संत सेना महाराज-‘जाता पंढरीसी सुख वाटे जीवा-'पंढरची ओढ़'🚶🏽‍♂️🚩🎶🤍👑💖✨

Started by Atul Kaviraje, November 16, 2025, 10:48:19 AM

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Atul Kaviraje

संत सेना महाराज-

     'जाता पंढरीसी सुख वाटे जीवा।

     आनंदे केशवा भेटताचि।'

🚩🕊� संत सेना महाराज का अभंग: 'जाता पंढरसी सुख वते जीवा' 🕊�🚩

दीर्घ मराठी कविता - 'पंढरची ओढ़'

(संत सेना महाराज)

अभंग:

जाता पंढरसी सुख वते जीवा। आनंदे केशव बेत्तेताचि॥

🎯 संक्षिप्त अर्थ:
पंढरपुर जाते ही मेरी आत्मा प्रसन्न हो जाती है, क्योंकि आनंद के अवतार विट्ठल रूपी केशव से मिलते ही मुझे परमानंद की प्राप्ति होती है।

एक रसीली भक्ति कविता
1. प्रथम मिलन (पहला कड़वा)

मेरी आत्मा पंढर की मिठास का अनुभव करती है,
मैं पैदल चलता हूँ, सुख का स्वाद लेता हूँ।
मैं एक साधारण यात्री हूँ, नाम का भूखा भक्त हूँ,
नाम स्मरण में मुझे आनंद आता है, मानो मुझे सुख मिल गया हो।

अर्थ:
मेरी आत्मा पंढरपुर की ओर आकर्षित है।
मेरे पैर उस पथ पर सुख की धारा बहाते हुए चल रहे हैं।
मैं तो बस एक साधारण भक्त हूँ जो भगवान के नाम का भूखा है,
और नाम-स्मरण में मुझे ऐसा लगता है जैसे मुझे पहली बार सुख मिला हो।

2. यात्रा का आनंद

विठ्ठुराई की मूर्ति मेरी आँखों के सामने प्रकट होती है,
पंढर जाते समय, रास्ते में जीवन की पूर्णता।
सारे शारीरिक दुःख, पल भर में भूल जाएँ,
पंढर के रास्ते में, शांति स्वतः ही प्राप्त हो जाए।

अर्थ:
विठ्ठल की मूर्ति मेरी आँखों के सामने प्रकट होती है।
जैसे-जैसे मैं पंढरपुर की ओर जाता हूँ, ऐसा लगता है मानो जीवन का अर्थ पूर्ण हो गया हो।
सारे शारीरिक दुःख तुरंत भूल जाते हैं,
और पंढरपुर के रास्ते में, हमें स्वतः ही शांति प्राप्त हो जाती है।

3. विठ्ठल की लालसा

मेरे पंढर के भगवान, विटे नदी के तट पर खड़े हैं,
उनसे मिलने की इच्छा, मेरे मन में भर जाती है।
मेरे होंठ सदैव हरि का नाम जपते हैं, मेरा शरीर नाचता है,
वह केशव मेरे मित्र हैं, मुझे राह दिखाओ।

अर्थ:
मेरे पंढरी भगवान ईंट पर खड़े हैं।
मेरा मन उनसे मिलने की तीव्र इच्छा से भरा है।
मेरे होंठ सदैव हरि का नाम जपते हैं और मेरा शरीर ताली बजाकर नाच रहा है।
वह केशव (विठ्ठल) मेरे मित्र हैं, और वे भी भक्त की प्रतीक्षा में खड़े हैं।

4. मिलन का क्षण

कितना महान आनंद है, जिसे शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता,
विठ्ठल को देखकर आत्मा आनंद से दौड़ पड़ती है।
'केशव!' इसलिए, जब आत्मा आलिंगन करती है,
तो आत्मा की सारी भूख, क्षण भर में मिट जाती है।

अर्थ:
मिलन का आनंद कितना महान है, जिसे शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता।
विठ्ठल को देखकर आत्मा आनंद से दौड़ पड़ती है।
'हे केशव!' इसलिए, जब आत्मा आलिंगन करती है,
तो आत्मा की सारी भूख, क्षण भर में मिट जाती है।

5. आनंद का स्वरूप

यह इस क्षणभंगुर संसार का आनंद नहीं है,
यह मोक्षमार्ग का आनंद है।
पांडुरंग मेरे निरंतर आधार हैं,
उनकी उपस्थिति से ही जीवन साकार होता है।

अर्थ:
यह सुख इस संसार के क्षणिक सुखों जैसा नहीं है।
यह मोक्षमार्ग पर मिलने वाला शाश्वत आनंद है।
मेरे पांडुरंग (विट्ठल) सदैव मेरा साथ देते हैं।
उनकी उपस्थिति से ही मेरा जीवन सार्थक होता है।

6. सेन महाराज की भावनाएँ

मैं सेन नाई हूँ, आपका अनन्य सेवक,
मैं अपने जीवन का सारा कार्य आपके चरणों में अर्पित करता हूँ।
आपकी कृपा से मेरा जन्म सफल हुआ है,
आपका नाम जपकर मैंने अपना जीवन सुगम बना लिया है।

अर्थ:
मैं सेन नाई हूँ, आपका अनन्य सेवक।
मैं अपने जीवन का सारा कार्य आपके चरणों में अर्पित करता हूँ।
आपकी कृपा से ही मेरा जन्म सार्थक हुआ है।
आपके नाम का स्मरण करके, मैंने अपना जीवन सुगम बना लिया है।

7. निष्कर्ष

पंढरपुर जाते हुए, मैं सारी दुनिया भूल जाता हूँ।
केशव से हर्षपूर्वक मिलकर, यही भाव मेरे हृदय में बना रहता है।
आपका नाम मेरे मुख में बना रहे,
मित्र विट्ठल, मिलन का आनंद यूँ ही बना रहे।

अर्थ:
पंढरपुर जाते हुए, मैं सारी दुनिया भूल जाता हूँ।
केशव से हर्षपूर्वक मिलकर, यही भाव मेरे हृदय में बना रहे।
आपके नाम का स्मरण सदैव मेरे मुख में बना रहे।
हे मित्र विट्ठल, आपसे मिलन का यह आनंद यूँ ही बना रहे।

✨ प्रतीक, चित्र और इमोजी सारांश:

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--अतुल परब
--दिनांक-15.11.2025-शनिवार.     
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