॥ लावण्य निधि: विट्ठल का रूप ॥😇🛕💖👑👂😊👑🌟☀️🌙

Started by Atul Kaviraje, December 14, 2025, 11:55:18 AM

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Atul Kaviraje

संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा-
अभंग क्र.१६
राजस सुकुमार मदनाचा पुतळा । रविशशिकळा लोपलिया ॥१॥

कस्तुरीमळवट चंदनाची उटी । रुळे माळ कंठीं वैजयंती ॥ध्रु.॥

मुगुट कुंडले श्रीमुख शोभलें । सुखाचें ओतिलें सकळही ॥२॥

कासे सोनसळा पांघरे पाटोळा । घननीळ सांवळा बाईयांनो ॥३॥

सकळ ही तुम्ही व्हा गे एकीसवा । तुका म्हणे जीवा धीर नाहीं ॥४॥

🎨 टाइटल: ॥ लावण्य निधि: विट्ठल का रूप ॥

(संत तुकाराम महाराज अभंग नंबर 16 पर आधारित)

कड़वे 1
कविता
वह राजसी दिखता है, वह सुंदर है,
जैसे मदन की मूर्ति, अट्ठासी युग के दरवाज़े पर खड़ी है।
सूरज और चांद उसके हैं, उनकी चमक फीकी पड़ गई है,
अलौकिक चमक के आगे, लावण्य हार गई है।

मतलब:
वह (विट्ठल) शाही और बहुत सौम्य दिखता है, जैसे वह खुद कामदेव की मूर्ति हो, जो अट्ठाइस युग के दरवाज़े पर खड़ी है।
सूरज और चांद की चमक भी उसके सामने फीकी पड़ गई है, क्योंकि दुनिया की सुंदरता उसकी दिव्य चमक के आगे हार मान लेती है।

इमोजी: 👑🌟☀️🌙 खूबसूरती

कड़वे 2
कविता
कस्तूरी की खुशबू, चंदन की खुशबू,
खुशबू की ठंडक, खुशियों की गठरी सी।
वैजयंती माला, गले में फिट होने वाला हार,
ऐश्वर्या का रूप, भक्तों के दिलों में गूंजता है।

मतलब:
माथे पर कस्तूरी का गुच्छा और शरीर पर चंदन का लेप है।
यह खुशबू और ठंडक खुशियों के भंडार की तरह है।
वैजयंती माला गले में सजी दिखती है, ऐश्वर्या का यह रूप भक्तों के मन में हमेशा गूंजता है।

इमोजी: 💖 चंदन 🌸✨

कड़वे 3
कविता
सिर पर ताज, कानों में झुमके,
श्रीमुख सुशोभित है, सबसे भरा हुआ। यह रूप भगवान का है, जो खुशी से भरा हुआ है,
जिसने आसानी से चिदानंद के तत्व को प्रकट किया है।

मतलब:
सिर पर ताज, कानों में झुमके (बच्चे) और वह सुंदर चेहरा सबको सुशोभित करता हुआ दिखता है।
भगवान का यह रूप सिर्फ खुशी से भरा है, जिसने आसानी से सत्य-मन-आनंद के तत्व को प्रकट किया है।

इमोजी: 👑👂😊 आनंद

कड़वे 4
कविता
सुनहरे कपड़ों से ढका हुआ, घूंघट से ढका हुआ,
एक शानदार दिव्य रूप, आंखों को खुशी से भर रहा है।
एक गहरा नीला, ग्रे रंग, मिठास से बहता हुआ,
यमुना के किनारे, गोविंदा खड़े हैं।

मतलब:
कमर सुनहरे कपड़े (पीतांबर) से ढकी हुई है और शरीर रेशम से ढका हुआ है।
यह शानदार और दिव्य रूप आंखों को बहुत खुशी देता है।
गहरे नीले बादलों जैसा ग्रे रंग बड़ी मिठास से बह रहा है, मानो गोविंदा (कृष्ण) यमुना के किनारे खड़े हों।

इमोजी: 💛💙 नदी 🏞�

कड़वे 5
कविता
ओ दोस्तों, एक साथ आओ,
आओ और सामूहिक रूप का ध्यान करो।
यह मेरा प्यार, अकेले नहीं,
तुम सब मिलकर इसका आनंद लो।

मतलब:
ओ दोस्तों (भक्तों), एक साथ यहाँ आओ।
इस सुंदर रूप का सामूहिक रूप से ध्यान करो।
यह प्यार अकेले मेरे मन में नहीं है,
इसलिए, यह आनंद तुम सब मिलकर लो।

इमोजी: 👯�♀️ सामूहिक प्यार 🫂

कड़वा 6
कविता
यह जुदाई रूह से बर्दाश्त नहीं होती,
प्यार की यह तकलीफ मुझे स्थिर नहीं रख सकती।
तुम कहते हो, हे भगवान, अब मुझे दर्शन दे दो,
तुम्हारे बिना, मुझे सब्र नहीं है।

मतलब:
भगवान के दर्शन की यह जुदाई अब मेरी रूह से बर्दाश्त नहीं होती।
प्रेम से होने वाली यह पीड़ा मुझे स्थिर नहीं रहने दे रही है।
तुकाराम महाराज कहते हैं, हे भगवान, अब मुझे दर्शन दीजिए।
आपके दर्शन के बिना, मुझे सब्र नहीं है।

इमोजी: 😥 तड़प 💔 सब्र

कड़वा 7
कविता
वैकुंठी का सुख पंढरपुर में आया है,
विट्ठल के रूप में, यह भक्तों तक पहुंचा है।
यह भक्ति का सार है, जिसे तुकोबा ने गाया है,
दर्शन से मिलने वाला परम सुख, देखा गया है।

मतलब:
वैकुंठी का सुख पंढरपुर में आया है।
विट्ठल के रूप में, यह सभी भक्तों को मिला है।
यह भक्ति का सार तुकाराम महाराज ने गाया है।
उन्होंने दर्शन से मिलने वाले परम सुख का अनुभव किया है।

इमोजी: 😇🛕💖 आनंद

सारांश: इमोजी का अर्थ (इमोजी का सारांश)

इमोजी का अर्थ

🙏 आस्था, भक्ति
👑 राजस, ताज
🌟 तेज, दिव्य प्रकाश
☀️ रवि (सूर्य)
🌙 शशि (चंद्रमा)
सुंदरता
💖 प्रेम, आनंद, हृदय
चंदन चंदन, ठंडक
🌸 वैजयंती माल
✨ ऐश्वर्य, सुगंध
👂 राशिफल
😊 श्रीमुख
आनंद
💛 सोनशाला वस्त्र (पीतांबर)
💙 सॉलिड नीला शेड रंग
नदी यमुना/चंद्रभागा
🏞� किनारे पर खड़े
👯�♀️ सखी, मिलजुल कर रहना
सामुदायिक सामूहिक सोच
🫂 गले लगाना, स्नेह
😥 वैराग्य, धैर्य नहीं
तड़प चिंता
💔 अस्थिर मन
धैर्य धैर्य, शांति
😇 वैकुंठी का सुख
🛕 पंढरी
आनंद

--अतुल परब
--दिनांक-11.12.2025-गुरुवार.
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