उत्पत्ति एकादशी-🙏 🪷 ✨ 🌿 👑 🕉️ 🔱

Started by Atul Kaviraje, November 16, 2025, 11:41:22 AM

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Atul Kaviraje

उत्पत्ति एकादशी-

नीचे भक्ति और अर्थ से परिपूर्ण एक सरल, सुंदर और सरस कविता प्रस्तुत है जो उत्पत्ति एकादशी के महत्व को दर्शाती है। इस कविता में सात छंद हैं, प्रत्येक छंद में चार पंक्तियाँ हैं और प्रत्येक छंद के बाद उसका अर्थ दिया गया है।

1. पहला छंद

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष, उत्पत्ति एकादशी का दिन।
आज देवी का जन्म हुआ, संसार का अंधकार नष्ट हुआ।

अर्थ: यह दिन मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसी दिन एकादशी देवी का जन्म हुआ, जिससे संसार का अंधकार (अज्ञान और पाप) दूर हुआ। (उत्पत्ति का अर्थ है जन्म/उत्पत्ति)

2. दूसरा छंद

विष्णु शरीर से प्रकट हुए,
राक्षस मुर का अंत किया।
शक्ति, तेज, रूप अलौकिक हैं,
यह कीर्ति तीनों लोकों में फैल गई।

अर्थ: यह देवी भगवान विष्णु के शरीर से प्रकट हुई थीं और उन्होंने मुर नामक शक्तिशाली राक्षस का वध किया था। उनका बल, तेज और सौंदर्य अद्भुत था और उनके पराक्रम की ख्याति तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल) में फैल गई थी।

3. तीसरा कड़वा व्रत

आज से व्रत का आरंभ,
पुण्य प्राप्ति हो।
नियमों का पालन करना चाहिए, मन शांत रखना चाहिए,
साधु-मुनियों को भक्ति में रमना चाहिए।

अर्थ: आज से एकादशी का व्रत आरंभ हो रहा है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक पुण्य प्राप्त करना है। इस दिन नियमों का पालन करते हुए मन शांत रखना चाहिए और सभी साधु-संतों और भक्तों को भक्ति में लीन होना चाहिए।

4. चौथा कड़वा व्रत

होठों से विष्णु का नाम स्मरण करना चाहिए,
उन्हें तुलसा अर्पित करनी चाहिए।
लक्ष्मी-नारायण की पूजा करनी चाहिए,
कष्ट द्वार से होकर चले जाएँगे।

अर्थ: मुख में सदैव भगवान विष्णु का नाम स्मरण करना चाहिए और उनकी पूजा में तुलसी के पत्ते चढ़ाने चाहिए। लक्ष्मी-नारायण (विष्णु) की भक्तिपूर्वक पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

5. पाँचवाँ कड़वा व्रत

इस दिन पाप धुल जाते हैं,
आत्मा को मुक्ति मिलती है।
जो कोई श्री हरि की शरण में जाता है,
उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

अर्थ: इस दिन व्रत रखने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा को जीवन में मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो कोई भगवान विष्णु (श्री हरि) की शरण में जाता है, उसे विष्णु के धाम वैकुंठ की प्राप्ति होती है।

6. छठा कड़वा व्रत

कथा सुनें, ध्यान करें,
मुर-हरि युद्ध का महान ज्ञान।
सत्य और धर्म की विजय का ज्ञान हो,
अधर्म का अंत हो।

अर्थ: उत्पत्ति एकादशी की पौराणिक कथा को शांतिपूर्वक सुनें। मुर और विष्णु के युद्ध की इस कथा से महान ज्ञान प्राप्त होता है। सत्य और धर्म की सदैव विजय होती है और दुष्ट शक्तियों (अधर्म) का नाश होता है, यही हम सीखते हैं।

7. सातवाँ कड़वा पर्व

भक्ति का यह पर्व, परम आनंद,
जीवन अमृत का घूँट बन जाता है।
भावनाओं को शुद्ध रखें,
भगवान विष्णु की कृपा का लाभ उठाएँ।

अर्थ: यह भक्ति का पर्व है, जिससे परम आनंद प्राप्त होता है। इस भक्ति से मानव जीवन अमृत के घूँट के समान मधुर और पवित्र हो जाता है। मन में भावनाओं को सदैव शुद्ध रखें और भगवान विष्णु की कृपा का लाभ उठाएँ।

प्रतीक/चित्र

🪷 (कमल): पवित्रता और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक।

🔱 (त्रिशूल): देवी की शक्ति का प्रतीक (इस संदर्भ में, देवी एकादशी ने राक्षस का वध किया था)।

✨ (चमक): तेजस्वी रूप और ज्ञान का प्रतीक।

🙏 (हाथ मिलाना): भक्ति और समर्पण का प्रतीक।

🌿 (तुलसा): भगवान विष्णु को प्रिय और पूजा में एक महत्वपूर्ण प्रतीक।

👑 (मुकुट): देवी/देवता की महिमा का प्रतीक।

🕉� (अद): भगवान के नाम का प्रतीक।

इमोजी सारांश
🙏 🪷 ✨ 🌿 👑 🕉� 🔱

--अतुल परब
--दिनांक-15.11.2025-शनिवार.
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