🙏🚩📜 श्रीमद्भगवद्गीता - कर्म योग 📜🚩🙏अध्याय 3, श्लोक 8-कर्म योग-🏹 🎯 🧘‍♂️

Started by Atul Kaviraje, November 14, 2025, 04:29:26 PM

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Atul Kaviraje

तीसरा अध्यायः कर्मयोग-श्रीमद्भगवदगीता-

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः।।8।।

तीसरा अध्याय: कर्म योग - श्रीमद्भगवद्गीता-

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म जययो हयकर्मणः।
8.

🙏🚩📜 श्रीमद्भगवद्गीता - कर्म योग 📜🚩🙏

🌟नियतं कुरु कर्म त्वं (अध्याय 3, श्लोक 8) - दीर्घ मराठी कविता 🌟

📜 श्लोक का संक्षिप्त अर्थ
तुम अपने नियत (निर्धारित) कर्म करो। क्योंकि कर्म करना न करने से निश्चित रूप से श्रेष्ठ है। यदि तुम कर्म नहीं करोगे, तो तुम्हारा भौतिक निर्वाह (जीवन) भी संभव नहीं होगा।

🌼 कर्म योग: कविता 🌼
1. (नियत कर्म)

हे कृष्ण, आपकी आज्ञा, आप ही हमारे दाता हैं,
आप ही भाग्य को जानने वाले हैं, हाथ थामे हुए हैं।
हे मनुष्य, तेरा कर्तव्य है, कर्म का कभी त्याग न करना।

कर्म के मार्ग पर चलते रहना चाहिए और मोक्ष की प्राप्ति करनी चाहिए।

॥पद का मराठी अर्थ
(हे अर्जुन, अपना नियत कर्म करो, क्योंकि भगवान स्वयं तुम्हें कर्म करने का मार्ग दिखा रहे हैं। इस कर्तव्य का कभी त्याग नहीं करना चाहिए, क्योंकि केवल उचित कर्म ही मोक्ष का मार्ग प्राप्त करा सकता है।)

2. (कर्म की श्रेष्ठता)

कर्म को न करने से कर्म को जानना श्रेष्ठ है।
निष्क्रिय रहने से मन दुष्ट बन जाता है।
हाथ जोड़कर बैठना उचित भक्त नहीं है।
कर्महीन जीवन में सभी भाव व्यर्थ हैं।

॥पद का मराठी अर्थ

(जान लो कि कर्म न करने की अकर्मण्यता से कर्म करना निश्चित रूप से श्रेष्ठ है। अकर्मण्यता के कारण मन में विकार उत्पन्न होते हैं। भगवान के भक्त के लिए हाथ जोड़कर स्थिर बैठना उचित नहीं है। कर्महीन जीवन संसार के लिए व्यर्थ हो जाता है।)

3. (कर्म से बचने का भ्रम)

जो व्यक्ति केवल बाह्य रूप से कर्म से बचना देखता है,
परन्तु उसके मन में चिंताएँ और चिन्ताएँ उमड़ती रहती हैं।
वह एक पाखंडी तपस्वी है, जो स्वयं को धोखा दे रहा है,
अंतरात्मा की शुद्धि नहीं हो रही है।

॥ पद का मराठी अर्थ ॥
(जो व्यक्ति केवल बाह्य रूप से कर्म से बचने का दिखावा करता है, परन्तु अपने हृदय में कर्मफल की चिंता करता है, वह स्वयं को धोखा देता है। क्योंकि ऐसे व्यक्ति का हृदय वास्तव में शुद्ध नहीं हुआ है।)

4. (शरीर यात्रा)

शरीर ही साधन है, मोक्ष की सच्ची सीढ़ी है,
इसके पालन के लिए, भले ही कर्म से बचा न जाए।
शरीर की यात्रा तुम्हारी है, यह पूर्ण नहीं होगी,
कर्म के बिना जीवन व्यर्थ है।

॥ मराठी पद का अर्थ ॥

(आध्यात्मिक उन्नति के लिए शरीर एक महत्वपूर्ण साधन है, इसलिए इसका पोषण आवश्यक है। कर्म किए बिना इस शरीर (शरीर यात्रा) का निर्वाह संभव नहीं है। यदि कोई कर्म नहीं करता, तो उसका जीवन व्यर्थ हो जाता है।)

5. (जीवन से उदाहरण)

किसान का श्रम, अन्न और जल उगाने के लिए,
सैनिक का धर्म, इस भूमि की रक्षा के लिए।
प्रत्येक कर्म आवश्यक है, विश्व के कल्याण के लिए,
कर्मयोग सबसे सरल है, इस मार्ग का मार्ग।

॥ मराठी पद का अर्थ ॥
(उदाहरणार्थ, किसान के परिश्रम से ही हमें अन्न-जल मिलता है और सैनिक के कर्तव्य से ही पृथ्वी की रक्षा होती है। संसार की व्यवस्था सुचारू रूप से चलने के लिए प्रत्येक कर्म आवश्यक है। अतः कर्मयोग ही जीवन जीने का सरल और सच्चा मार्ग है।)

6. (निराकाम कर्म)

कर्म करो, पर फल में आसक्त मत हो।
अपना मन केवल प्रभु की इच्छा पर ही लगाओ।
कामना के बंधन से कर्म की पूजा करो।
वही सच्चा अर्पण है, श्री हरि को अर्पण करो।

॥ मराठी पद का अर्थ ॥

(कर्म करते समय कभी भी उसके फल में आसक्त नहीं होना चाहिए। केवल प्रभु को ही अपने मन का आधार बनाओ। बंधन (स्वार्थ रहित) से किया गया कर्म ही ईश्वर की सच्ची पूजा है और वही ईश्वर को सच्चा अर्पण है।)

7. (उपसंहार और निष्कर्ष)

अतः हे अर्जुन, निष्ठापूर्वक युद्ध करो।
कर्मयोग ही सच्चा भक्तिमार्ग है।
तुम्हारा नियत कर्म ही तुम्हारा आधार है,
कर्म का त्याग मत करो, फल की हँसी का त्याग करो।

॥ मराठी पद का अर्थ ॥
(अतः हे अर्जुन, अपने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए निष्ठापूर्वक युद्ध करो। कर्म योग ही भक्ति की ओर ले जाने वाला सच्चा मार्ग है। तुम्हारा नियत कर्म ही तुम्हारा आधार है। कर्म का त्याग मत करो, केवल कर्म के फल की इच्छा (हँसी) का त्याग करो।)

🖼� सार (इमोजी सारांश)
🏹 🎯 🧘�♂️ 👨�🏭 🌾 💧 ⚖️ 🕉� (अर्थ: अर्जुन/कर्तव्य, लक्ष्य, कर्म योग, कर्मी/कार्य, कृषि/जीविका, जीवन जल/सुगमता, न्याय/संतुलन, भक्ति/ईश्वर)

--अतुल परब
--दिनांक-14.11.2025-शुक्रवार.       
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