बहुत कम मिलने वाली खुशी की कीमत ✨💎5️⃣0️⃣4️⃣0️⃣1️⃣0️⃣😊🔄🧘‍♂️🕉️🕊️

Started by Atul Kaviraje, December 11, 2025, 08:21:21 PM

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Atul Kaviraje

स्वामी विवेकानंद के कोट्स-
कोट 9
खुशी इतनी पसंद इसलिए की जाती है क्योंकि यह बहुत कम मिलती है, है ना? हमारी ज़िंदगी का पचास परसेंट हिस्सा सिर्फ़ आलस, उदासी है; बाकी में से चालीस परसेंट दर्द है, सिर्फ़ दस खुशियाँ और यह बहुत किस्मत वाले लोगों के लिए है।

✨ स्वामी विवेकानंद की सीख 9: बहुत कम मिलने वाली खुशी की कीमत ✨

स्वामी विवेकानंद के ये कोट्स इंसान की ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा खुशी, आलस/उदासी और दर्द पर कमेंट करते हैं। उनके अनुसार, खुशी का अनुभव आम तौर पर बहुत कम होता है, इसीलिए यह इतनी प्यारी है।

सीख: "खुशी इतनी पसंद इसलिए की जाती है क्योंकि यह बहुत कम मिलती है, है ना? हमारी ज़िंदगी का पचास परसेंट हिस्सा सिर्फ़ आलस, उदासी है; बाकी में से चालीस परसेंट दर्द है, सिर्फ़ दस खुशियाँ और यह बहुत किस्मत वाले लोगों के लिए है।"

📜  कविता: 'दुरमिल सुखाची ओध'

टाइटल: दुर्मिल सुखाची ओध

(स्वामी विवेकानंद की 9वीं कहावत पर आधारित)

1. (पहली कड़वी)

मुझे खुशी बहुत पसंद है, क्योंकि यह बहुत कम मिलती है, जब मुझे इसकी एक झलक मिलती है, तो मेरा मन पवित्र हो जाता है।
अगर यह मुझे लगातार मिलती रहे, तो इसकी कोई खास कीमत नहीं रहती, दुख और मुश्किल के समय में, मैं खुशी का दीवाना हो जाता हूँ।
(मतलब: मुझे खुशी बहुत पसंद है क्योंकि यह बहुत कम मिलती है। जब मुझे इसकी एक झलक मिलती है, तो मेरा मन पवित्र हो जाता है। अगर मुझे खुशी लगातार मिलती रहे, तो इसकी कोई अहमियत नहीं रहती। मैं सिर्फ दुख के समय में खुशी का दीवाना हो जाता हूँ।)
💖💎🌟😊

2. (दूसरी कड़वी)

पचास परसेंट हिस्सा, सिर्फ सुस्ती, कुछ करने को नहीं, मेरा मन बोर हो जाता है।
डिप्रेशन बहुत है, ज़िंदगी बोरिंग लगती है, न कोई गम है न खुशी, आधी ज़िंदगी ऐसे ही बीत जाती है।

(मतलब: ज़िंदगी का पचास परसेंट हिस्सा सिर्फ़ आलस और सुस्ती में ही डूबा रहता है। कुछ करने का मन नहीं करता और मन ऊब जाता है। बहुत ज़्यादा उदासी की वजह से ज़िंदगी बेकार लगती है। यहाँ न कोई गहरा गम है न खुशी, आधी ज़िंदगी बर्बाद हो जाती है।)
🕰�😴🌫�😞

3. (तीसरा कड़वा)

बाकी, चालीस परसेंट का बड़ा हिस्सा, गम की पीड़ा से जगा रहता है।
यह नाकामी, जुदाई, बीमारी, चिंता की ज्वाला, ज़िंदगी के संघर्ष की यह मुश्किल लड़ाई।
(मतलब: बाकी का चालीस परसेंट हिस्सा दुख की तेज़ पीड़ा से भरा है। नाकामी, अपनों का बिछड़ना, बीमारी और चिंता ही आग हैं। ज़िंदगी का यह संघर्ष बहुत मुश्किल है।)
😔💔😥🔥

4. (चौथी कड़वी बात)

फिर सिर्फ़ बची हुई, दस परसेंट जगह, खुशी के लिए है, थोड़ी पहचान और शान के लिए।

वह भी खास लोगों को मिलती है, जिन्होंने ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव को स्वीकार किया है।

(मतलब: अब सिर्फ़ दस परसेंट बचा है। वहीं थोड़ी पहचान और खुशी की शान का अनुभव होता है। वह खुशी भी सिर्फ़ किस्मत वाले और खास लोगों को मिलती है, जिन्होंने ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव को स्वीकार किया है।)
🔟✨🥳🍀

5. (पांचवीं कड़वी बात)

आलस की गांठ छोड़ो और काम करना शुरू करो, कभी भी इनएक्टिविटी के बंधन में मत फंसो।

दुख से सीखो, खुशी की कीमत जानो, हर छोटे पल में खुशी का अनुभव करो।
(मतलब: आलस की गांठ छोड़ो और काम करना शुरू करो। कभी भी इनएक्टिविटी के बंधन में मत फंसो। दुख से सीखो, खुशी की असली अहमियत जानो और हर छोटे पल में खुशी का अनुभव करो।)
🏃�♀️💪💡💖

6. (छठी कड़वी)

क्योंकि खुशी रेयर होती है, इसकी अहमियत बहुत बढ़ जाती है, यह जीवन देती है, नई एनर्जी देती है, सपोर्ट देती है।
उम्मीद छोड़े बिना, कभी-कभी, कर्म योगी बनो, दस परसेंट खुशी को भी खुशी से खिलाओ।
(मतलब: खुशी रेयर होती है, इसकी अहमियत बहुत बढ़ जाती है। यह हमें जीने के लिए नई ताकत और सपोर्ट देती है। कभी भी उम्मीद मत छोड़ो, कर्म योगी बनो और उस दस परसेंट खुशी को भी खुशी से खिलाओ।)
💫🌱🙏☀️

7. (सातवीं कड़वी)

सुख और दुख का साइकिल, जीवन में चलता रहता है, न्यूट्रल रहो और उसे वहीं देखो, शांत मन से। परम सत्य 'आनंद', आत्मा का वह खजाना, उसे अपने अंदर खोजो, यही स्वामीजी की ईर्ष्या है।

(मतलब: जीवन में सुख और दुख का चक्र चलता रहता है। ऐसे समय में, व्यक्ति को तटस्थ रहकर शांत मन से उसे देखना चाहिए। परम सत्य 'आनंद' है और यह हमारी आत्मा का खजाना है। उसे अपने अंदर खोजो, यही स्वामी विवेकानंद का आग्रह है।)
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कविता सारांश इमोजी

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--अतुल परब
--दिनांक-05.12.2025-शुक्रवार.
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