🙏👑💡 चाणक्य नीति - अध्याय 1, श्लोक 16 💡👑🙏 💖 गुणों का परख:-🧪🍯💰🧠👑💡🎓

Started by Atul Kaviraje, November 14, 2025, 04:47:14 PM

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Atul Kaviraje

चाणक्य नीति प्रथम अध्याय -

विषादप्यमृतं ग्राह्यममेध्यादपि काञ्चनम् ।
नीचादप्युत्तमा विद्यास्त्रीरत्नं दुष्कुलादमि ।।१६।।

🙏👑💡 चाणक्य नीति - अध्याय 1, श्लोक 16 💡👑🙏

💖 गुणों का परख: चाणक्य नीति का भक्ति आधार 💖

📜 श्लोक का संक्षिप्त अर्थ
विष से अमृत ग्रहण करना चाहिए, अशुद्ध स्थान से सोना ग्रहण करना चाहिए। नीच (सामान्य) व्यक्ति से भी उत्तम ज्ञान प्राप्त करना चाहिए और भले ही वह बुरे कुल में जन्मी हो, गुणवान स्त्री को (पत्नी के रूप में) स्वीकार करना चाहिए।

🌼 दीर्घ मराठी कविता: नीति के प्रति समर्पण 🌼
1. (आचार्य और ईश्वरीय नीति)

हे ईश्वर, आपकी नीति, जगत का आधार,
आचार्य चाणक्य ने, इसका सुंदर विस्तार किया।
गुणों का मूल्य महान है, इसका मूल नहीं देखना चाहिए,
जहाँ भी ज्ञान का प्रकाश दिखाई दे, वहाँ कदम रखना चाहिए।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥
(हे प्रभु, संसार आपके धर्म से ही चलता है। आचार्य चाणक्य ने इसी धर्म का विस्तार किया है। वस्तु या ज्ञान के स्रोत को न देखते हुए, केवल उसके गुणों को ही महत्व देना चाहिए। जहाँ भी ज्ञान का प्रकाश मिले, वहाँ विनम्रतापूर्वक जाना चाहिए।)

2. (विषादप्यमृतं ग्राह्यम्)

यदि विष से अमृत भी हाथ में आ जाए,
तो उसे बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत स्वीकार कर लेना चाहिए।
अशुभ संकटों से शुभ अर्थ ग्रहण करो,
जीवन के उस पाठ को ईश्वर का समझकर अपने हृदय में धारण करो।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥

(यदि विष के संपर्क से अमृत भी प्राप्त हो जाए, तो भी उसे तुरंत स्वीकार करने में संकोच नहीं करना चाहिए। जीवन के प्रत्येक बुरे अनुभव (विष से) से एक अच्छा अर्थ और एक महत्वपूर्ण शिक्षा ग्रहण करें, और उस शिक्षा को ईश्वर की शिक्षा के रूप में अपने हृदय में धारण करें।)

3. (अमेध्यादपि कांचनम्)

यदि सोना अशुद्ध स्थान पर भी गिर जाए,
तो उस सोने की शुद्धता कभी कम नहीं होती।
उसका मूल्य वही रहता है, उस स्थान की ओर न देखें,
अच्छे विचारों को ग्रहण करें, आदर करें।

॥ मराठी पद का अर्थ ॥

(यदि सोना अशुद्ध या गंदे स्थान पर भी गिर जाए, तो भी उसकी मूल शुद्धता और मूल्य कम नहीं होता। इसी प्रकार, किसी भी अप्रिय या दूषित स्रोत से प्राप्त अच्छे विचारों को आदरपूर्वक ग्रहण करना चाहिए।)

4. (नीचादप्युतमा विद्या)

यदि आपको किसी नीच व्यक्ति से अच्छा ज्ञान प्राप्त हो,
तो उसे विनम्रतापूर्वक ग्रहण करें, और ज्ञान के लिए अपना हृदय खोलें।
गुरु ही सच्चा है, जो शुद्ध ज्ञान देता है,
स्वयं ईश्वर का अंश देखो, बुद्धि ही बुद्ध है।

॥पद का मराठी अर्थ ॥

(यदि सामाजिक या आर्थिक रूप से निम्न समझे जाने वाले व्यक्ति से भी श्रेष्ठ ज्ञान मिले, तो उसे विनम्रतापूर्वक स्वीकार करो। ज्ञान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का अंश देखो, इससे तुम्हारी बुद्धि स्वतः ही बुद्धिमान हो जाती है।)

5. (स्त्रातनम दुष्कुलादपी)

स्त्री का रत्न सद्गुणी है, चाहे वह दुष्ट कुल की ही क्यों न हो,
मन से उसका मूल्य ग्रहण करो, उसे नष्ट होते मत देखो।
उसके गुणों की चमक, वही मूल्यवान है,
दिव्य शक्ति, उसका व्यक्तित्व देखना चाहिए।

॥पद का मराठी अर्थ ॥

(सद्गुणों से संपन्न स्त्री, चाहे वह बुरे कुल में भी जन्मी हो, उसके गुणों को महत्व देकर उसे स्वीकार करना चाहिए। उसके कुल के दोषों को न देखें। उसके गुणों में ही ईश्वरीय शक्ति है, यह जानना चाहिए।)

6. (सबसे बड़ा सिद्धांत)

हे ईश्वर, आपने जीवन दिया, यही सूत्र है,
स्वार्थ और अहंकार, इसे मन से दूर रखो।
अच्छाई ग्रहण करो, छोड़ो,
प्रभु की यही शिक्षा, हमारा स्रोत है।

॥ पद का मराठी अर्थ ॥

(जीवन जीने का यह दर्शन स्वयं प्रभु ने दिया है। इसलिए व्यक्ति को अपने मन से अहंकार और स्वार्थ को दूर रखना चाहिए। वस्तु या ज्ञान का स्रोत चाहे जो भी हो, उसे केवल अच्छाई (मूल्य) को ही ग्रहण करना सीखना चाहिए। प्रभु की यही शिक्षा हमें जीवन में आगे ले जाती है।)

7. (निष्कर्ष और भक्ति)

अतः चाणक्य की नीति सत्य है,
ईश्वर हर कोने में निवास करें।
हम सत्य और सदाचार का संग्रह करेंगे,
हरि की कृपा से जीवन सफल करेंगे।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥

(अतः आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई यह नीति पूर्णतः सत्य है। क्योंकि प्रत्येक अच्छी वस्तु में ईश्वर का वास है। हम सदैव सत्य और सदाचार का संग्रह करने का प्रयास करेंगे और ईश्वर की कृपा से हमारा जीवन सफल होगा।)

🧪🍯💰🧠👑💡🎓🌍💖 (अर्थ: विष, अमृत, स्वर्ण, ज्ञान, स्त्री रत्न, चाणक्य नीति, ज्ञान/बुद्धि, संसार/व्यावहारिक, भक्ति/प्रेम)

--अतुल परब
--दिनांक-14.11.2025-शुक्रवार.
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