🔱 पुराणों में शिव का शाश्वत और अनंत इतिहास:🕉️-1-🙏🧘‍♂️🌌 | 🔥🌊💨☀️🌙 | 🌊🐍

Started by Atul Kaviraje, December 10, 2025, 10:00:35 PM

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Atul Kaviraje

पुराणों में शिव का इतिहास-
(History of Shiva in Puranas)

🔱 पुराणों में शिव का शाश्वत और अनंत इतिहास: एक कमेंट्री 🕉�

इंट्रोडक्शन: शिव के रूप

1. शिव के तीन रूप

A. शाश्वत और अनंत: शिव समय की सीमाओं से परे हैं। उनका न कोई जन्म है, न कोई मृत्यु; वे स्वयं विद्यमान हैं।
B. कल्याणकारी महेश: 'महेश' नाम से, वे सृष्टि के अंत के बाद एक नई रचना का रास्ता बनाते हैं।
C. प्रतीकवाद: उन्हें अक्सर 'लिंग' के रूप में पूजा जाता है, जो निराकार और कॉस्मिक एनर्जी का प्रतीक है।

त्रिमूर्ति: (ब्रह्मा - क्रिएशन, विष्णु - स्टेटस, महेश - डिस्ट्रक्शन)
त्रिमूर्ति: (ब्रह्मा - क्रिएशन, विष्णु - स्टेटस, महेश - डिस्ट्रक्शन)
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2. शिव का पौराणिक रूप (उत्पत्ति)
A. ब्रह्मा के गुस्से से: कुछ पुराणों के अनुसार, जब ब्रह्मा ने ब्रह्मांड बनाते समय बहुत मेहनत की, तो उनके माथे से गुस्से के रूप में रुद्र (शिव का उग्र रूप) पैदा हुए।
B. विष्णु-ब्रह्मा डायलॉग: लिंग पुराण के अनुसार, जब विष्णु और ब्रह्मा के बीच इस बात पर झगड़ा हो रहा था कि कौन बड़ा है, तो एक बहुत बड़ा ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ, जिसका आदि और अंत उन्हें नहीं मिल पाया। यह निराकार शिव तत्व था।
C. आठ रूप (अष्टमूर्ति): शिव आठ रूपों में प्रकट होते हैं: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, सूर्य, चंद्रमा और होस्ट (आत्मा)।

अष्टमूर्ति: (धरती, पानी, आग, हवा, आसमान, सूरज, चांद, मेज़बान)
अष्टमूर्ति: (धरती, पानी, आग, हवा, आसमान, सूरज, चांद, मेज़बान)
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3. महान विनाशक और योगी

A. 'रुद्र' - रौद्र रूप: शिव को 'रुद्र' के नाम से जाना जाता है, जो बुरी और अन्यायी शक्तियों का नाश करते हैं। उनकी तीसरी आँख (त्रिनेत्र) ज्ञान और विनाश का प्रतीक है।
B. कैलाशवासी योगीराज: शिव कैलाश पर्वत पर कठोर तपस्या करते हैं और उन्हें सभी योग, ज्ञान और कला का मूल स्रोत माना जाता है।
C. विष प्राशन (समुद्रमंथन): उन्होंने समुद्र मंथन के दौरान निकले 'हलाहल' नाम के ज़हर को पीकर दुनिया को बचाया, जिससे उनका गला नीला हो गया और उन्हें नीलकंठ नाम मिला।

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4. शिव के मुख्य परिवार (जोड़े)

A. पार्वती (शक्ति) साथ रहना: शिव की पत्नी पार्वती (सती का पुनर्जन्म) शक्ति और रचना का प्रतीक हैं। शिव-शक्ति का मिलन पुरुष (शिव) और प्रकृति (शक्ति) का बैलेंस है।
B. बेटे गणेश और कार्तिकेय: गणेश बुद्धि और अच्छे कामों के देवता हैं, जबकि कार्तिकेय देवताओं के सेनापति हैं।
C. नंदी और गण: नंदी शिव की गाड़ी और सबसे बड़े भक्त हैं, जबकि गण उनके मानने वाले हैं, जो उनके हुक्म पर चलते हैं।

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5. शिव के सिंबॉलिक गहने और रूप

A. जटा और गंगा: गंगा नदी उनकी जटा में है, जो पवित्रता और जीवन देने वाले बहाव का प्रतीक है। B. चाँद और साँप: सिर पर चाँद (ठंडक) और गर्दन पर साँप (समय और बदलाव) शिव के शांत और भयानक, दोनों रूपों का नज़ारा दिखाते हैं।
C. त्रिशूल और डमरू: त्रिशूल पास्ट, फ्यूचर, प्रेजेंट (त्रिकाल) को दिखाता है और डमरू साउंड (नादब्रह्म) और सृष्टि के चक्र को दिखाता है।

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समरी इमोजी:
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--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-08.12.2025-सोमवार.
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