संत निळोबा-“जय जयजी विष्णुदास। भक्तिभाव तुझा कैसा-भक्ति की महिमा ✨💈 👑 🪞 🕉️

Started by Atul Kaviraje, November 14, 2025, 04:39:30 PM

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Atul Kaviraje

        संत निळोबा-

      "जय जयजी विष्णुदास। भक्तिभाव तुझा कैसा॥

     जन्मोती न्हावियाचे वंशी। भक्ति केली तुवा भोळी॥

     प्रत्यक्ष पूर्णब्रह्म दावी। राजयासी आरसा ॥

     दावियेले कौतुक। देव पूजेचिये वेळी ॥

     श्रावण वद्य द्वादशी। सेना बैसे समाधीसी।

     निळा शरण प्रेमभावे। विष्णुदास सोनियासी॥

🙏🚩 संत नीलोबरई 🚩🙏

✨ संत सेना महाराज (विष्णुदास) की भक्ति की महिमा ✨

📜 अभंग का संक्षिप्त अर्थ
संत नीलोबरई कहते हैं, हे विष्णुदास (सेना महाराज), आपकी भक्ति अद्भुत है। नाई कुल में जन्म लेकर भी आपने सरल और निष्कपट भक्ति की। इसी भक्ति के कारण, आराधना के समय, स्वयं परम ब्रह्म ने राजा की सेवा हेतु आपका रूप धारण किया और दर्पण में स्वयं को राजा को समर्पित कर दिया। श्रावण मास की द्वादशी को आपने समाधि ली। मैं, नीलोबरई, इस तेजस्वी विष्णुदास के प्रति प्रेमपूर्वक समर्पित हूँ।

🌼 दीर्घ मराठी कविता: विष्णुदास की महिमा 🌼

1. (प्रणाम और भक्ति की महिमा)

संतों में श्रेष्ठ विष्णुदास, आपकी जय हो,
आपकी भक्ति कैसी है, मेरी महान महिमा।
आपके चरणों में लीन रहना, यही महान अभिलाषा है,
आपका नाम कीर्तन हो, आपके पुण्य का लाभ उठाऊँ।

॥पद का मराठी अर्थ ॥
(हे संत सेना महाराज, आपकी जय हो! आपकी भक्ति कितनी असाधारण है! आपकी इस महान महिमा के कारण, मैं भी आपके चरणों में नमन करना चाहता हूँ। यदि आप निरंतर आपका नाम लेते रहेंगे, तो आपको पुण्य की प्राप्ति होगी।)

2. (जाति की हीनता और भक्ति की पवित्रता)

आपका जन्म भले ही नाई कुल में हुआ था,
परन्तु आपकी भोली भक्ति ने संसार को भेद दिया।
हे भक्तराज सेना, आपने जाति-पाँति नहीं देखी,
केवल अपने हृदय में आपने विट्ठल की गुफा रखी।

॥पद का मराठी अर्थ ॥

(यद्यपि आपका जन्म नाई समाज में हुआ था, फिर भी आपकी निष्कपट, सरल भक्ति ने संसार को भेद दिया। हे भक्तराज सेना, आपने जाति-पाँति को महत्व नहीं दिया, केवल अपने हृदय में (विट्ठल के नाम का) धन रखा।)

3. (पूजा का रंग और कर्तव्य-विस्मृति)

एक बार पूजा में आपका मन तल्लीन हो गया,
आप तुरंत राज-सेवा के बंधन भूल गए।
आपकी मनोवृत्ति देखकर भगवान शीघ्रता से दौड़े,
उन्होंने संकट दूर किया, शरण ली।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥

(एक बार आप भगवान की पूजा में इतने लीन हो गए कि राजा की सेवा का कर्तव्य भूल गए। आपकी यह भाव-भंगिमा देखकर भगवान तुरंत दौड़े, उन्होंने आपकी संकट-विनाशकारी शरण ली।)

4. (भगवान का स्वरूप और स्तुति)

भगवान की पूजा के समय आपने स्तुति की,
पूर्णब्रह्म विट्ठल, महान सुख का प्रदर्शन किया।
नाई का रूप धारण करके उन्होंने राजा की सेवा की,
भक्त भगवान के लिए उन्होंने मजे से खेला।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥

(भगवान की आराधना के समय भगवान ने बड़ी स्तुति (चमत्कार) दिखाई। वास्तव में पूर्णब्रह्म विट्ठल ने नाई का रूप धारण करके राजा की सेवा की। भगवान ने स्वयं भक्त के लिए यह अद्भुत खेल किया।)

5. (दर्पण में देखा)

जब राजा ने दर्पण में भगवान को देखा,
तो वास्तव में उनका रूप विट्ठल का था।
तब राजा को एहसास हुआ कि यह कोई साधारण नाई नहीं है,
भक्त में भगवान का वास है, इसमें कोई संदेह नहीं रहा।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥

(जब राजा दर्पण में अपने नाई को देख रहे थे, तो उन्हें उस रूप में विट्ठल का तेज दिखाई दिया। तब राजा को विश्वास हो गया कि यह कोई साधारण मनुष्य नहीं है, भक्त में स्वयं भगवान निवास करते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है।)

6. (समाधि: जीवन की सिद्धि)

कर्मयोग का अभ्यास करके, वे भक्ति के मार्ग पर चल पड़े,
श्रावण के बारहवें दिन वे समाधि में बैठ गए।
शरीर के बंधन तोड़कर, वे विट्ठल में अन्तर्धान हो गए,
हे अमरलोक, आपने निवास कर लिया है।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥

(आपने अपने कर्म (कर्तव्य) और भक्ति का उचित समन्वय करते हुए अपना जीवन व्यतीत किया। श्रावण मास की द्वादशी तिथि को आपको समाधि प्राप्त हुई। शरीर के बंधनों को तोड़कर आप ईश्वर में विलीन हो गए और अमरत्व प्राप्त कर विट्ठललोक में निवास करने लगे।)

7. (नीलोबा को समर्पित)

प्रेम में लीन, नीलोबा शरण कहो,
विष्णुदास सोनियासी, मैं प्रतिदिन ऐसा करूँगा।
मैं आपकी जीवनी गाऊँगा, यही मेरा व्रत है,
मैं तुम्हें भक्ति की यह महान कथा सुनाऊँगा, मैं तुम्हें ईश्वर का प्रेम सुनाऊँगा।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥
(संत नीलोबरई कहते हैं, मैं सदैव प्रेम और विनम्रता से इस तेजस्वी (स्वर्णिम) विष्णुदास के प्रति समर्पित हूँ। आपकी जीवनी का गान करना मेरा संकल्प है, क्योंकि आपकी भक्ति की महान कथा ईश्वर प्रेम को प्रमाणित करती है।)

🖼� सारांश (इमोजी सारांश)
💈 👑 🪞 🕉� 💖 🥻 🙏 (अर्थ: नाई/सेवा, राजा/पृथ्वी, दर्पण/दृष्टि, विट्ठल/ईश्वर, प्रेम/भक्ति, समाधि/मृत्यु, नीला आश्रय/विनम्रता)

--अतुल परब
--दिनांक-14.11.2025-शुक्रवार.
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