✨ स्वामी विवेकानंद की सीख 9: बहुत कम मिलने वाली खुशी की कीमत ✨-2-🧘‍♂️⚖️💔😊🌟🛑

Started by Atul Kaviraje, December 11, 2025, 08:19:25 PM

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Atul Kaviraje

स्वामी विवेकानंद के कोट्स-
कोट 9
खुशी इतनी पसंद इसलिए की जाती है क्योंकि यह बहुत कम मिलती है, है ना? हमारी ज़िंदगी का पचास परसेंट हिस्सा सिर्फ़ आलस, उदासी है; बाकी में से चालीस परसेंट दर्द है, सिर्फ़ दस खुशियाँ और यह बहुत किस्मत वाले लोगों के लिए है।

✨ स्वामी विवेकानंद की सीख 9: बहुत कम मिलने वाली खुशी की कीमत ✨

स्वामी विवेकानंद के ये कोट्स इंसान की ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा खुशी, आलस/उदासी और दर्द पर कमेंट करते हैं। उनके अनुसार, खुशी का अनुभव आम तौर पर बहुत कम होता है, इसीलिए यह इतनी प्यारी है।

सीख: "खुशी इतनी पसंद इसलिए की जाती है क्योंकि यह बहुत कम मिलती है, है ना? हमारी ज़िंदगी का पचास परसेंट हिस्सा सिर्फ़ आलस, उदासी है; बाकी में से चालीस परसेंट दर्द है, सिर्फ़ दस खुशियाँ और यह बहुत किस्मत वाले लोगों के लिए है।"

6. ज़िंदगी में दर्द का मकसद
6.1. दर्द और अवेयरनेस: 40% दर्द हमें ज़िंदगी की असलियत से वाकिफ़ कराता है और हमें और ज़्यादा अवेयर बनाता है।

6.2. खुशी की असली कीमत: 10% खुशी सिर्फ़ दर्द की वजह से पता चलती है। अगर दर्द न होता, तो खुशी का एहसास आम लगता।

6.3. अंदर की ताकत का विकास: दर्द सहने की काबिलियत हमें रूहानी ताकत देती है और मुश्किलों से उबरने के लिए इंस्पायर करती है।

इमोजी: 💪💡🌱

7. मटेरियल खुशी बनाम स्पिरिचुअल खुशी
7.1. खुशी की डेफिनिशन: स्वामीजी जिस 'खुशी' की बात कर रहे हैं, वह ज़्यादातर मटेरियल चीज़ों पर डिपेंडेंट है और कुछ समय के लिए होती है।

7.2. कुछ समय के लिए: 10% खुशी कुछ समय के लिए होती है और इसे बनाए रखने के लिए लगातार कोशिशों की ज़रूरत होती है।

7.3. 'परमानंद' का कॉन्सेप्ट: वेदांत में, 'आनंद' या 'परमानंद', 'खुशी' से भी ऊंची स्थिति है, जो किसी बाहरी वजह पर निर्भर नहीं करती। इस 10% से आगे जाना ही आखिरी लक्ष्य है।

इमोजी: 🧘�♂️✨🕉�

8. अनुपात का साइकोलॉजिकल और सिंबॉलिक महत्व
8.1. न्यूमेरोलॉजिकल अरेंजमेंट: 50-40-10 का आंकड़ा कोई पक्का मैथमेटिकल सच नहीं है, बल्कि इंसानी ज़िंदगी में टेंडेंसी का एक सिंबॉलिक नज़रिया है।

8.2. मेंटल स्टेट्स का एनालिसिस: इस अनुपात से, स्वामीजी ने इंसानी मन की तीन बड़ी स्थितियों पर रोशनी डाली है: न्यूट्रैलिटी/आलस (50%), नेगेटिविटी/दुख (40%), और पॉजिटिविटी/खुशी (10%)।

8.3. ऑप्टिमिज़्म: हालांकि 10% खुशी बहुत अच्छी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम इसे बढ़ा नहीं सकते। हम कर्म योग और सही नज़रिए से इस रेश्यो को बदल सकते हैं।

इमोजी: 📊🧠🎯

9. कर्म योग का रास्ता और खुशी पाना

9.1. काम न करने पर जीत: कर्म योग से 50% आलस्य पर जीत हासिल की जा सकती है। बिना स्वार्थ के किया गया काम हमें काम न करने से बाहर निकालता है।

9.2. दुख का बदलाव: बिना स्वार्थ के काम करने से दुख का असर कम होता है, क्योंकि फल के प्रति लगाव कम हो जाता है।

9.3. खुशी में 10% की बढ़ोतरी: कर्म योग और सेवा से रूहानी खुशी बढ़ती है, जिससे 10% से ज़्यादा कुछ समय की खुशी और हमेशा रहने वाली 'खुशी' मिलती है।

इमोजी: 🙏🏗�❤️

10. नतीजा और आखिरी समझ

10.1. मानना ��और असलियत: स्वामीजी का यह कहना ज़िंदगी की असलियत और खुशी और दुख के स्वभाव को मानना ��है।

10.2. खुशी का सोर्स: बाहरी हालात में खुशी ढूंढने के बजाय, यह अपनी अंदरूनी ताकत और काम न करने की आदत को दूर करने की काबिलियत में होती है।

10.3. खुशी की पूजा: भले ही 10% खुशी मिलना मुश्किल है, लेकिन हमें इसके बारे में जानकर इसके लिए कोशिश करना बंद नहीं करना चाहिए। हर पल ज़रूरी है।

इमोजी: 💡🔑✨

आर्टिकल समरी इमोजी: 🧘�♂️⚖️💔😊🌟

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-05.12.2025-शुक्रवार.
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