🙏👑💎 संत कबीर दास जी का दोहा 👑💎🙏 💖 शील: गुणों की खान 💖🙏📜💎👑💖😇🧘‍♂️✨

Started by Atul Kaviraje, November 14, 2025, 04:52:11 PM

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Atul Kaviraje

कबीर दास जी के दोहे-

शीलवन्त सबसे बड़ा, सब रतनन की खान।
तीन लोक की सम्पदा, रही शील में आन॥१६॥

🙏👑💎 संत कबीर दास जी का दोहा 👑💎🙏

💖 शील: गुणों की खान 💖
📜 दोहे का संक्षिप्त अर्थ
कबीर दास जी कहते हैं कि गुणवान व्यक्ति (सच्चे चरित्र वाला) सबसे महान होता है, क्योंकि वह सभी रत्नों (गुणों) की खान होता है। स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल, तीनों लोकों का सारा धन (धन और शांति) गुणवान व्यक्ति में ही आकर निवास करता है।

🌼 लंबी मराठी कविता: गुण की महानता 🌼
1. (प्रस्तावना और ईश्वर का विधान)

हे मानव, अपनी वाणी सुन, हे ईश्वर, घर की वाणी,
कबीर के सत्य वचन, तेरे हृदय में आएँ।
जो गुणवान है, वही सच्चा महान है,
जो धन का त्याग करता है, वही जीवन और पालन करता है।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥
(हे मनुष्य, संत कबीर द्वारा कहे गए ईश्वर के घर के सत्य वचनों को सुनो और उन्हें आत्मसात करो। जो मनुष्य गुणवान है, वही वास्तव में महान है। उसे भौतिक धन के मोह का त्याग करना चाहिए और अपने गुणों की रक्षा करनी चाहिए।)

2. (सबसे महान)

सबसे महान, जिसका चरित्र शुद्ध है,
जिसके गुण सत्य, दया, क्षमा हैं, जिसकी बुद्धि बुद्ध है।
यही सच्चा रत्न है, यही महानता है,
यह ईश्वर द्वारा प्रदत्त मनुष्य की रीढ़ है।

॥ शब्द का मराठी अर्थ ॥

(जिसका चरित्र शुद्ध है, वह सभी लोगों में महान है। जिसके मन में सत्य, दया और क्षमा के ये गुण निवास करते हैं, उसकी बुद्धि बुद्धिमान हो जाती है। यही गुण मनुष्य का सच्चा रत्न और आधार है।)

3. (सब रत्नों की खान)

सभी रत्नों की खान, उसका हृदय जानता है,
उसके पास गुणों का अनंत भंडार है।
सोना, चाँदी, हीरे, इनसे ज़्यादा कीमती,
इससे ज़्यादा कीमती, दुनिया में कुछ भी नहीं है, अनमोल।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥
(जैसे खान में अनमोल रत्न होते हैं, वैसे ही गुणवान व्यक्ति का हृदय सभी गुणों की खान है। गुण का मूल्य हीरे और सोने से भी ज़्यादा है, दुनिया में इससे ज़्यादा कीमती कुछ भी नहीं है।)

4. (तीन लोगों का धन)

तीन लोगों का धन, उसके घर आता है,
देवत्व स्वतः ही, उसके मन में बस जाता है।
स्वर्ग का वैभव, पाताल में शांति,
सभी सुख प्राप्त होते हैं, गुण के नाद में।

॥ श्लोक का मराठी अर्थ ॥

(स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल तीनों लोकों का ऐश्वर्य और वैभव, सद्गुणी व्यक्ति के यहाँ स्वतः ही आ जाता है। उसके मन में दिव्यता निवास करती है। सभी प्रकार के सुख और शांति केवल चरित्रवान व्यक्ति को ही प्राप्त होते हैं।)

5. (आंतरिक शांति का खजाना)

बाह्य धन नाशवान है, वह कभी टिकता नहीं।
उसका पुण्यरूपी धन कभी नष्ट नहीं होता।
यही आंतरिक शांति का सच्चा खजाना है।
दुख सहने पर भी उसे नैतिक मर्यादा का पालन करना चाहिए।

॥ मराठी पद का अर्थ ॥
(भौतिक धन नष्ट हो जाता है, परन्तु नैतिकता का धन कभी नष्ट नहीं होता। नैतिकता ही आध्यात्मिक शांति और संतुष्टि का वास्तविक खजाना है। इसलिए, चाहे व्यक्ति कितना भी कष्ट सहे, उसे अपने चरित्र का पालन करना चाहिए।)

6. (उदाहरण का महत्व)

उदाहरण देखना चाहिए, उन सभी संतों का,
नैतिकता के कारण ही उन्हें वास्तविक महत्व प्राप्त हुआ।
उनके वचनों के पीछे नैतिकता का भाव था,
इसीलिए वे संसार में अत्यधिक आदरणीय हैं।

॥ इस पद का मराठी अर्थ ॥
(यदि आप इसका अनुभव करना चाहते हैं, तो आपको सभी संतों के चरित्र पर गौर करना चाहिए। उनके आचरण के कारण ही उन्हें समाज में वास्तविक महत्व प्राप्त हुआ। उनके वचनों के पीछे ईमानदारी थी, इसीलिए वे संसार में अत्यधिक आदरणीय हैं।)

7. (निष्कर्ष और भक्ति)

अतः भक्ति के साथ, व्यक्ति को नैतिक आचार संहिता का पालन करना चाहिए,
वही प्रभु है, वही जीवन का अर्थ है।
कबीर कहते हैं, हरि का ध्यान करो, शीला में करो,
वही मोक्ष का मार्ग है, वही सुख की बयार है।

॥ इस पद का मराठी अर्थ ॥

(अतः शीला को भक्ति भाव से संरक्षित करना चाहिए, क्योंकि शीला ही ईश्वर का स्वरूप और जीवन का सच्चा अर्थ है। कबीर कहते हैं, शीला में ही ईश्वर का चिंतन होता है। शीला ही मोक्ष का मार्ग और सुख की अनुभूति देने वाली है।)

🙏📜💎👑💖😇🧘�♂️✨ (अर्थ: कबीर/संत, नीति/शिक्षा, रत्न/सद्गुण, मुकुट/महानता, प्रेम/भक्ति, दिव्यता, ध्यान/आध्यात्मिक शांति, तेज/समृद्धि)

--अतुल परब
--दिनांक-14.11.2025-शुक्रवार.       
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