🙏 देवी मौली जातोत्सव, शिरोडा (सिंधुदुर्ग) 🌺🔱 🌺 🥁 🛕 🙏 🌊 ✨ 😊

Started by Atul Kaviraje, November 18, 2025, 12:02:00 PM

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Atul Kaviraje

देवी माऊली जत्रोत्सव-शिरोडा, जिल्हा-सिंधुदुर्ग-

🙏 देवी मौली जातोत्सव, शिरोडा (सिंधुदुर्ग) 🌺

आज, 16 नवंबर, 2025, रविवार के पावन दिन, शिरोडा में, विशेष रूप से सिंधुदुर्ग जिले में, ग्राम देवी श्री देवी मौली का पावन उत्सव मनाया जा रहा है। इस भक्तिमय वातावरण का वर्णन करती एक कविता प्रस्तुत है।

शिरोडा मौली जातोत्सव

1.
आज, 16 नवंबर, सूर्य का रविवार,
शिरोडा, मौली से भरा मेला।
सिंधुदुर्ग तट, यही भक्ति का नाद,
आज भक्तों ने देवी मौली के चरणों में शीश नवाया।

अर्थ:
आज, 16 नवंबर, रविवार, इस पावन दिन, शिरोडा गाँव में देवी मौली का मेला मनाया जा रहा है। सिंधुदुर्ग तट पर भक्ति का एक सुंदर रूप देखने को मिला है और आज सभी भक्तों ने देवी मौली के चरणों में शीश नवाया है।

2.
मंदिर लाखों दीपों से जगमगा रहा है,
दो दिवसीय उत्सव, भक्तों के लिए अपार आनंद।
कोंकण का यह आनंद, छोटे से लेकर बड़े तक,
आदि शक्ति की आराधना से यह क्षेत्र खिल उठा है।

अर्थ:
मंदिर आकर्षक दीपों से जगमगा रहा है। यह दो दिवसीय उत्सव भक्तों के लिए अपार आनंद लेकर आया है। छोटे से लेकर बड़े तक, सभी कोंकणवासी प्रसन्न हैं और आदि शक्ति की आराधना ने पूरे क्षेत्र को उत्साह से भर दिया है।

3.
भंडारा और नारियल, केले का भोग,
देवी के निमित्त, यहाँ वेध है।
भरे हुए स्तनों वाली स्त्रियाँ सुखी संसार की कामना करती हैं,
देवी की कृपा से दुःख दूर होते हैं।

अर्थ:
भक्त देवी को भंडारा, नारियल और केले का भोग चढ़ा रहे हैं। हर कोई देवी का प्रसाद ग्रहण करने के लिए आतुर है। स्त्रियाँ देवी की टोपियाँ भरकर सुखी संसार की प्रार्थना कर रही हैं। देवी मौली की कृपा से सभी दुःख दूर हो जाते हैं।

4.
मन्नतों का ज़मीन पर साष्टांग प्रणाम,
यही आस्था और विश्वास का सच्चा आधार है।
भक्त दूर-दूर से पैदल चलकर आते हैं,
भगवान से मिलने का अनुभव अद्भुत होता है।

अर्थ:
भक्त अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए ज़मीन पर साष्टांग प्रणाम करते हैं। यह सच्ची आस्था और विश्वास का प्रतीक है। भक्त दूर-दूर से पैदल चलकर आते हैं, और देवी से मिलने की खुशी उन पर छा जाती है (वे आनंद से भर जाते हैं)।

5.
ढोल और डफ की ध्वनि, शहनाई और शहनाई की ध्वनि,
भक्त खुशी से नाचते हुए आगे बढ़ते हैं।
पूरा गाँव रंगोली से सजा हुआ है,
माई मौली के जयकारे से मन भर जाता है।

अर्थ:
ढोल और डफ की ध्वनि और शहनाई और शहनाई की मधुर ध्वनि गूँज रही है। भक्त अपनी मन्नतें पूरी होने पर खुशी से नाच रहे हैं। पूरा गाँव सुंदर रंगोली से सजा हुआ है। 'मेरी मौली' का जाप मन को भक्ति से भर देता है।

6.
दशावतार नाटक, वह रात्रि खेल,
कला और संस्कृति का एक सुंदर मिश्रण।
पारंपरिक लोक कला, कोंकण का गौरव,
मेले में अनुभव प्राप्त होता है, पुराने रीति-रिवाजों का सम्मान।

अर्थ:
रात्रि में दशावतार नाटक कार्यक्रम होता है। यहाँ कला और संस्कृति का एक सुंदर मिश्रण देखा जा सकता है। पारंपरिक लोक कला कोंकण का गौरव है। इस मेले में पुराने रीति-रिवाजों का सम्मान और अनुभव प्राप्त होता है।

7.
मौली के दर्शन से मन शांत होता है,
सुख-समृद्धि बनी रहे, और भ्रम दूर हों।
मौली आपको आशीर्वाद दे, सभी सुखी रहें,
मेले का उत्सव आपकी स्मृति में बना रहे।

अर्थ:
देवी मौली के दर्शन से मन को शांति मिली है। हमारे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे और सभी दुख दूर हों। देवी सभी पर कृपा करें, ताकि हम सुखी रहें और जात्रोत्सव का यह पर्व हमारी स्मृतियों में सदैव बना रहे।

⭐ सारांश / इमोजी सारांश इमोजी ⭐

🔱 🌺 🥁 🛕 🙏 🌊 ✨ 😊
(त्रिशूल/देवी, पुष्प/अर्पण, ढोल/घंटी, मंदिर, नमस्कार/भक्ति, समुद्र तट/सिंधुदुर्ग, तेज, आनंद/उत्सव)

--अतुल परब
--दिनांक-16.11.2025-रविवार.
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