सुलझा सकता;
जब यम के दूतों की पदचाप सुनाई देगी,
तब पश्चाताप करके क्या करोगे?

कटु 4: जब यम तुम्हें ले जाएँगे

जब यम तुम्हारे घर आएँगे,
वह तुम्हारी आत्मा को ले जाएँगे;
तुम्हारे सपने और धन-संपत्ति सब यहीं पड़े रहेंगे, बेचारे!

कटु 5: शरीर का सादृश्य

यह शरीर एक खाली म्यान है,
आत्मा भीतर से निकल जाएगी;
जब तलवार चली गई, तो म्यान बेकार है,
शरीर का सारा अभिमान चला गया!

कटु 6: मोह का त्याग

माया के इस सारे खेल का उद्देश्य क्या है,
जो जीवन की क्षणभंगुर हवा है;
अब मोह और आसक्ति से बचो,
अपने मुख से विट्ठल का नाम लो!

कटु 7: निष्कर्ष और सत्य

कबीर का यह सत्य और वाणी,
हे सृष्टि के प्राणियों, सावधान रहो;
जागृति ही मुक्ति का मार्ग है,
ईश्वर का नाम ही सार और त्याग है!

🌸 इमोजी सारांश 🌸

अवधारणा प्रतीक:

कबीर/संत 🙏 🗣�
नींद/अज्ञान 🛏� 😴
स्मरण/भक्ति 🧠 💡
यम/मृत्यु 💀 ⏳
शरीर/कोश 🗡� 🛡�
संसार/छल 🏡 💸
जागृति/मुक्ति 🌅 ✨

सभी शब्द और सभी इमोजी (क्षैतिज रूप से):

कबीर कहते हैं, हे मानव, उठो, अज्ञान की शय्या से उठो, क्यों व्यर्थ सोए हो? तुमने अनमोल जीवन का एक क्षण गँवा दिया है। उठो, प्रभु का स्मरण करो, तुम्हें शांति क्यों नहीं मिलती? सत्कर्म और भक्ति करो? जीवन में मुक्ति की यात्रा करो। समय की घड़ी कोई नहीं जानता। मृत्यु का रहस्य कोई नहीं सुलझा पाया है। जब यम के दूतों के चरण पड़ेंगे, तब पश्चाताप करके क्या करोगे? जब यम घर पर आएंगे, तो तुम्हारी आत्मा को ले जाएंगे, तुम्हारे सारे सपने और धन यहीं रह जाएँगे, बेचारे। यह शरीर खाली म्यान है, जो आत्मा को भीतर से ले जाएगा। तलवार चली जाएगी। जब म्यान चला जाएगा, तो तुच्छ शरीर का अभिमान सब चला जाएगा।
यह माया का खेल क्यों है, जो क्षणिक है? जीवन की वायु मोह और मोह है। अब विट्ठल के नाम से बचो।
यह कबीर का सत्य और वाणी, हे सृष्टि के प्राणियों, सावधान रहो। जागरूकता ही मुक्ति का मार्ग है। ईश्वर का नाम सार और त्याग है।

🙏 🗣� 🛏� 😴 🧠 💡 💀 ⏳ 🗡� 🛡� 🏡 💸 🌅 ✨

--अतुल परब
--दिनांक-13.11.2025-गुरुवार.         
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