🙏 दासगणु महापुण्यतिथि: कीर्तनरत्न का स्मरण 📖📖 🙏 🎵 👮 🖋️ 🛕 ✨ 😇

Started by Atul Kaviraje, November 18, 2025, 03:18:44 PM

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Atul Kaviraje

दासगणू महापुण्यतिथी-गोरटा, जिल्हा-नांदेड-

🙏 दासगणु महापुण्यतिथि: कीर्तनरत्न का स्मरण 📖

17 नवंबर, 2025, सोमवार के पावन दिन, संत-लेखक एवं कीर्तनरत्न श्री दासगणु महाराज की महापुण्यतिथि गोर्टा, नांदेड़ जिले में मनाई जा रही है। उनके जीवन-कर्म और भक्ति की महिमा का वर्णन करने वाली एक कविता प्रस्तुत है।

कीर्तनरत्न दासगणु की पुण्यतिथि

1.
कल सत्रह नवंबर, सोमवार का मंगल वार है।
आज गोर्टा गाँव में भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है।
दासगणु महापुण्यतिथि, स्मरण का यह दिन,
संत-लेखक का गीत, जीवन में नई ऊर्जा भर देता है।

अर्थ:
कल, 17 नवंबर, सोमवार, एक पावन दिन है। आज नांदेड़ जिले के गोर्टा गाँव में भक्ति की एक बड़ी लहर (बाढ़) उमड़ी है। यह संत दासगणू महाराज की पुण्यतिथि का स्मरण दिवस है, जो उनके संत चरित्रों के गीतों की सुगंध लेकर आता है।

2.
मधुर और रसीली, उनकी कीर्तन वाणी,
संत नामदेव और ज्ञानेश्वर द्वारा सुनाई गई कथाएँ।
शिरडी के साईं बाबा की जीवनी,
कीर्तन रत्न की सेवा, घर-घर में होती थी।

अर्थ:
दासगणू महाराज की कीर्तन वाणी अत्यंत मधुर और रसीली थी। उन्होंने संत नामदेव और संत ज्ञानेश्वर जैसे संतों की कथाएँ (कहानियाँ) सुनाईं। उन्होंने शिरडी के साईं बाबा की जीवनी बहुत सुंदर ढंग से लिखी। उनकी कीर्तन सेवा का लाभ घर-घर में होता था।

3.
गोरता उनका गाँव है, उनकी समाधि स्थल है,
उनके विचारों को, आज हम नमन करते हैं।
उन्होंने भक्ति मार्ग की शिक्षा को सरल बनाया,
जीवन जीने का सार, उन्होंने साधकों को बताया।

अर्थ:
गोरटा गाँव दासगणू महाराज का समाधि स्थल है। आज हम उनके विचारों को नमन करेंगे। उन्होंने भक्ति मार्ग का उपदेश अत्यंत सरलता से दिया। उन्होंने अपने कीर्तन के माध्यम से जीवन जीने का सच्चा सार समझाया।

4.
पूर्व पुलिस अधिकारी, वीणावादक की नौकरी छोड़कर,
जनजागृति हेतु आजीवन साधना की।
उन्होंने ज्ञान-कर्म और भक्ति का समन्वय किया,
उन्होंने साधकों के जीवन को एक पवित्र क्रीड़ा बना दिया।

अर्थ:
उन्होंने अपनी पूर्व पुलिस की नौकरी छोड़कर हाथ में वीणा (वाद्ययंत्र) धारण कर ली। उन्होंने जनजागृति हेतु आजीवन साधना की। उन्होंने ज्ञान, कर्म और भक्ति का सुंदर सामंजस्य स्थापित किया। इससे भक्तों का जीवन एक पवित्र क्रीड़ा (आनंद) के समान हो गया।

5.
मराठी भाषा में प्रचुर साहित्य है,
अभंगों, ओवों और पदों का सागर।
उन्होंने पत्र और कलम को महान बनाया,
दासगणू का कर्म, मन को ज्ञान प्रदान करता था।

अर्थ:
उन्होंने मराठी साहित्य में महान योगदान दिया। उनके अभंग, ओव और पदों का एक विशाल संग्रह (समुद्र) है। उन्होंने पत्रों और लेखनी के माध्यम से महान कार्य किया। दासगणु महाराज का यह कार्य हमारे मन को आलोकित करता है।

6.
पुण्यतिथि समारोह, भक्तों की भीड़,
प्रवचन और भजन, श्रवण की मधुरता।
सभी भक्तजन महाप्रसाद का लाभ उठाएँ,
कीर्तन जन्म-मरण की वायु थी।

अर्थ:
इस पुण्यतिथि समारोह में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ी है। सभी ने प्रवचन और भजन सुनने का आनंद लिया है। सभी भक्तजन महाप्रसाद का लाभ उठाएँ। उनके कीर्तन से जन्म-मरण (वायु) का चक्र कम हो जाता है (मुक्ति प्राप्त होती है)।

7.
दासगणु महाराज का नाम स्मरण करें,
उनके विचारों के साथ आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करें।
पुण्य तिथि के दिन, हम उन्हें नमन करें,
भक्ति का जीवन, जीवंतता से परिपूर्ण हो।

अर्थ:
आइए हम निरंतर दासगणु महाराज का नाम जपें। उनके विचारों का अनुसरण करके अपने जीवन को सुखमय बनाएँ। इस पुण्य तिथि पर, आइए हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करें और अपने भक्तिमय जीवन को नई चेतना (जीवंतता) प्रदान करें।

⭐ सारांश / इमोजी सारांश इमोजी ⭐

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(पुस्तक/जीवनी, प्रणाम/भक्ति, कीर्तन/वीणा, पुलिस/पूर्व नौकरी, कलम/साहित्य, मंदिर/समाधि, ज्ञान, संत)

--अतुल परब
--दिनांक-17.11.2025-सोमवार.
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