✨ स्वामी विवेकानंद की सीख 9: बहुत कम मिलने वाली खुशी की कीमत ✨-1-🧘‍♂️⚖️💔😊🌟🛑

Started by Atul Kaviraje, December 11, 2025, 08:18:56 PM

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Atul Kaviraje

स्वामी विवेकानंद के कोट्स-
कोट 9
खुशी इतनी पसंद इसलिए की जाती है क्योंकि यह बहुत कम मिलती है, है ना? हमारी ज़िंदगी का पचास परसेंट हिस्सा सिर्फ़ आलस, उदासी है; बाकी में से चालीस परसेंट दर्द है, सिर्फ़ दस खुशियाँ और यह बहुत किस्मत वाले लोगों के लिए है।

✨ स्वामी विवेकानंद की सीख 9: बहुत कम मिलने वाली खुशी की कीमत ✨

स्वामी विवेकानंद के ये कोट्स इंसान की ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा खुशी, आलस/उदासी और दर्द पर कमेंट करते हैं। उनके अनुसार, खुशी का अनुभव आम तौर पर बहुत कम होता है, इसीलिए यह इतनी प्यारी है।

सीख: "खुशी इतनी पसंद इसलिए की जाती है क्योंकि यह बहुत कम मिलती है, है ना? हमारी ज़िंदगी का पचास परसेंट हिस्सा सिर्फ़ आलस, उदासी है; बाकी में से चालीस परसेंट दर्द है, सिर्फ़ दस खुशियाँ और यह बहुत किस्मत वाले लोगों के लिए है।"

मतलब: "खुशी इतनी पसंद इसलिए की जाती है क्योंकि यह बहुत कम मिलती है, है ना? हमारी ज़िंदगी का पचास परसेंट हिस्सा सिर्फ़ आलस या बेपरवाही (उदासी) है; बाकी चालीस परसेंट दुख है, और सिर्फ़ दस परसेंट खुशी है - वह भी बहुत किस्मत वाले लोगों के लिए।"

📝 डिटेल्ड और एनालिटिकल मराठी आर्टिकल: 'खुशी का रेयर इक्वेशन'

1. खुशी की रेयरता और उसका अट्रैक्शन

1.1. रेयरता की वजह से वैल्यू: स्वामीजी के अनुसार, अगर कोई चीज़ रेयर है, तो उसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है। खुशी ज़िंदगी का एक ऐसा ही कीमती और रेयर खज़ाना है।

1.2. अट्रैक्शन की असली वजह: अगर खुशी लगातार और बहुत ज़्यादा होती, तो हम उसकी तरफ़ इतने अट्रैक्ट नहीं होते। इसकी रेयरता की वजह से ही हम इसे पाने की कोशिश करते रहते हैं।

1.3. आम ज़िंदगी के अनुभव: दिन भर की भागदौड़ में, प्रॉब्लम के बीच, जब हमें खुशी का एक छोटा सा पल मिलता है, तो हम पूरी तरह सैटिस्फाइड महसूस करते हैं। यह खुशी की रेयरता को साबित करता है।

इमोजी: 💎🌟😊

2. ज़िंदगी का 50% हिस्सा 'सुस्ती' और 'उदासी' है

2.1. ज़्यादातर इनएक्टिविटी: स्वामीजी ने बताया है कि ज़िंदगी का आधा हिस्सा सुस्ती या ऊब से भरा होता है। यहाँ, सुस्ती का मतलब सिर्फ़ शारीरिक आलस ही नहीं है, बल्कि मानसिक और इमोशनल इनएक्टिविटी भी है।

2.2. 'उदासी' का मतलब: 'उदासी' का मतलब है ज़िंदगी में कुछ भी करने का मोटिवेशन न होना, निराशा और बोरियत। यह हालत इंसान को किसी भी मतलब की एक्टिविटी से दूर रखती है।

2.3. एनर्जी की बर्बादी: इस 50% समय में, हमारी काबिलियत का इस्तेमाल नहीं होता। यह एक तरह की 'रुकी हुई' या 'इनएक्टिव' हालत होती है, जहाँ न तो खुशी होती है और न ही बहुत ज़्यादा दर्द।

इमोजी: 🛋�😴🌫�

3. ज़िंदगी में 40% 'दर्द' का अनुभव (40% दर्द का अनुभव)
3.1. बहुत ज़्यादा दुख: स्वामीजी कहते हैं कि आलस और बेपरवाही के बाद, बची हुई ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा (40%) दुख से भरा होता है। इसमें शारीरिक, मानसिक, पैसे से जुड़ा और इमोशनल दर्द शामिल है।

3.2. दुख के रूप: नाकामी, अपनों से बिछड़ना, बीमारी, पैसे की दिक्कतें, निराशा, डर वगैरह जैसे अलग-अलग तरह के दुख इंसान की ज़िंदगी का एक ज़रूरी हिस्सा बन जाते हैं।

3.3. दुख सीखने का मौका है: वेदांत फिलॉसफी के अनुसार, दुख ज़िंदगी की एक सच्चाई है और इसे स्पिरिचुअल ग्रोथ के मौके के तौर पर देखा जा सकता है। दुख से ही हम मज़बूत बनते हैं।

इमोजी: 😔💔😥

4. बहुत किस्मत वाले लोगों के लिए 10% खुशी

4.1. खुशी का छोटा सा हिस्सा: स्वामीजी के अनुसार, ज़िंदगी का सिर्फ़ 10% हिस्सा ही खुशी में बीतता है और वह भी बहुत किस्मत वाले लोग। इसका मतलब है कि दूसरों को और भी कम खुशी मिल सकती है।

4.2. 'लकी' क्या है?: यहाँ 'लकी' का मतलब उन लोगों से नहीं है जो सिर्फ़ किस्मत पर निर्भर हैं, बल्कि उन लोगों से है जिन्होंने अपनी ज़िंदगी को पॉज़िटिव तरीके से देखा है और छोटी-छोटी चीज़ों में खुशी पाई है।

4.3. खुशी की रिलेटिविटी: इस 10% खुशी का नेचर हर इंसान में अलग-अलग होता है। कुछ के लिए यह मटेरियल सक्सेस है, तो कुछ के लिए यह स्पिरिचुअल सैटिस्फैक्शन है।

इमोजी: 🥇🥳😇

5. आलस खुशी का दुश्मन

5.1. एक्शन की कमी: 50% इनएक्शन का मतलब है 50% मौके बर्बाद होना। जब हम एक्टिव नहीं होते, तो हम खुशी बनाने के प्रोसेस में हिस्सा नहीं लेते।

5.2. उदासी से बढ़ने वाली उदासी: उदासी धीरे-धीरे मानसिक तनाव और नाखुशी में बदल जाती है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से उदासी (40%) बढ़ जाती है।

5.3. इनएक्टिविटी पर काबू पाना: स्वामीजी ने हमेशा कर्म योग पर ज़ोर दिया। इनएक्टिविटी पर काबू पाने के लिए लगातार एक्टिव रहना ज़रूरी है, जिससे खुशी की मात्रा बढ़ सकती है।

इमोजी: 🛑🚧🏃

आर्टिकल समरी इमोजी: 🧘�♂️⚖️💔😊🌟

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-05.12.2025-शुक्रवार.
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