ज्ञान के सूर्य की आवाज़-🕉️😇💖🏆💡🏹⚔️🧘‍♀️📜📖🎯 ✅🌟👑✨🙏🔥❌🌞🌑❌💫🔥⚖️

Started by Atul Kaviraje, December 10, 2025, 10:36:28 PM

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Atul Kaviraje

॥ ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका ॥
॥ अथ प्रथमोऽध्यायः – अध्याय पहिला ॥

॥ अर्जुनविषादयोगः ॥

विचारी तूं अर्जुनु । कीं कारुण्यें किजसी दीनु ।सांग पां अंधकारें भानु । ग्रासिला आथी ? ॥ १३ ॥
विचार कर. तू प्रत्यक्ष अर्जुन आणि करूणेने तुला दीन करून सोडावे ! सांग बरे अंधकार सूर्याला कधी ग्रासेल काय ? ॥२-१३॥

॥ ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका ॥

टाइटल: ज्ञान के सूर्य की आवाज़

1. (श्लोक 1) कड़वा:

विषाद योग का पहला एपिसोड, युद्ध के मैदान का स्टेज,
मोह के मोह में, अर्जुन रास्ता भूल गया।
श्री कृष्ण ने कहा, पार्थ, थोड़ा सोचो,
इस दुख में, बेकार के आंसुओं की बाढ़ मत बहाओ।

मराठी मतलब:
गीता-ज्ञानेश्वरी (विषाद योग) का पहला अध्याय युद्ध के मैदान में शुरू हुआ। मोह के कारण, अर्जुन अपना कर्तव्य भूल गया। श्री कृष्ण ने कहा, सोचो और बेकार के आंसू मत बहाओ।
📜🪖😭💔

2. (श्लोक 2) कड़वा:

'सोचो, अर्जुन', ज्ञानदेव ने कहा,
तुम एक पराक्रमी योद्धा हो, तुम गरीब क्यों हो गए?
सब्र रखो और जानो, तुम्हारी ताकत क्या है,
छोटे-मोटे लालच के आगे, अपने पैर मत मोड़ो।

मराठी मतलब:
ज्ञानेश्वर महाराज कहते हैं, हे अर्जुन, सोचो। ताकतवर होने के बाद तुम विनम्र क्यों हो गए? अपनी ताकत पहचानो और छोटे-मोटे लालच के आगे मत झुको।
🏹🧠💪❌

3. (श्लोक 3) कड़वा:

'तुम कितने विनम्र हो', यह सच्ची दया नहीं है,
तुम्हारा भ्रम जो तुम्हें कर्तव्य से दूर ले जाता है।
यह तन-मन का खेल, कुछ समय का अंधेरा,
आत्मा के लिए कोई डर नहीं है, इस सच्चे सार को जानो।

मराठी मतलब:
यह दया सच्ची दया नहीं है, यह भ्रम है जो तुम्हें कर्तव्य से दूर ले जाता है। यह तन-मन से होने वाला कुछ समय का अंधेरा है। इस सच को जानो कि आत्मा अमर है। 💔👁��🗨�💡🧘

4. (श्लोक 4) कड़वा:

'बताओ, अँधेरे क्या हैं, भानु', श्रीहरि ने पूछा,
अगर अँधेरा कभी सूरज को भी निगल सकता है?
रोशनी और अँधेरे के बीच एक हमेशा का विरोध है,
ज्ञान और अज्ञान के बीच का रिश्ता आसानी से देखा जा सकता है।

मराठी मतलब:
श्री कृष्ण पूछते हैं, क्या अँधेरा कभी सूरज को भी घेरता है? समझ लो कि ज्ञान (सूरज) और अज्ञान (अँधेरा) के बीच का विरोध हमेशा का है।
🌞🌑❌💫

5. (श्लोक 5) कड़वा:

तुम 'रोशनी' हो, तुम रोशनी का ज़रिया हो,
आज तुम क्यों भ्रम के बादलों में घिरे हुए हो?
तुम्हारा स्वभाव महान है, तुम्हारी ताकत महान है,
विनम्र मत बनो, और अपनी आध्यात्मिक शक्ति का अपमान मत करो।

मराठी अर्थ:
आप ज्ञान और प्रकाश के स्रोत हैं, फिर भ्रम के बादल आपको कैसे घेर सकते हैं? विनम्र मत बनो, और अपनी आध्यात्मिक शक्ति का अपमान मत करो।
🌟👑✨🙏

6. (श्लोक 6) कड़वा:

युद्ध का मैदान कर्म का क्षेत्र है, धर्म तुम्हारा युद्ध है,
अपने कर्तव्य पर दृढ़ रहो, और होने के लिए तैयार रहो।
ज्ञानेश्वरी की कविता, यही शिक्षा देती है,
दुःख छोड़ो और सच्चे धर्म का पाठ करो।

मराठी अर्थ:
यह युद्ध का मैदान कर्म का क्षेत्र है और युद्ध करना तुम्हारा धर्म है। ज्ञानेश्वरी की शिक्षा है कि, दुःख को छोड़ो और सच्चे धर्म का पालन करो।
⚔️🧘�♀️📜📖

7. (श्लोक 7) कड़वा:

ज्ञान और कर्तव्य का महत्व दिखाकर,
आसानी से भ्रम, माया के अंधेरे को दूर भगाकर।
ज्ञानेश्वर महाराज यह कहानी सुनाते हैं,
ज्ञान के सूर्य की महिमा, आत्म-शक्ति का अभ्यास।

मराठी अर्थ:
इस कविता में ज्ञान और कर्तव्य का महत्व बताया गया है। ज्ञानेश्वर महाराज कहते हैं कि यह वह ज्ञान है जो हमें आत्म-शक्ति की याद दिलाता है। 🕉�😇💖🏆

कविता का सारांश (इमोजी सारांश)
श्लोक संख्या इमोजी (क्षैतिज व्यवस्था)

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--अतुल परब
--दिनांक-08.12.2025-सोमवार.
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