✍️ कविता: "मन ही सब कुछ है"

Started by Atul Kaviraje, November 17, 2025, 06:12:23 PM

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Atul Kaviraje

मन ही सब कुछ है।
आप जो सोचते हैं, वही बन जाते हैं।

✍️ कविता: "मन ही सब कुछ है"

1. सृष्टि का मूल (पहिला कदवा)
मन ही सब कुछ है, केंद्रीय कुंजी,
वह छिपी हुई कार्यशाला जहाँ सभी वस्तुएँ एक साथ मिलती हैं।
यह आपके द्वारा देखी जाने वाली दुनिया, आपके द्वारा चुने गए मार्ग,
आपके द्वारा लिए गए अंतिम निर्णयों को आकार देता है।

अर्थ: मन अस्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है; यह एक निर्माता या कार्यशाला के रूप में कार्य करता है, जो दुनिया के बारे में आपकी धारणा और आपके द्वारा लिए गए विकल्पों को निर्धारित करता है।

2. बनने का बीज (दूसरा कदवा)
विचार का एक बीज, भीतर गहराई में, बोया जाता है,
एक शांत प्रक्रिया जहाँ परिवर्तन शुरू होते हैं।
आंतरिक छवि से बाहरी रूप तक,
यह हर शांत आंतरिक तूफान का सामना करता है।

अर्थ: प्रत्येक क्रिया और बाहरी वास्तविकता एक विचार (बीज) के रूप में शुरू होती है। सोचने और कल्पना करने की यह आंतरिक प्रक्रिया अंततः उस व्यक्ति के रूप में प्रकट होती है जो आप बनते हैं।

3. सकारात्मक दृष्टि की शक्ति (तिसरा कदवा)
यदि आपका हर दिन महान विचारों से भरा हो,
और उद्देश्य आपके कहे शब्दों का मार्गदर्शन करे,
तो आप ऊँचे और उज्ज्वल लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं,
आप जो सोचते हैं, वही बनते हैं, और नियंत्रण अपने हाथ में लेते हैं।

अर्थ: सकारात्मक और उच्च विचारों (महान विचारों) पर निरंतर ध्यान केंद्रित करके, आप अपने भाग्य पर नियंत्रण रखते हैं और सफलता की ओर बढ़ते हैं, इस कहावत को सत्य सिद्ध करते हैं।

4. छाया से बचना (चौथा कदवा)
उन विचारों से सावधान रहें जो लंबे समय तक बने रहते हैं और अंधकारमय हैं,
उन तुच्छ भयों से सावधान रहें जो एक दर्दनाक निशान छोड़ते हैं।
क्योंकि यदि आप दुख और दुर्दशा पर ध्यान केंद्रित करते हैं,
तो आप आंतरिक ज्ञान और प्रकाश खो देते हैं।

अर्थ: नकारात्मक, भयभीत या विनाशकारी सोच से बचना ज़रूरी है। दुःख या नकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित करने से आपकी आंतरिक शक्ति और सकारात्मकता कम हो जाती है।

5. भाग्य के निर्माता (पाचवा कदवा)
आप ही वास्तुकार हैं, आपकी दृष्टि सच्ची है,
अपने जीवन के मुख्य निर्माता हैं।
दुनिया में इससे बड़ी कोई शक्ति नहीं हो सकती,
कि आपके मन में विचार कैसे चलते हैं।

अर्थ: मन आपको अपने भाग्य का एकमात्र निर्माता बनाता है। आपके जीवन को आकार देने में आपकी आंतरिक विचार प्रक्रियाओं से ज़्यादा शक्तिशाली कोई बाहरी शक्ति नहीं है।

6. वास्तविकता का प्रतिबिंब (सहवा कदवा)
उन लोगों का अवलोकन करें जिन्होंने अपना रास्ता खोज लिया है,
चाहे कुछ भी हो, उनके इरादे स्पष्ट थे।
उनकी बाहरी दुनिया आंतरिक योजना को दर्शाती है,
मनुष्य के हृदय में जन्मी विजय।

अर्थ: सफल लोग इस सिद्धांत का प्रदर्शन करते हैं: उनकी उपलब्धियाँ उनके मन में पहले से मौजूद स्पष्ट, अटल इरादों का प्रतिबिंब होती हैं।

7. इरादे का आह्वान (सातवा कदवा)
इसलिए अपनी मानसिकता को ध्यानपूर्वक चुनें,
जो विचार आप संजोते हैं, और जो बोझ आप उठाते हैं।
सत्य और साहस को मार्गदर्शक धारा बनने दें,
और अपने जाग्रत स्वप्न के नायक बनें।

अर्थ: अंतिम निर्देश यह है कि अपने विचारों के बारे में सोच-समझकर सोचें, सत्य और साहस को विकसित करने का चुनाव करें। ऐसा करने से आप अपनी सर्वोच्च क्षमता को पूरी तरह से साकार कर सकते हैं और वह व्यक्ति बन सकते हैं जिसका आप सपना देखते हैं।

--अतुल परब
--दिनांक-17.11.2025-सोमवार.
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