🔄 खुशी और दर्द का चक्र और आगे बढ़ने की कोशिश 🔄-1-😇🌟💖 योगी🧗‍♀️🧘‍♂️🔑 मुक्त

Started by Atul Kaviraje, December 11, 2025, 08:14:12 PM

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Atul Kaviraje

स्वामी विवेकानंद के कोट्स-
कोट 8
यह दुनिया हमेशा अच्छाई और बुराई, खुशी और दुख का मिक्सचर रहेगी; यह पहिया हमेशा ऊपर जाएगा और नीचे आएगा; खत्म होना और सुलझना एक ज़रूरी नियम है। धन्य हैं वे जो आगे जाने के लिए संघर्ष करते हैं..

💡 मराठी आर्टिकल: 'कॉन्फ्लिक्ट एंड कॉन्फ्लिक्ट बियॉन्ड'

टाइटल: 🔄 खुशी और दर्द का चक्र और आगे बढ़ने की कोशिश 🔄

स्वामी विवेकानंद के कोट्स 8: "यह दुनिया हमेशा अच्छाई और बुराई, खुशी और दुख का मिक्सचर रहेगी; यह पहिया हमेशा ऊपर जाएगा और नीचे आएगा; खत्म होना और सुलझना एक ज़रूरी नियम है। धन्य हैं वे जो आगे जाने के लिए संघर्ष करते हैं।"

(मराठी मतलब: यह दुनिया हमेशा अच्छे और बुरे, खुशी और दुख का मिक्सचर रहेगी; यह साइकिल हमेशा ऊपर-नीचे होती रहेगी; डिस्ट्रक्शन और री-क्रिएशन एक ऐसा नियम है जिसे बदला नहीं जा सकता। जो लोग इससे आगे निकलने की कोशिश करते हैं, वे खुशकिस्मत हैं।)

स्वामी विवेकानंद का यह विचार जीवन में दोहरेपन के नेचर को समझाता है और इंसान को इस पल भर के साइकिल से आज़ादी पाने का मैसेज देता है। यह सिर्फ़ फिलॉसफी नहीं है, बल्कि स्पिरिचुअल तरक्की की चाबी है।

1. दुनिया का दोहरा नेचर
स्वामीजी बताते हैं कि दुनिया दो अलग-अलग प्रिंसिपल्स (दोहरे) से बनी है।

1.1. खुशी और दुख: दुनिया में कभी सिर्फ़ खुशी या सिर्फ़ दुख नहीं होता। वे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और हमेशा साथ रहेंगे।

1.2. अच्छाई और बुराई: अगर 'अच्छा' है, तो उसके रिलेटिव 'बुरा' भी ज़रूर होगा। दुनिया का बैलेंस इन अलग-अलग ताकतों पर निर्भर करता है।

1.3. एक्सेप्टेंस का महत्व: यह नेचर का बेसिक स्ट्रक्चर है। इस सच को मानना ��पहला कदम है।

उदाहरण: जैसे दिन के बाद रात और रात के बाद दिन आता है, वैसे ही खुशी में दुख और दुख में खुशी होती है।

➕➖⚖️ मानना

2. ज़िंदगी का पहिया
'यह पहिया कभी ऊपर जाएगा और नीचे आएगा', इस लाइन के ज़रिए वह ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव बताते हैं।

2.1. बदलाव का नियम: ज़िंदगी में कोई स्टेबिलिटी नहीं है। हालात समय के साथ बदलते रहते हैं। कामयाबी-नाकामी, फ़ायदा-नुकसान, इज़्ज़त-बेइज़्ज़ती का चक्कर बिना रुके चलता रहता है।

2.2. नश्वरता: जो आज सबसे ऊँची चोटी पर है, वह कल नीचे आ जाएगा। इस दुनिया में कुछ भी परमानेंट नहीं है।

2.3. उम्मीदों का त्याग: जब हम समझ जाते हैं कि यह चक्कर घूमता रहेगा, तो 'हमेशा खुशी रहे' वाली उम्मीद अपने आप कम हो जाती है।

उदाहरण: जैसे स्टॉक मार्केट इंडेक्स (सेंसेक्स) कभी ऊपर जाता है और कभी नीचे, वैसे ही इंसान की ज़िंदगी में हालात बदलते रहते हैं।

🔄📈📉 नश्वर

3. ज़रूरी नियम
स्वामीजी 'विघटन और समाधान' के निर्माण के नियम पर ज़ोर देते हैं।

3.1. निर्माण का नियम: हर चीज़ का विनाश होना तय है और उस विनाश से एक नई रचना का जन्म होता है। यही प्रकृति और ब्रह्मांड का नियम है।

3.2. पुनरुत्थान: हर संकट के आखिर में एक नया मौका, एक नई शुरुआत छिपी होती है। विनाश के तुरंत बाद, पुनर्निर्माण शुरू होता है।

3.3. कर्म और पुनर्जन्म: इंसान का शरीर नष्ट हो जाता है, लेकिन आत्मा की यात्रा जारी रहती है (समाधान) – इसे पुनर्जन्म कहते हैं।

उदाहरण: किसी पुरानी इमारत के टूटने (विघटन) के बाद, उस जगह पर एक नई और मज़बूत इमारत (समाधान) बनाई जाती है।

🌪�🏗�🔄 ज़रूरी

4. आगे बढ़ने की कोशिश
यह मानने के बाद कि दुनिया का नेचर 'डुअल' है, इंसान का असली मकसद इससे आगे बढ़ने की कोशिश करना है।

4.1. मुक्ति की चाहत: आगे बढ़ने का मतलब दुनियावी सुखों को छोड़ना नहीं है, बल्कि सुख-दुख के बंधन से आज़ाद होना है।

4.2. विटनेसिंग: द्वैत का विटनेस बनना, यानी ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव को 'विटनेसिंग' से देखना। इसे ही योग कहते हैं।

4.3. स्पिरिचुअल मकसद: इंसान की ज़िंदगी का आखिरी मकसद इस दुनियावी चक्र (संसार के चक्र) से बाहर निकलना और स्पिरिचुअल शांति पाना है।

उदाहरण: रस्सी की मदद से कुएं से बाहर निकलना। रस्सी प्रैक्टिस (योग) है और कुआं संसार का चक्र है।

🧗�♀️🧘�♂️🔑 मुक्ति

5. 'धन्य' कौन हैं? (धन्य हैं वे)
जो लोग इस चक्र से बाहर निकलने की कोशिश करते हैं, वे धन्य हैं।

5.1. आत्म-साक्षात्कार करने वाले: 'धन्य' वे हैं जो इस द्वैत के खेल का आनंद नहीं लेते, बल्कि आत्मा के शाश्वत स्वरूप को जानते हैं।

5.2. साहसी: इससे आगे जाने के लिए संघर्ष करने के लिए बहुत साहस और इच्छाशक्ति चाहिए।

5.3. योगी: जो लोग योग, ध्यान और अच्छे कर्मों के ज़रिए मन को स्थिर रखने की कोशिश करते हैं, वे धन्य हैं।

उदाहरण के लिए: महापुरुष, संत और योगी धन्य हैं क्योंकि उन्होंने भौतिक सुख-दुख के महत्व को कम करके आध्यात्मिक लक्ष्य को महत्व दिया।

😇🌟💖 योगी

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-04.12.2025-गुरुवार.
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