💖 अपने बच्चे से बातचीत करना: मॉडर्न पेरेंटिंग का असली मंत्र-1-💖🥺🔄🗣️🧘‍♀️❓🥳

Started by Atul Kaviraje, December 11, 2025, 04:16:43 PM

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Atul Kaviraje

मॉडर्न पेरेंटिंग-राजीव तांबे
पेरेंट्स को अपने अंदर के बच्चे से जुड़ना होगा

बच्चों के राइटर राजीव तांबे का 'मॉडर्न पेरेंटिंग' और 'पेरेंट्स कनेक्टिंग विद देयर इनर चाइल्ड' के ज़रूरी कॉन्सेप्ट पर आधारित एक डिटेल्ड, एनालिटिकल आर्टिकल

💖 अपने बच्चे से बातचीत करना: मॉडर्न पेरेंटिंग का असली मंत्र

📝 बच्चों के मन और पेरेंटिंग का महत्व
बच्चों के राइटर राजीव तांबे के अनुसार, अच्छी पेरेंटिंग बाहर से नहीं, बल्कि अंदर से शुरू होती है। इससे पहले कि पेरेंट्स अपने बच्चों से जुड़ सकें, उनके लिए अपने 'अंदर के बच्चे' से जुड़ना ज़रूरी है। जब तक पेरेंट्स अपने बचपन के इमोशंस, खुशियों और अधूरी ज़रूरतों को नहीं समझेंगे, वे अपने बच्चों को सही मायने में अपना नहीं पाएंगे। यह आर्टिकल इस सेल्फ-डिस्कवरी और पेरेंट्स के लिए 10 ज़रूरी बातों पर रोशनी डालता है।

1. अपने बचपन के इमोशंस को समझना 🥺
1.1. अधूरी ज़रूरतों को पहचानना: हर माता-पिता की बचपन से कुछ अधूरी ज़रूरतें या दबी हुई भावनाएँ होती हैं। पेरेंटिंग के दौरान वे अचानक फिर से उभर आती हैं।

(उदाहरण): अगर माता-पिता को बचपन में काफ़ी समय नहीं मिलता, तो वे अपने बच्चों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं या उन्हें ज़्यादा आज़ादी देने से बचते हैं।

1.2. बचपन का डर और गुस्सा: माता-पिता को बचपन में हुए गुस्से, डर या बेइज़्ज़ती के बारे में पता होना चाहिए। ताकि उनके बच्चों के साथ भी ऐसा ही अनुभव न हो।

1.3. 'मैं' को मानना: अपने बचपन की अच्छी और बुरी, दोनों तरह की यादों और भावनाओं को मानना, जो हमें माता-पिता के तौर पर ज़्यादा बैलेंस्ड बनाता है।

इमोजी समरी: 🥺💔💭🙏➡️ 🧠

2. 'पुराने नियमों' को किनारे रखना 🚫
2.1. पीढ़ीगत सोच का बोझ: माता-पिता को पुरानी, ��पक्की सोच का बोझ छोड़ देना चाहिए, जैसे 'हमारे समय में ऐसा ही था' या 'अगर माता-पिता बोलते हैं, तो हमें सुनना चाहिए'।

2.2. डर का चक्र तोड़ना: अगर माता-पिता बचपन में अनुशासन के नाम पर सख्त होते थे, तो वे अनजाने में अपने बच्चों के साथ भी डर का वही चक्र शुरू कर देते हैं।

2.3. 'परफेक्शन' की चाहत को छोड़ना: यह ध्यान में रखते हुए कि उनके अपने बचकाने दिमाग को 'परफेक्ट' होने की ज़रूरत नहीं थी, हमें अपने बच्चों से ऐसी उम्मीदें रखना बंद कर देना चाहिए जो असलियत से परे हों।

इमोजी समरी: ❌🔨🔄⚖️➡️ 🕊�

3. बच्चों में खुद को न देखना 👥

3.1. आईने में अपनी परछाई: कई माता-पिता अपने बच्चों में अपने बचपन की परछाई देखते हैं और अनजाने में 'तुम वो करो जो मैं नहीं कर सका' का प्रेशर बनाते हैं।

3.2. 'मैं भी ऐसा ही था': बच्चों की गलतियों या शरारतों की बुराई करने के बजाय, बच्चों को यह मानने के लिए बढ़ावा देना चाहिए कि 'मैं भी ऐसा ही था'।

3.3. इंडिपेंडेंट पर्सनैलिटी का सम्मान: माता-पिता को यह पूरी तरह से मान लेना चाहिए कि बच्चा एक इंडिपेंडेंट इंसान है, कि वह आपकी अधूरी इच्छाओं को पूरा करने के लिए यहां नहीं है।

इमोजी समरी: 🎭🔍👤❌➡️ 🤝

4. खुशी और आराम वापस पाना 😊
4.1. खेल में खुशी: माता-पिता को बचपन में खेलने की आसान, सच्ची खुशी को फिर से महसूस करना चाहिए।

(उदाहरण): बच्चों के साथ खेलते समय (जैसे मिट्टी में खेलना, तस्वीरें बनाना), काम या ज़िम्मेदारी के बारे में न सोचें।

4.2. माइंडफुलनेस: बच्चे की तरह वर्तमान पल में जीने की कला सीखनी चाहिए। इससे स्ट्रेस कम होता है।

4.3. 'मस्ती' वापस लाना: पेरेंटहुड की ज़िम्मेदारियों में खो गया 'मस्ती का एहसास' वापस लाना।

इमोजी समरी: 🥳🤸�♂️🧘�♀️✨➡️ 💖

5. अपनी फीलिंग्स बताने की आज़ादी 🗣�
5.1. रोना और अपनी बात कहना: अगर आपको बचपन में सिखाया गया था कि 'बच्चे रोते नहीं हैं' या 'गुस्सा नहीं करते', तो अब पेरेंट्स को अपनी फीलिंग्स को आज़ादी देनी चाहिए।

5.2. बच्चों के साथ इमोशनल कम्युनिकेशन: अगर पेरेंट्स अपनी फीलिंग्स को आज़ादी से बता सकते हैं, तो बच्चे भी अपनी फीलिंग्स उनके साथ आसानी से शेयर कर पाएंगे।

5.3. 'एम्पैथी' का डेवलपमेंट: अपने बच्चे के मन की सेंसिटिविटी को समझकर, पेरेंट्स अपने बच्चों की छोटी-छोटी फीलिंग्स को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

इमोजी समरी: 😭😠🗣�💖➡️ 🫂

इमोजी समरी: ❤️🎁🕊�🌟➡️ 😊

समरी इमोजी:
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इमोजी समरी: ❤️🎁🕊�🌟➡️ 😊

आर्टिकल समरी (समरी इमोजी):
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--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-10.12.2025-बुधवार.
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