'देवता एक इंसानी हिस्सा है: सिर्फ़ डिग्री का खेल!'💖🌟💪🔑🕊️🚀🌟🤲🌍❤️

Started by Atul Kaviraje, December 11, 2025, 08:26:11 PM

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Atul Kaviraje

स्वामी विवेकानंद के विचार-
कोट 10
मैं ग्रीक देवताओं की भी पूजा नहीं करूँगा, क्योंकि वे इंसानियत से अलग थे! सिर्फ़ उन्हीं की पूजा होनी चाहिए जो हमारे जैसे हों लेकिन हमसे बड़े हों। देवताओं और मेरे बीच का फ़र्क सिर्फ़ डिग्री का होना चाहिए।

🧠 स्वामी विवेकानंद का विचार: ईश्वरत्व और इंसानियत की एकता 🤝

स्वामी विवेकानंद कहते हैं: "मैं ग्रीक देवताओं की भी पूजा नहीं करूँगा, क्योंकि वे इंसानियत से अलग थे! सिर्फ़ उन्हीं की पूजा होनी चाहिए जो हमारे जैसे हों लेकिन हमसे बड़े हों। देवताओं और मेरे बीच का फ़र्क सिर्फ़ डिग्री का होना चाहिए।"

📜 कविता: 'देवता एक इंसानी हिस्सा है: सिर्फ़ डिग्री का खेल!'

सिंबल/संकेत: ✍️📜💖

1. पहली कड़वाहट: ग्रीक देवताओं को नकारना

भले ही दूर स्वर्ग में रहने वाले देवता, जो इंसानों से बिल्कुल अलग हैं, कहानियों और कहानियों का मज़ा लेते हों,
मैं उनकी कभी पूजा नहीं करूँगा क्योंकि मुझे उनसे कोई लगाव नहीं है
वे मुझे इंसानों से अलग अपना आदर्श नहीं मानते।
मराठी मतलब: दूर स्वर्ग में रहने वाले देवता इंसानों से अलग हैं। हालाँकि उन्हें कहानियाँ और कहानियाँ पसंद हैं, लेकिन उन्हें इंसानों से कोई असली लगाव नहीं है। इसलिए, मैं उनकी पूजा नहीं करूँगा, क्योंकि मैं उन्हें अपना आदर्श नहीं मानता जो इंसानों से बिल्कुल अलग हैं। 🚫🏛�☁️

2. दूसरी कड़वी बात: पूजा का असली मतलब

सिर्फ़ उसी की पूजा करनी चाहिए, जो हमसे बड़ा है,
लेकिन धरती से आया है, इंसानों का दुख सहकर ऊँचा मुकाम पाया है,
वही सच्चा आदर्श है,
जो आत्मा को ज्ञान देता है।

मराठी मतलब: सिर्फ़ उसी की पूजा करनी चाहिए, जो हम इंसानों जैसा है। वह हमसे बेहतर हो सकता है, लेकिन उसने इंसानी जन्म लिया है। जिसने इंसानों का दुख सहकर ऊँचा मुकाम पाया है, वही सच्चा आदर्श है और आत्मा को ज्ञान देता है।

🚶�♂️🥇🙏

3. तीसरी कड़वी बात: सिर्फ़ हद का फ़र्क

भगवान और मुझमें कोई फ़र्क नहीं है, सिर्फ़ जाति का फ़र्क है,
मेरी कोशिशों की हद का, वह पूरी तरह से ज़ाहिर है, मुझे कमियों का मज़ा आता है लेकिन कोशिशें करके,
मैं उसका रूप ले लेता हूँ।

मराठी मतलब: भगवान और मुझमें जाति (प्रजाति) का कोई फ़र्क नहीं होना चाहिए। फ़र्क सिर्फ़ मेरी कोशिशों के लेवल (डिग्री) का होना चाहिए। कि भगवान पूरी तरह से प्रकट हैं और मैं अभी भी अधूरा हूँ। लेकिन अगर मैं कोशिश करूँगा, तो मैं उनका रूप ले पाऊँगा।
⚖️💡💪

4. चौथी कड़वी बात: इंसानों में दिव्यता

आप सब भगवान के हिस्से हैं, हम दिव्यता पाने की काबिलियत के साथ जीते हैं
अंदर छिपी शक्ति को जगाओ, लगातार बाहर भगवान को खोजो, अंदर से जवाब दो।
मराठी मतलब: हम सब भगवान के हिस्से हैं। हम दिव्यता पाने की काबिलियत के साथ जीते हैं। इसलिए, अपने अंदर छिपी शक्ति को जगाओ और हमेशा बाहर भगवान को खोजो। अंदर से जवाब दो।
🗝�💖👁�

5. पाँचवीं कड़वी बात: प्रेरणा देने वाले गुरु

बुद्ध, जीसस, रामकृष्ण, सभी ने इंसान के रूप में एक ऊँचा जीवन जिया,
उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया, इंसानों के लिए दिव्यता पाना आसान है,
ये जीवन के पड़ाव हैं। मराठी मतलब: बुद्ध, जीसस और रामकृष्ण जैसे महान लोग इंसान के रूप में आए थे। उन्होंने एक ऊंचा जीवन जिया और अपनी दिव्यता साबित की। दिव्यता आसान है, इसे इंसानों को जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर हासिल करना चाहिए।

6. छठा कड़वा: पूजा का आखिरी मकसद

पूजा का मतलब है, बाहरी चमत्कारों से डरना नहीं, बल्कि अपनी महानता में बढ़ना,
यही सेवा का सार है, मेरा सच्चा भगवान हर इंसान में है,
वही भगवान को देखता है।
मराठी मतलब: पूजा को बाहरी चमत्कारों से नहीं डरना चाहिए। यह हममें अच्छे गुण बढ़ाने का वादा है। सेवा ही मेरा सच्चा भगवान है, क्योंकि मैं हर इंसान में एक ही भगवान को देखता हूं। 🤲🌍❤️

7. सातवीं कड़वी बात: उम्मीद और भरोसा

वो दूर के भगवान, हमें डराते हैं, ये पास के भगवान, हमें भरोसा देते हैं,
जैसे जोश, महान इंसान, रोज़ उनकी पूजा करो, फ़र्क छोटा है,
मोक्ष का काम करो।
मराठी मतलब: दूर के भगवान हमें डराते हैं। लेकिन ये पास के भगवान, जो हमारे जैसे हैं, हमें भरोसा और जोश देते हैं। इसलिए हमेशा उस महान इंसान की पूजा करो, जो तुम्हारी अपनी कैटेगरी में तुमसे बेहतर है, और मोक्ष के लिए ऊंची उड़ान भरो।
🕊�🚀🌟

समरी इमोजी:

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--अतुल परब
--दिनांक-06.12.2025-शनिवार.
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