चाणक्य नीति प्रथम अध्याय-🧠चाणक्य नीति का स्त्री-सिद्धांत🧠📜'शक्तिचे मेहरघर'-🧠

Started by Atul Kaviraje, November 16, 2025, 10:54:21 AM

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Atul Kaviraje

चाणक्य नीति प्रथम अध्याय -

स्त्रीणां द्विगुण आहारों लज्जा चापि चतुर्गणा।
साहसं षड्गुणं चैव कामश्चाष्टगुणः स्मृत ।।१७।।

🧠 चाणक्य नीति का स्त्री-सिद्धांत 🧠📜

दीर्घ मराठी कविता - 'शक्तिचे मेहरघर'
(चाणक्य नीति: प्रथम अध्याय, श्लोक 17)

श्लोक:

स्त्रियों के द्विगुण आहारों की लज्जा। सहसं षड्गुणं चैव कामश्चष्टगुणं स्मृता।।17।।

🎯 संक्षिप्त अर्थ:
चाणक्य कहते हैं कि स्त्रियों में पुरुषों की तुलना में दुगुनी भूख, चार गुना लज्जा, छह गुना साहस और आठ गुना कामेच्छा होती है।

भक्ति रसपूर्ण काव्य
1. शक्ति का रहस्य (पहला कड़वा)

चाणक्य ने स्त्री की महान शक्ति का वर्णन किया है,
गुण कहे हैं, जिनके प्रति महान भक्ति है।
द्विगुण आहार तिजला है, पोषण का एक प्रमुख स्रोत।
यह सृष्टि का आधार है, इसकी रक्षा करनी चाहिए।

अर्थ:
चाणक्य ने स्त्री की महान शक्ति का वर्णन किया है, और उसके गुणों का उल्लेख किया है।
उसे पुरुषों से दोगुना भोजन चाहिए, क्योंकि वह इस सृष्टि का आधार है,
इसलिए उसकी रक्षा करना आवश्यक है।

2. आहार नियम

जब एक स्त्री को पुरुषों से दोगुनी भूख लगती है,
गर्भावस्था, स्तनपान, उस पर कितना बोझ होता है।
ऊर्जा का स्रोत विशाल है, उसे पोषण की आवश्यकता है,
यह प्रकृति की योजना है, इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

अर्थ:
एक स्त्री को पुरुषों से दोगुनी भूख लगती है।
क्योंकि उस पर गर्भावस्था और स्तनपान जैसी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ होती हैं।
उसे अधिक ऊर्जा और पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है।
यह प्रकृति की योजना है, इसमें संदेह करने का कोई कारण नहीं है।

3. लज्जा का वेश

शिया एक ऐसा वेश है, वह भी पुरुषों से चार गुना ज़्यादा,
संयम का कवच, समाज में इसका अच्छा पालन होता है।
यही सद्गुण और गरिमा का सच्चा रत्न है,
वह अपने आचरण में विनम्र है, लोगों को शांति प्रदान करती है।

अर्थ:
उसमें पुरुषों की तुलना में चार गुना लज्जा (शर्म) है।

यह लज्जा आत्मसंयम की ढाल है, जिसे वह समाज में उचित रूप से धारण करती है।

यह लज्जा ही सद्गुण और गरिमा का सच्चा रत्न है।
मर्यादा में रहकर, वह लोगों को शांति और स्थिरता प्रदान करती है।

4. साहस की प्रतिमूर्ति

मुसीबत के समय, उसमें छः गुना साहस होता है,
वह अपने परिवार के लिए लड़ती है, वह असली बड़ी स्टार है।
उसमें संग्रहीत साहस और सहनशक्ति,
जब उसके बच्चे उसे छेड़ते हैं, तो एक बाघ को भी डरा सकती है।

अर्थ:
मुसीबत के समय, उसका साहस पुरुषों की तुलना में छः गुना है।
वह अपने परिवार के लिए लड़ने वाली असली सहारा है।
उसमें संग्रहीत साहस और सहनशक्ति।
जब उसके बच्चों पर मुसीबत आती है, तो वह एक बाघ को भी डरा सकती है।

5. कर्म की शक्ति

उसकी इच्छाशक्ति, जो आठ गुणों से भी बढ़कर है,
कर्म ही इच्छा है, केवल वासना नहीं।
लक्ष्य प्राप्ति के प्रति उसकी प्रबल आसक्ति,
उसकी प्रबल इच्छा ही परिवार की गति बढ़ाती है।

अर्थ:
यह ज्ञात होना चाहिए कि उसकी इच्छाशक्ति (कर्म या इच्छा) पुरुषों से आठ गुना अधिक है।
कर्म केवल वासना नहीं, बल्कि लक्ष्य प्राप्ति की प्रबल इच्छा है।
लक्ष्य प्राप्ति के प्रति उसकी आसक्ति अत्यंत प्रबल है।
उसकी प्रबल इच्छा ही परिवार को आगे बढ़ाती है।

6. स्त्रियों का सम्मान

चाणक्य द्वारा बताए गए इन गुणों के महत्व ने
दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि स्त्री कमजोर नहीं है।
शक्ति, शांति और स्नेह, उसके रूप हैं,
समाज में स्त्रियों को बड़ा स्थान दिया जाना चाहिए।

अर्थ:
चाणक्य ने इन सभी गुणों के महत्व के बारे में बताया है।
उन्होंने दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि स्त्री कमजोर नहीं है।
शक्ति, शांति और प्रबल इच्छा, ये सभी उसके रूप हैं।
समाज में नारी शक्ति का उचित सम्मान बना रहना चाहिए।

7. निष्कर्ष

नारी जगत की महाना हैं, आइए हम उनकी महिमा का गुणगान करें,
हम उनकी स्वाभाविक शक्ति को सदैव नमन करें।
इस श्लोक के ज्ञान को ध्यान में रखते हुए, हमें सदैव उनका सम्मान करना चाहिए,
हम साहस के साथ उनके गुणों का सम्मान करें।

अर्थ:
नारी जगत की जननी हैं, आइए हम उनकी महिमा करें।
हमें सदैव उनकी स्वाभाविक शक्ति को नमन करना चाहिए।
इस श्लोक के ज्ञान को ध्यान में रखते हुए, हमें सदैव उनका सम्मान करना चाहिए।
प्रत्येक पुरुष को उनके गुणों का सम्मान बनाए रखना चाहिए।

🧠👑♀️💪🏽🥗羞🦁🔥🙏🏽

--अतुल परब
--दिनांक-15.11.2025-शनिवार.         
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