आत्मा-अमरत्व: पवन, अमृत, पावक-📜🙏💡🌟💨🔥👑💖🧘‍♂️🌈

Started by Atul Kaviraje, December 10, 2025, 10:39:23 PM

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Atul Kaviraje

॥ ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका ॥
॥ अथ प्रथमोऽध्यायः – अध्याय पहिला ॥

॥ अर्जुनविषादयोगः ॥

ना तरी पवनु मेघासी बिहे ? । कीं अमृतासी मरण आहे ? ।पाहें पां इंधनचि गिळोनि जाये । पावकातें ? ॥ १४ ॥
अथवा वारा कधी मेघाला घाबरेल काय ? किंवा अमृताला मरण आहे का ? अरे विचार कर. लाकूडच अग्नीला गिळून टाकील काय ? ॥२-१४॥

📜 ॥ ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका ॥  कविता 📜

टाइटल: आत्मा-अमरत्व: पवन, अमृत, पावक (ज्ञानेश्वरी, चैप्टर 1, Ovi 14 पर आधारित)

1. श्लोक 1:
अर्जुन ने शरीर के अलग होने को समझ लिया,
तब कृष्ण ने उसे ज्ञान दिया।
आत्मा का स्वभाव जानो, कि वह अविनाशी है,
ज्ञानेश्वरी बोलीं, सत्य महान है। ⚔️ 💡 🌟 🙏

मराठी अर्थ:
जब अर्जुन को अपने प्रियजनों के शरीर के अलग होने का एहसास हुआ, तो श्री कृष्ण ने उसे ज्ञान दिया।
उन्होंने उसे बताया कि आत्मा का स्वभाव कभी नष्ट नहीं होता।
ज्ञानेश्वरी यह महान सत्य बोलती हैं।

2. श्लोक 2:
'पवनु' कभी, कभी, बादलों से नहीं डरता,
बादल कुछ पल के होते हैं, आसानी से भूल जाते हैं।
शरीर बादलों के पार आता-जाता है,
आत्मा की शक्ति, हमेशा स्वतंत्र रूप से बहती है। 💨 ☁️ 💫 🕊�

मराठी अर्थ:
हवा (हवा) कभी बादलों से नहीं डरती।
बादल कुछ समय के होते हैं और तुरंत गायब हो जाते हैं।
शरीर बादलों की तरह आते-जाते हैं, लेकिन आत्मा की शक्ति हमेशा स्वतंत्र रूप से काम करती रहती है।

3. श्लोक 3:
'अमृत' है, मौत कहाँ होती है,
जिसकी शक्ति काम नहीं करती, वह समय देखता है।
आत्मा का तत्व, 'अमृत' रूप है,
जन्म और मृत्यु का डर, हाँ, रूप। 💧 ⏳ 👑 ❌

मराठी अर्थ:
क्या अमृत कभी मरा है? मौत की शक्ति उस पर काम नहीं करती। आत्मा का तत्व अमृत की तरह अमर है, इसलिए जन्म और मृत्यु का डर अपने आप खत्म हो जाता है।

4. श्लोक 4:
'ईंधन' 'आग' को कैसे निगल सकता है,
तेजस्वी संत, उसे राख कर देंगे।
शरीर की ताकत, आत्मा के सामने कुछ भी नहीं थी,
शरीर जल गया, लेकिन रोशनी बनी रही। 🪵 🔥 💡 ✨

मराठी अर्थ:
लकड़ी (ईंधन) कभी आग को नहीं निगल सकती, लेकिन वह तेज आग उस लकड़ी को जला देती है।
आत्मा की चमक के सामने शरीर की ताकत कुछ भी नहीं है।
शरीर जलता है, लेकिन आत्मा की रोशनी हमेशा बनी रहती है।

5. श्लोक 5:
इस श्लोक की सीख, बड़ी और गहरी,
अज्ञान का अंधेरा, दूर होना चाहिए।
आत्मा की अमरता, दिल में छप जानी चाहिए,
शुद्ध कर्म करो, फल का लालच मत करो। 🧠 🌌 💖 ⚖️

मराठी मतलब:
इस श्लोक की सीख बहुत ज़रूरी और गहरी है।
इससे अज्ञान का अंधेरा दूर होना चाहिए।
आत्मा की अमरता मन में बस जानी चाहिए।
पवित्र बुद्धि से पवित्र कर्म करो और फल की इच्छा मत करो।

6. श्लोक 6:
भ्रम और माया, ये शरीर का रिश्ता,
सत्य के रास्ते पर, वफ़ादारी ही माँ है।
शोक करना बेकार है, नश्वर शरीर का है,
अमरता को जानकर, जीवन साधक का है। 😢 🤝 🧘�♂️ 🌟

मराठी मतलब:
भ्रम और माया शरीर के रिश्ते हैं।
सत्य के रास्ते पर, वफ़ादारी ही हमारी सच्ची माँ है।
नश्वर शरीर का शोक करना बेकार है।
आत्मा की अमरता को जानकर, यही साधक का जीवन है।

7. श्लोक 7:
ज्ञानेश्वरी का मतलब है, जीवन को रोशन करती है,
आत्मा के रूप को नमस्कार करती है, हे हरि।
अमर सिद्धांत की शिक्षाओं को हमेशा याद रखें,
जब जन्म और मृत्यु का डर निश्चित रूप से खत्म हो जाएगा। 📜 🌈 💯 😇

मराठी अर्थ:
ज्ञानेश्वरी का मतलब है हमारे जीवन को रोशन करती है।
श्री हरि (कृष्ण) आत्मा के रूप को नमस्कार करते हैं।
आत्मा के अमर सिद्धांत के ज्ञान को हमेशा याद रखें,
तब जन्म और मृत्यु का डर निश्चित रूप से दूर हो जाएगा।

इमोजी सारांश: 📜🙏💡🌟💨🔥👑💖🧘�♂️🌈

--अतुल परब
--दिनांक-09.12.2025-मंगळवार.
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