कृष्णलीला: मटका फूटा-😄👁️‍🗨️❤️

Started by Atul Kaviraje, November 13, 2025, 07:43:47 PM

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Atul Kaviraje

कृष्णलीला: मटका फूटा-

१. मटका फूटा, धार लगी,
गोपियों की साड़ी, भीगकर चली.
नज़रें "कान्हा से" मिलते ही, "गोपी",
सिर से पाँव तक लज्जा की मूर्ति ही बनी.

अर्थ: गोपी का मटका फूटा और पानी की धार उसकी साड़ी पर गिरने लगी, जिससे उसकी साड़ी पूरी तरह भीग गई। उसी पल उसकी नज़र कान्हा पर पड़ी और वह गोपी लज्जा से पूरी तरह (सिर से पाँव तक) शरमा गई। 🏺💦😳

२. यमुना के किनारे, खेल निराला,
कान्हा शरारतों का, कितना बड़ा गोला.
जलक्रीड़ा में रमा, अपने मित्रों संग,
गोपियों का मटका तोड़े, हँसकर वो सहज.

अर्थ: यमुना के किनारे एक अनोखा खेल चल रहा था। कान्हा शरारतों का कितना बड़ा समूह था। वह अपने दोस्तों के साथ जलक्रीड़ा में व्यस्त था और हँसते-हँसते गोपियों के मटके फोड़ रहा था। 🏞� mischiev

३. भीगी-भीगी हुई, वो लाज से चूर,
कानों पर पड़े, कृष्ण के सूर.
बाँसुरी की धुन, मन को मोह ले,
बेहोश खड़ी रही, वो वहीं पे.

अर्थ: वह गोपी पूरी तरह से भीगकर लाज से चूर हो गई थी, और उसके कानों पर कृष्ण की बाँसुरी के सुर पड़े। बाँसुरी की धुन ने उसके मन को मोहित कर लिया और वह अपना होश खोकर वहीं खड़ी रह गई। 💦🎶 mesmerized

४. कान्हा हँसा, कटाक्ष डाला,
गोपी के हृदय में, प्रेम जगाया.
बोले नहीं कुछ, फिर भी भावनाएँ समझीं,
नैनों-नैनों से, कहानियाँ गढ़ीं.

अर्थ: कान्हा हँसा और उसने कटाक्ष किया, जिससे गोपी के हृदय में प्रेम जागृत हो गया। उन्होंने कुछ भी नहीं कहा, फिर भी भावनाएँ समझीं; आँखों ही आँखों में उनकी प्रेम कहानी गढ़ी गई। 😄👁��🗨�❤️

५. लोकनिंदा का डर, मन में था,
पर कृष्ण के खिंचाव से, वो आगे बढ़ रही थी.
सामाजिक बंधन, भूल गई,
कान्हा के प्रेम में, वो रंग गई.

अर्थ: उसके मन में लोकनिंदा का डर था, लेकिन कृष्ण के आकर्षण के कारण वह आगे बढ़ती गई। वह सभी सामाजिक बंधन भूल गई और कान्हा के प्रेम में पूरी तरह रंग गई। 👥🚫💫

६. मटका फूटा, भाग्य चमका,
प्रेम का बीज, हृदय में रोपा.
गोपी नहीं, वो राधा बनी,
कान्हा के प्रेम में, वो खो गई.

अर्थ: मटका फूटा और उसका भाग्य चमक उठा, उसके हृदय में प्रेम का बीज बोया गया। वह सिर्फ एक गोपी नहीं रही, बल्कि वह राधा बन गई और कान्हा के प्रेम में पूरी तरह खो गई। 💖🌱🌟

७. हे कृष्ण मुरारी, तुम्हारी लीला महान,
भक्तों को देते हो, शांति का वरदान.
इस जीवन में, तुम ही हमारे आधार,
कृपा तुम्हारी रहे, हर पल पर.

अर्थ: हे कृष्ण मुरारी, तुम्हारी लीला बहुत महान है। तुम भक्तों को शांति का वरदान देते हो। इस जीवन में तुम ही हमारे आधार हो। तुम्हारी कृपा हमारे हर पल पर बनी रहे। 🙏🌸

--अतुल परब
--दिनांक-13.11.2025-गुरुवार.
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