"पंढरी का रूप"😭 जुदाई + 🚩 विट्ठल + 🤲 मुलाक़ात + ⏳ इंतज़ार + 🕊️ मुक्ति

Started by Atul Kaviraje, December 14, 2025, 12:01:46 PM

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Atul Kaviraje

संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा-
अभंग क्र.१७
कर कटावरी तुळसीच्या माळा । ऐसें रूप डोळां दावीं हरी ॥१॥

ठेविले चरण दोन्ही विटेवरी । ऐसें रूप हरी दावीं डोळां ॥ध्रु.॥

कटीं पीतांबर कास मिरवली । दाखवीं वहिली ऐसी मूर्ती ॥२॥

गरुडपारावरी उभा राहिलासी । आठवें मानसीं तेचि रूप ॥३॥

झुरोनी पांजरा होऊं पाहें आतां । येईं पंढरीनाथा भेटावया ॥४॥

तुका म्हणे माझी पुरवावी आस । विनंती उदास करूं नये ॥५॥

📜  कविता: विट्ठल से मिलने की इच्छा

💛 टाइटल: "पंढरी का रूप"

कड़वा 1
कविता
तुलसी की माला बनाओ, एक सुंदर पोशाक,
आँखों में दिखाओ हरि, यह इच्छा पूरी करो;
मेरा मन, तुम्हारे रूप को देखने के लिए, हमेशा तरसता है,
तुम्हारे मिलन के लिए मैं तड़प रहा हूँ, मैं तड़प रहा हूँ।

मतलब:
कमर पर हाथ, तुलसी की माला पहने, हे हरि, इसे मेरी आँखों में दिखाओ और मेरी यह तीव्र इच्छा पूरी करो।
मेरा मन हमेशा तुम्हारे रूप को देखने के लिए तड़पता है।
मैं तुम्हारे मिलन के लिए तड़प रहा हूँ।

इमोजी: 🤲🌿💖😊

कड़वा 2
कविता
दोनों पैर रखो, बेल पर टिकाओ,
भक्त के लिए तुम खड़े हो, तुमने युगों से इंतज़ार किया है;
ईंट पर वो रूप, पुण्य और निराकार दोनों,
मेरी आँखों, मुझे वो रूप जल्दी दिखाओ।

मतलब:
दोनों पैर ईंट पर टिके हैं। भक्तों का इंतज़ार करते हुए आपने उम्र बिताई है।
ईंट पर वो रूप पुण्य और निराकार दोनों है।
मुझे वो रूप जल्दी दिखाओ।

इमोजी: 🧱🦶⏳🌟

कड़वे 3
कविता
कमर पीतांबर से सजी है, कमर रोशन है,
कर्म योगी और योगी का रूप, आपका रूप मन को भाता है;
मुझे वो मूर्ति जल्दी दिखाओ, मैं वो मूर्ति ले आया हूँ,
आपके दर्शन के बिना मेरी हालत समझ में आती है।

मतलब:
कमर पीतांबर से सजी है और कमर रोशन है।
कर्म योगी और योगी का आपका रूप बहुत मनमोहक है।
मुझे वो मूर्ति जल्दी दिखाओ।
आप जानते हैं कि आपके बिना मेरी क्या हालत हो गई है।

इमोजी: 💛✨🧘�♂️😭

कड़वा 4
कविता
गरुड़ परेड पर खड़ा, तेरा मंदिर बहुत सुंदर है,
वह रूप मेरे मन में है, मुझे खूब याद है;
वह याद पल भर की है, वह जुदाई की चाहत,
तेरी परछाई के लिए, ज़िंदगी कितनी प्यासी है।

मतलब:
गरुड़ परेड पर खड़ा, तेरा मंदिर बहुत सुंदर है।
वह दिखने वाला रूप मेरे मन में है, मुझे खूब याद है।
वह पल भर की याद है, वह जुदाई की चाहत।
मेरी ज़िंदगी तेरी पनाह के लिए प्यासी हो गई है।

इमोजी: 🏰💭⏳💖

कड़वा 5
कविता
आज मैं पिंजरा बनने की कोशिश कर रहा हूँ,
जब तक शरीर का पिंजरा टूट न जाए, पंढरीराज आओ;
पंढरीनाथ आओ, शरीर के इस औज़ार के खत्म होने से पहले,
एक बार मेरे दर्शन कर लो, जन्म-जन्म की इच्छा पूरी कर दो।

मतलब:
मेरा शरीर आज सिकुड़कर पिंजरे जैसा बनने की कोशिश कर रहा है।
शरीर का यह पिंजरा टूटने से पहले (शरीर के मरने से पहले), हे पंढरीनाथ, आप आइए।
हे पंढरीनाथ, शरीर का यह औज़ार खत्म होने से पहले, एक बार आकर मुझसे मिलिए।
मेरी जन्म-जन्मांतर की इच्छा पूरी कर दीजिए।

इमोजी: 🕊�💔😢🙏

कड़वी 6
कविता
तुम्हें कहना चाहिए, मेरी इच्छा पूरी कर दीजिए, मेरी इच्छा अंतहीन है,
जुदाई का बुखार अब है, इसे न सह पाने की यह भयानक सज़ा;
दुखी न हो भगवान, मेरी विनती आखिरी है,
सेवक के दर्शन करके, यह सच्चा नियम पूरा कर दीजिए।

मतलब:
तुकाराम महाराज कहते हैं, मेरी हमेशा रहने वाली इच्छा पूरी कर दीजिए।
जुदाई का बुखार अब बर्दाश्त नहीं होता।
भगवान, मेरी इस विनती को नज़रअंदाज़ (दुखी न हो) मत कीजिए।
अपने सेवक के दर्शन करके यह सच्चा नियम पूरा कर दीजिए।

इमोजी: 😭🔥👑💯

कड़वी 7
कविता
आपके आने से, मुझे जीवन में मतलब मिलता है,
आपके रूप में, मेरी सारी पवित्रता दिखती है;
ईंट पर विथुरया, तुम मेरी माँ हो,
जैसे ही आपकी इच्छा पूरी हुई, इस शरीर ने समाधि ले ली।

मतलब:
आपके आने से, मुझे जीवन में मतलब (मतलब) मिलता है।
आपके रूप में, मुझे अपनी सारी पवित्रता दिखती है।
ईंट पर विथुरया, तुम मेरी माँ हो।
जैसे ही आपकी इच्छा पूरी हुई, इस शरीर ने समाधि ले ली।

इमोजी: 🚩💖✨🏆

इमोजी कविता का सारांश
😭 जुदाई + 🚩 विट्ठल + 🤲 मुलाक़ात + ⏳ इंतज़ार + 🕊� मुक्ति की उम्मीद + 🏆 मतलब + 💖 सच्चा प्यार = पंढरीनाथ की कृपा!

--अतुल परब
--दिनांक-12.12.2025-शुक्रवार.
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