🙏🏽 संत कबीर के सत्य वचन: दोहा 17वाँ 🙏🏽'अमर आशा-तृष्णा'🙏🏽⏳💔💸💡✨🌍

Started by Atul Kaviraje, November 16, 2025, 10:59:53 AM

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Atul Kaviraje

कबीर दास जी के दोहे-

माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर।
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर॥१७॥

🙏🏽 संत कबीर के सत्य वचन: दोहा 17वाँ 🙏🏽

कविता - 'अमर आशा-तृष्णा'

(कबीर दास जी)

दोहा:

माया मरी नहीं, मन मर गया, शरीर मर गया-मर गया। आशा और लालसा नहीं मरी, दास कबीर कह गए। ॥॥॥

🎯 संक्षिप्त अर्थ:

माया और मन कभी शांत नहीं हुए, अनेक शरीर मर गए। परंतु मन की आशाएँ और लालसाएँ कभी समाप्त नहीं हुईं, दास कबीर कह गए।

भक्ति कविताएँ

1. अमर शरीर (पहला कड़वा)

शरीर नश्वर है, मिट्टी का वह खिलौना,
कितने काल आए, कितने काल गए, जीवन मर गया-मर गया।
इस शरीर के चक्रों में, जीवन क्षणभंगुर हो गया है,
परन्तु इस शरीर से परे, कबीर का सत्य दिखाई देता है।

अर्थ:
यह शरीर क्षणभंगुर है, मिट्टी का खिलौना है।
इस संसार में अनेक आत्माएँ जन्म लेती और मरती हैं।
जन्म-मरण के इस चक्र में आत्मा व्याकुल रहती है,
परन्तु कबीरदास इस शरीर से परे सत्य का दर्शन कराते हैं।

2. अमर माया

माया महान है, कभी नष्ट नहीं होती।
'मेरा-मेरा' कहते-कहते हम प्राण त्याग देते हैं।
सोने और मोह के धागों से आत्मा बंधी है,
मानव मोह का अंत कभी नहीं होता।

अर्थ:
यह आसक्ति (माया) बहुत महान है, कभी नष्ट नहीं होती।
'यह मेरा है' कहते-कहते आत्मा अपने ऊपर अनेक बंधन लगा लेती है।
धन और मोह के धागों ने आत्मा को जकड़ रखा है,
इस मानवीय मोह का कभी अंत नहीं हुआ।

3. चंचल मन

मन भी चंचल है, उसे विश्राम की इच्छा नहीं होती।
यह एक विचार से दूसरे विचार की ओर निरंतर यात्रा करता रहता है।
उसे शांति का मार्ग कभी पता ही नहीं चला,
शरीर मर गया, पर मन का डरना बंद नहीं हुआ।

अर्थ:
मन भी अस्थिर है, वह शांत नहीं होना चाहता।
वह हमेशा एक विचार से दूसरे विचार में भटकता रहता है।
वह शांति का मार्ग कभी नहीं जानता।
शरीर नष्ट हो जाए, तो भी मन दौड़ना बंद नहीं करता।

4. अस्थिर आशा

आशा बड़ी है, उम्मीदों का पहाड़ खड़ा है,
एक इच्छा पूरी होती है, तो तुरंत दूसरी खड़ी हो जाती है।
इस स्वार्थ के पीछे, मनुष्य दिन-रात दौड़ता रहता है,
आशा कभी नहीं मरती, यही जीवन का लक्षण है।

अर्थ:
आशा बहुत बड़ी है, यह उम्मीदों का एक बड़ा पहाड़ खड़ा कर देती है।
एक इच्छा पूरी होते ही, तुरंत दूसरी खड़ी हो जाती है।
मनुष्य इसी स्वार्थ के पीछे दिन-रात दौड़ता रहता है।
यह आशा कभी नहीं मरती, यही इस जीवन का लक्षण है।

5. वासना की प्यास

प्यास वासना है, एक अंतहीन प्यास,
पैदल चलना, तृप्त न होना।
चाहे कितना भी मिल जाए, थोड़ा और पाने की चाहत रहती है,
कबीर के अनुसार, यही दुख की पहेली है।

अर्थ:
प्यास लोभ है, एक अंतहीन प्यास।
चाहे कितना भी मिल जाए, व्यक्ति तृप्त नहीं होता।
चाहे कितना भी धन मिल जाए, फिर भी 'थोड़ा और पाने' की चाहत बनी रहती है।
कबीर के अनुसार, यही मानव दुख का महान रहस्य है।

6. कबीर की चुनौती

यदि आशा और वासना नहीं मरतीं, तो शरीर मर जाएगा,
आत्मा उनके बंधन से मुक्त नहीं होगी।
जन्म और मृत्यु का कारण, यही मन की महान आसक्ति है,
कबीर कहते हैं, सत्य को मानना ��मधुर समझना चाहिए।

अर्थ:
आशा और वासना कभी नहीं मरतीं, लेकिन शरीर नष्ट हो जाएगा।
आत्मा उनके बंधन से कभी मुक्त नहीं होगी।
जन्म और मृत्यु के चक्र का कारण मन की तीव्र आसक्ति है।
हमें कबीरदास द्वारा बताए गए इस सत्य को स्वीकार करना चाहिए।

7. मुक्ति का मार्ग

अतः, मन, माया की इस आशा को त्याग दे।
शाश्वत सत्य एक ही है, ईश्वर का मार्ग।
दास कबीर कहते हैं, भक्ति मार्ग पर चल।
अपनी इच्छाओं पर विजय प्राप्त कर, तभी तेरा उद्धार होगा।

अर्थ:
अतः, हे मन, माया की इस आशा को त्याग दे।
शाश्वत और सच्चा सत्य केवल ईश्वर की भक्ति है।
दास कबीर कहते हैं, भक्ति मार्ग को अपना।
जब तू अपनी इच्छाओं पर विजय प्राप्त कर लेगा, तभी तेरा जीवन सार्थक होगा और तेरी आत्मा को शांति मिलेगी।

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--अतुल परब
--दिनांक-15.11.2025-शनिवार.     
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