रासलीला और मोगरा:-🌕🎶👯‍♀️🌸🍃💃

Started by Atul Kaviraje, November 15, 2025, 11:17:20 PM

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Atul Kaviraje

रासलीला और मोगरा:-

१. रास-वन में, रास-मोगरा सफेद खिला,
उसकी सुगंध वन में बिखर गई.
"कान्हा" संग "गोपियाँ" खेल खेलतीं,
अचानक आँचल कंधे से ढल गया.

अर्थ: रासलीला के वन में सफेद मोगरा खिला है, उसकी सुगंध पूरे वन में फैल रही है। कान्हा के साथ गोपियाँ खेल खेल रही थीं, तभी अचानक उनका आँचल कंधे से नीचे सरक गया। 🌸🍃💃

२. पूर्णिमा की रात, चाँद आकाश में हँसे,
गोपियों का समूह, कृष्ण के पास ऐसे.
बाँसुरी की धुन, मन को मोह ले,
रासलीला की शोभा, अवर्णनीय हो जाए.

अर्थ: पूर्णिमा की रात है, चाँद आकाश में हँस रहा है और गोपियों का समूह कृष्ण के चारों ओर जमा है। बाँसुरी की धुन से मन मोहित हो जाता है, रासलीला की शोभा अवर्णनीय (वर्णन करने से परे) है। 🌕🎶👯�♀️

३. राधा वहाँ नहीं, फिर भी उनकी ही याद,
हर कदम में, उनके प्रेम की धुन है नाद.
गोपियों के हृदय में, कान्हा की मूरत बसे,
उनके हर नृत्य में, प्रेम वही दिखे.

अर्थ: राधा वहाँ (रासलीला में) नहीं हैं, फिर भी उनकी ही याद आ रही है, हर कदम में उनके प्रेम की धुन सुनाई दे रही है। गोपियों के हृदय में कान्हा की मूर्ति बसी हुई है, उनके हर नृत्य में वही प्रेम दिखता है। 💖🌟

४. खेलते-खेलते, आँचल वो सरका,
कान्हा की नज़र का, स्पर्श वो लगा.
लज्जा से उस गोपी का, चेहरा लाल हुआ,
प्रेम का रंग, और भी चढ़ गया.

अर्थ: खेलते-खेलते आँचल सरक गया और कान्हा की नज़र का स्पर्श उसे महसूस हुआ। लज्जा से उस गोपी का चेहरा लाल हो गया और उस पर प्रेम का रंग और भी गहरा हो गया। 😊 blush

५. आँखें मूँद कर वो, कृष्ण को याद करे,
उनके ही सानिध्य में, उसे सुख मिले.
जग सारा भूली, भूली वो होश,
कान्हा की बाँसुरी का, वही उसका जोश.

अर्थ: आँखें मूँद कर वह कृष्ण को याद करती है, उनके ही सान्निध्य में उसे सुख मिलता है। वह जग और अपना होश सब कुछ भूल गई है। कान्हा की बाँसुरी की धुन ही उसका गीत है। 😌🎵

६. मोगरे की सुगंध, हवा में बिखरे,
गोकुल का हर कण, प्रेम से भरे.
रासलीला यह केवल, खेल नहीं,
भक्ति और प्रेम का, वो है गवाह.

अर्थ: मोगरे की सुगंध हवा में बिखर रही है और गोकुल का हर कण प्रेम से भरा हुआ है। रासलीला यह केवल खेल नहीं है, बल्कि वह भक्ति और प्रेम की गवाही है। 🌸💖

७. हे कान्हा मुरारी, तुम्हारी लीला महान,
हृदय में हमारे, देना तुम स्थान.
तुम्हारे दर्शन की, हमें आस सदा,
ले जाओ हमें, अपनी ही दिशा.

अर्थ: हे कान्हा मुरारी, तुम्हारी लीला महान है। तुम हमारे हृदय में स्थान देना। तुम्हारे दर्शन की हमें हमेशा आस (इच्छा) है। हमें अपनी ही दिशा में ले जाओ। 🙏✨

--अतुल परब
--दिनांक-15.11.2025-शनिवार.
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