🔱 सोम प्रदोष व्रत: शिव कृपा का दिन 🌙🔱 🌙 🔔 🙏 🌿 🥛 🕉️ ✨

Started by Atul Kaviraje, November 18, 2025, 03:15:59 PM

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Atul Kaviraje

सोम प्रदोष-

🔱 सोम प्रदोष व्रत: शिव कृपा का दिन 🌙

17 नवंबर 2025, सोमवार का शुभ दिन है। सोमवार को पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष कहते हैं, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस पावन दिन की महिमा का वर्णन करने वाली एक भक्ति कविता यहाँ प्रस्तुत है।

कैलाशरण का सोम प्रदोष

1.
कल, 17 नवंबर, सोमवार, एक विशेष दिन है,
प्रदोष व्रत की महिमा, शिवभक्त अनुभव करें।
शाम को शिवशंभो कैलाश पर नृत्य करते हैं,
उस आराधना से लाभ हो, मन को शांति मिले।

अर्थ:
कल, 17 नवंबर, सोमवार, एक बहुत ही विशेष दिन है, क्योंकि आज प्रदोष व्रत की महिमा शिवभक्त अनुभव करते हैं। शाम को भगवान शिव (शिवशंभो) कैलाश पर्वत पर प्रसन्न होकर तांडव नृत्य करते हैं। उस समय की गई पूजा मन को सच्ची शांति प्रदान करती है।

2.
सोम प्रदोष व्रत, चंद्रमा का वरदान
शिव भजन से स्वास्थ्य और शांति प्राप्त होती है।
निर्जल उपवास, भक्तों की सेवा,
भोल्या शंकर की भक्ति, यही सच्चा खजाना है।

अर्थ:
चूँकि सोमवार चंद्रमा का दिन है, इसलिए सोम प्रदोष व्रत का संबंध चंद्रमा से है। भगवान शिव का भजन (पूजा) करने से उत्तम स्वास्थ्य और मन की शांति प्राप्त होती है। भक्त इस दिन बिना जल पिए व्रत रखते हैं, यही उनकी सेवा है। भोल्या शंकर की भक्ति ही हमारे लिए सच्चा खजाना (धन) है।

3.
शिव मंदिर में भीड़, घंटियाँ बज रही हैं,
बेलपत्र, दूध, जल, प्रसाद चढ़ाया जा रहा है।
ॐ नमः शिवायच, निरंतर जप,
शिव शक्ति की कृपा से दूरियाँ दूर होती हैं।

अर्थ:
शिव मंदिर में भक्तों की भीड़ है और घंटियाँ बज रही हैं। देवताओं को प्रसाद के रूप में बेलपत्र, दूध और जल चढ़ाया जाता है। ॐ नमः शिवाय का निरंतर जाप किया जाता है। शिव और शक्ति की कृपा से हमारे मन के बुरे विचार दूर होते हैं।

4.
प्रदोष काल में शाम 4:30 से 6:30 बजे तक पूजन करें।
इस शुभ समय में शिव कृपा से।
भोग के लिए खीर और धूप रखनी चाहिए।
भक्तिपूर्वक शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए।

अर्थ:
प्रदोष काल शाम लगभग 4:30 से 6:30 बजे तक होता है। इस शुभ समय में भगवान शिव की विशेष कृपा होती है। भोग के लिए खीर रखनी चाहिए और धूप-दीप रखना चाहिए। हमें भक्तिपूर्वक शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए।

5.
महादेव ने अपने कंठ से सारा विष पी लिया था।
संसार की रक्षा के लिए वे नीलकंठ बन गए थे।
आइए आज उस बलिदान को याद करें।
आइए भक्तिपूर्वक जीवन के कष्टों पर विजय प्राप्त करें।

अर्थ:
संसार की रक्षा के लिए महादेव ने हलाहल विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और इस कारण उनका रंग नीला (नीलकंठ) हो गया। आज, आइए हम उनके बलिदान को याद करें और भक्ति की शक्ति से अपने जीवन के कष्टों को दूर करें।

6.
शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं,
सोम प्रदोष व्रत से सुखों की बाढ़ आती है।
अखंड सौभाग्य, स्त्रियों का कल्याण हो,
शिवजी के चरणों में तीनों प्रहर प्रार्थना करें।

अर्थ:
इस सोम प्रदोष व्रत से शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं और जीवन में अपार सुखों की प्राप्ति होती है। विवाहित स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हो, इसके लिए हम तीनों संध्याओं (प्रदोषकाल) में शिवजी के चरणों में प्रार्थना करें।

7.
आइए भक्ति के इस पर्व को हर्षोल्लास से मनाएँ,
शिवनाम की ध्वनि से जीवन को मधुर बनाएँ।
सोम प्रदोष की कृपा से सब मंगलमय हो,
हर हर महादेव, आइए हम इस पर्व का जयघोष करें।

अर्थ:
आइए भक्ति के इस सुंदर पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाएँ। भगवान शिव के नाम का जाप करके अपने जीवन को और भी सुंदर बनाएँ। आइए, 'हर हर महादेव' का जाप करते हुए इस पर्व का आनंद लें और कामना करें कि सोम प्रदोष की कृपा से सब कुछ मंगलमय हो।

⭐ सारांश / इमोजी सारांश इमोजी ⭐

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(त्रिशूल/शिव, चंद्रमा/सोम, घंटी, नमस्कार/भक्ति, बेलपत्र, दूध/अभिषेक, ओंकार/मंत्र, कृपा)

--अतुल परब
--दिनांक-17.11.2025-सोमवार.
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