🙏 खंडेपार जात्रा, गोवा: शांतादुर्गा और भक्ति का संगम 🌴🌴 🛕 🙏 🛡️ 🔔 🥁 🎉 😊

Started by Atul Kaviraje, November 18, 2025, 03:18:07 PM

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Atul Kaviraje

खांडेपार जत्रा-गोवा-

🙏 खंडेपार जात्रा, गोवा: शांतादुर्गा और भक्ति का संगम 🌴

17 नवंबर 2025, सोमवार के शुभ दिन, प्रसिद्ध खंडेपार जात्रा (खंडेपार, गोवा) मनाई जा रही है। यह कविता गोवा की समृद्ध संस्कृति और देवी शांतादुर्गा के आशीर्वाद को व्यक्त करने के लिए प्रस्तुत है।

खंडेपार देवी की जात्रा

1.
कल, 17 नवंबर, सोमवार का शुभ दिन है।
खंडेपार गाँव में मेले की धूम मची हुई है।
शांतादुर्गा मौली की रस्म विशेष है।
गोमांतक की धरती पर, भक्ति की यह सुगंध।

अर्थ:
कल, 17 नवंबर, सोमवार का शुभ दिन है। गोवा के खंडेपार गाँव में बहुत बड़ी भीड़ उमड़ी है। यह मेला देवी शांतादुर्गा के उत्सव के लिए है, जिन्होंने गोवा की धरती पर भक्ति की सुगंध फैलाई है।

2.
देवी शांतादुर्गा का यह सुंदर रूप
शांति और शक्ति दोनों का प्रतीक है।
यह एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा है,
जिसमें सभी बच्चे और बड़े दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं।

अर्थ:
देवी शांतादुर्गा का यह एक अत्यंत सुंदर रूप है, जो शांति और शक्ति दोनों का महान प्रतीक है। यह मेला एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा है जो कई वर्षों से चली आ रही है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी देवी के दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं।

3.
प्रदोष के समय मेला और भी रंगीन हो जाता है,
दीपों की जगमगाहट, मानो आकाश की माला हो।
पारंपरिक खेलों और नाट्यों का उत्साह,
संस्कृति के प्रेम में, हर कोई उन्मत्त था।

अर्थ:
प्रदोष (शाम) के समय मेला और भी सुंदर हो जाता है। मंदिर परिसर दीपों की जगमगाहट से, मानो आकाश की माला हो। पारंपरिक खेलों और नाट्यों के लिए बहुत उत्साह होता है। हर कोई हमारी संस्कृति के प्रेम में डूब जाता है।

4.
अपनी मन्नत पूरी होने पर भक्त दंडवत प्रणाम करते हैं।
देवी की कृपा के लिए वे ध्यान करते हैं।
देवी अपने परिवार के साथ आती हैं, मीठा प्रसाद ग्रहण करती हैं।
मेले में आनंद के ये क्षण देखे जाते हैं।

अर्थ:
भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर ज़मीन पर दंडवत प्रणाम करते हैं। देवी की कृपा पाने के लिए वे मन ही मन भगवान का नाम जपते हैं। पूरा परिवार एक साथ आता है और मीठा प्रसाद ग्रहण करता है। इस मेले में आनंद के ये क्षण देखे जाते हैं।

5.
ढोल-मंजीरों की ध्वनि, शहनाई की ध्वनि,
कोंकण के भक्तों में उत्साह की बाढ़ आ जाती है।
अबीर और गुलाल, सब साथ-साथ,
देवी के जयकारों से पूरा आकाश गूंज उठता है।

अर्थ:
ढोल-मंजीरों की तेज़ ध्वनि और शहनाई की मधुर धुनें हर जगह गूँज रही हैं। कोंकण (गोवा) के भक्तों में उत्साह की एक बड़ी लहर है। सभी लोग खुशी से इत्र और गुलाल उड़ा रहे हैं। पूरा आकाश देवी के जयकारों से गूंज रहा है।

6.
आस-पास के गाँवों से लोग पैदल आते हैं,
भक्ति के इस मार्ग पर कोई खतरा नहीं है।
यात्रा में रिश्ते बनते हैं, नए परिचय बनते हैं,
मित्रता का यह धागा मन के भंडार को बढ़ाता है।

अर्थ:
आस-पास के गाँवों से लोग मेले में पैदल आते हैं। उन्हें भक्ति के इस मार्ग पर कोई भय नहीं है। मेले में होने वाली मुलाकातों से नए परिचय बनते हैं। मित्रता का यह धागा मन में अच्छी यादों के भंडार को बढ़ाता है।

7.
देवी का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे,
सभी कष्ट दूर हों,
खंडेपार मेले की महिमा महान हो,
जीवन प्रेम और सम्मान से भरा रहे।

अर्थ:
देवी शांतादुर्गा मौली का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे। वह देवी सभी कष्टों की गांठें (कठिनाइयाँ) दूर करती हैं। खंडेपार मेले का यह उत्सव बहुत महान है। आपका जीवन सदैव प्रेम और सम्मान से भरा रहे।

⭐ सारांश / इमोजी सारांश इमोजी ⭐

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(गोवा/प्रकृति, मंदिर, नमस्कार/भक्ति, शांतादुर्गा/शक्ति, घंटी, ढोल/संगीत, उत्सव, आनंद)

--अतुल परब
--दिनांक-17.11.2025-सोमवार.
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