🌿 श्री स्वामी समर्थ और 'सत्संग' का महत्व! 🌿-1-

Started by Atul Kaviraje, November 13, 2025, 11:56:03 AM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

श्री स्वामी समर्थ और उनके द्वारा 'सत्संग' का महत्व-
(श्री स्वामी समर्थ के अनुसार 'सत्संग' का महत्व)
(The Importance of 'Satsang' According to Shri Swami Samarth)
Importance of Shri Swami Samarth and his 'Satsang'-

🌿 श्री स्वामी समर्थ और 'सत्संग' का महत्व! 🌿

श्री स्वामी समर्थ और 'सत्संग' का महत्व

🌼 स्वामी समर्थ — सत्संग और प्रवचन 🌼

1. 🙏 स्वामी के प्रवचन

मराठी कविता:

स्वामी समर्थ आए, अक्कलकोट के राजा,
उन्होंने भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया, सरल, सीधा और ताज़ा।
नाम का महत्व, और सत्संग की मधुरता,
इन दो साधनों से जीवन युग्मों में चलता है।

अर्थ:
श्री स्वामी समर्थ अक्कलकोट के राजा के रूप में आए।
उन्होंने भक्ति का सरल और नया मार्ग दिखाया।
उन्होंने नाम (नामस्मरण) और सत्संग (सद्संगति) का महत्व बताया।
इन दो साधनों से ही हमारा जीवन बेहतर हो सकता है।

2. 💡 ज्ञान का प्रकाश

मराठी कविता:

सत्संग का अर्थ है ज्ञान, अंधकार से प्रकाश।
स्वामी की कृपा से विशेष विचार प्राप्त होते हैं।
जब संत बोलते हैं, तो कुबुद्धि भाग जाती है।
सत्य और धर्म हृदय में गहरी जड़ें जमा लेते हैं।

अर्थ:
सत्संग अंधकार से ज्ञान (अच्छे विचारों) का प्रकाश है।
गुरु की कृपा से हमारे विचारों को एक विशेष दिशा मिलती है।
जब संत बोलते हैं, तो कुबुद्धि भाग जाती है।
और सत्य और धर्म मन में गहरी जड़ें जमा लेते हैं।

3. 💖 मन की पवित्रता

मराठी कविता:

जो सत्संग से लाभान्वित होता है, उसका मन शुद्ध हो जाता है।
इच्छाएँ और दुर्गुण तुरंत भाग जाते हैं।
शुद्ध आचरण, यही सत्संग देता है।
'डरो मत', गुरु विश्वास देता है।

अर्थ:
जिसे सत्संग मिलता है, उसका मन स्वच्छ और पवित्र हो जाता है।
बुरी इच्छाएँ (इच्छाएँ) और दोष (दुष्प्रवृत्तियाँ) तुरंत दूर हो जाते हैं।
सत्संग हमें शुद्ध आचरण सिखाता है।
'डरो मत', गुरु हमें विश्वास देता है।

4. 🌊 नदी का प्रवाह

मराठी कविता:

जैसे पानी की एक बूँद नदी में मिल जाती है,
वैसे ही आत्मा सत्संग में, धर्म के कार्य में स्थिर हो जाती है।
अकेलापन नहीं रहता, सत्संग मिलता है,
प्रभु के भजनों से जीवन रंगीन हो जाता है।

अर्थ:
जैसे पानी की एक बूँद नदी में मिल जाती है,
वैसे ही सत्संग में शामिल होने वाली आत्मा धर्म के कार्य में स्थिर हो जाती है।
अकेलापन समाप्त हो जाता है और सत्संग मिलता है।
प्रभु के भजनों से हमारा जीवन सुखी और रंगीन हो जाता है।

--अतुल परब
--दिनांक-13.11.2025-गुरुवार.
===========================================