🚩 देव रावलनाथ यात्रा - अकेरी, सिंधुदुर्ग-🚩 🌴 🥁 🔮 🎭 🥥 🗡️ 🙏

Started by Atul Kaviraje, November 19, 2025, 07:41:22 PM

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Atul Kaviraje

देव रवळनाथ यात्रा-आकेरी, जिल्हा-सिंधुदुर्ग-

19 नवंबर 2025 (बुधवार) को सिंधुदुर्ग जिले के अकेरी में होने वाली देव रावलनाथ यात्रा पर आधारित-

🚩 देव रावलनाथ यात्रा - अकेरी, सिंधुदुर्ग-
(देव रावलनाथ यात्रा पर भक्ति कविता)

- भक्ति कविता 🌺

1. कोंकण की धरती, भगवान का निवास

सिंधुदुर्ग जिला 🏖�, अकेरी इसका नाम है,
कोंकण की धरती में, रावलनाथ का निवास,
जागृत ग्राम देवता, कृपा के सागर,
भक्तों की पुकार पर, ये देवता दौड़े चले आते हैं।

अर्थ: सिंधुदुर्ग जिले के अकेरी में, देव रावलनाथ का मंदिर है। कोंकण की इस धरती में उनका एक स्थान है। वे जाग्रत ग्राम देवता, कृपा के सागर हैं। भक्तों के पुकारते ही, वे सहायता के लिए दौड़े चले आते हैं।

2. मेला दिवस, बुधवार योग

कार्तिक अमावस्या 🌑, बुधवार का शुभ दिन,
19 नवंबर 📅, मेले का अपार उल्लास,
गाँव-गाँव से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं,
भगवान के तीर्थ-पर्व, आनंद की सौगात।

अर्थ: कार्तिक मास की दर्श अमावस्या और बुधवार शुभ योग हैं। 19 नवंबर को तीर्थ-पर्व का अपार उल्लास रहता है। अनेक गाँवों से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। भगवान के तीर्थ-पर्व से वातावरण आनंदमय हो जाता है।

3. रावलनाथ का स्वरूप और कार्य

रावलनाथ 🗡� का स्वरूप, भैरव का,
रक्षक देवता, उनका महान स्थान,
बुरी शक्तियों का नाश करने वाले, भक्तों को शक्ति प्रदान करने वाले,
आइए हम अपनी भक्ति उनके चरणों में अर्पित करें।

अर्थ: देव रावलनाथ का स्वरूप कुछ-कुछ भैरव (शिव का उग्र रूप) जैसा है, लेकिन वे गाँव के रक्षक हैं। वे बुरी शक्तियों का नाश करते हैं और अपने भक्तों को शक्ति प्रदान करते हैं। हमें उनके चरणों में विश्वास रखना चाहिए।

4. पालकी समारोह और भक्ति का रंग

भगवान की मूर्ति की पालकी गाँव से निकलती है,
हाथों में ध्वजाएँ लिए सभी भक्त चलते हैं,
पूरा गाँव भजन, कीर्तन और भगवान के नाम की ध्वनि से गूंज उठता है,
भक्ति के इस रंग में सभी भेदभाव मिट जाते हैं।

अर्थ: शोभायात्रा के दौरान, भगवान की मूर्ति की पालकी पूरे गाँव से निकाली जाती है। भक्त पालकी के साथ हाथों में ध्वजाएँ (झंडे) लिए चलते हैं। पूरा गाँव भजन, कीर्तन और भगवान के नाम की ध्वनि से गूंज उठता है। भक्ति के इस उत्साह में सभी प्रकार के भेदभाव नष्ट हो जाते हैं।

5. नारियल और कौल-प्रसाद का महत्व

शोभायात्रा के दौरान कौल 🔮 लेने की परंपरा है।
भविष्य की दिशा ज्ञात होती है, भगवान के उस कान से।
जो भक्त नारियल 🥥 चढ़ाता है, उसकी मन्नत पूरी होती है।
भगवान की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं।

अर्थ: इस मेले में भगवान से कौल (भगवान का संकेत) लेने की परंपरा है, जिससे भविष्य में होने वाली घटनाओं की दिशा का पता चलता है। भक्त नारियल चढ़ाकर अपनी मन्नत पूरी करते हैं। भगवान की कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

6. कोंकण की लोक कलाओं के दर्शन

उत्सव के दौरान खेलों 🎭 का एक बड़ा घेरा होता है।
नमन-खेल, दशावतार, कोंकण का यह चलन।
यहाँ पारंपरिक कलाओं को भव्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
संस्कृति की विरासत को संजोने का यही सच्चा प्रयास है।

अर्थ: इस मेले में नमन-खेल और दशावतार जैसी कोंकण की पारंपरिक लोक कलाओं को प्रस्तुत किया जाता है। यहाँ पारंपरिक कलाओं का एक विशाल मंच देखा जा सकता है। यह हमारी संस्कृति की विरासत को संरक्षित करने का एक अच्छा प्रयास है।

7. आशीर्वाद और अंतिम संदेश

भगवान रावलनाथ का आशीर्वाद लें 💖,
सुखी, समृद्ध जीवन ही परम प्रसाद है,
भक्तिपूर्वक सेवा करें, निःस्वार्थ भाव से कार्य करें,
कोंकण धर्म का पालन करें।

अर्थ: भगवान रावलनाथ का आशीर्वाद लें। सुखी और समृद्ध जीवन ही उनका महाप्रसाद है। निःस्वार्थ भाव से उनकी सेवा करें। रावलनाथ की कृपा से कोंकण धर्म (रीति-रिवाजों) का पालन करना चाहिए।

🖼� प्रतीक और इमोजी सारांश
अवधारणा भूमिका विवरण प्रतीक (प्रतीक/इमोजी)

भगवान रावलनाथ 🚩 ध्वज
स्थान सिंधुदुर्ग, कोंकण 🌴 कोंकण
त्योहार मेला, पालकी 🥁 ढोल
भक्ति कौल, नवस 🔮 कौल
कलात्मक चरण दशावतार, नमन 🎭 मुखौटा
भक्ति / अर्पण नारियल 🥥 नारियल
रक्षक / उग्र रूप रावलनाथ 🗡�
भक्ति / आस्था भक्त / सेवा 🙏

इमोजी सारांश (एक पंक्ति में):
🚩 🌴 🥁 🔮 🎭 🥥 🗡� 🙏

--अतुल परब
--दिनांक-19.11.2025-बुधवार.
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