🧘 स्वामी विवेकानंद की फ़िलॉसफ़ी: 'उदासीनता' और ज़िंदगी के बारे में बराबरी- 1-⚖️

Started by Atul Kaviraje, December 14, 2025, 12:36:24 PM

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Atul Kaviraje

स्वामी विवेकानंद के कोट्स-
कोट 16
न तो नफ़रत, न ही ज़िंदगी से खुशी, बल्कि एक तरह की बेपरवाही।

🧘 स्वामी विवेकानंद की फ़िलॉसफ़ी: 'उदासीनता' और ज़िंदगी के बारे में बराबरी ⚖️

📜 डिटेल्ड मराठी आर्टिकल: 'उदासीनता' ज़िंदगी के बारे में – बराबरी का आदर्श 🌊

स्वामी विवेकानंद के कोट्स:
"न तो नफ़रत, न ही ज़िंदगी से खुशी, बल्कि एक तरह की बेपरवाही।"

(न तो ज़िंदगी से नफ़रत, न ही खुशी, बल्कि एक तरह की बेपरवाही।)

स्वामी विवेकानंद का यह विचार इंसानी ज़िंदगी में बराबरी
और डिटैचमेंट के महत्व को बताता है।

इस 'उदासीनता' का मतलब पैसिविटी या डिप्रेशन नहीं है,
बल्कि दुनिया को एक गवाह की तरह देखने की एक सतर्क हालत है, बिना खुशी और दुख के झगड़े में फंसे।

इस विचार को नीचे दिए गए दस मुख्य पॉइंट्स में विस्तार से समझाया गया है।

1. 'उदासीनता' का मतलब है बराबरी

बीच का रास्ता:
स्वामीजी यहाँ हमें ज़िंदगी में दो बहुत ज़्यादा भावनाओं
(बहुत ज़्यादा खुशी और बहुत ज़्यादा नफ़रत) से बचने और बीच का रास्ता अपनाने के लिए कहते हैं।

साक्षी होना:
इस उदासीनता का मतलब है ज़िंदगी की घटनाओं को बिना खुद को शामिल किए देखना।

दुख का न होना:
जब कोई खुशी और दुख को बराबर देखता है,
तो दोनों में से कोई भी भावना इंसान को ज़्यादा परेशान नहीं कर सकती।

⚖️🧘�♂️ तटस्थता

2. लगाव और नफ़रत का त्याग

इच्छा और नफ़रत:
ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा खुशी पाने के लिए लगाव
और दुख आने पर नफ़रत महसूस करना,
दोनों ही बांधने वाले हैं।

बंधन से मुक्ति:
यह उदासीनता इंसान को इन दोनों बंधनों से आज़ाद करती है।
जब हम कोई भी काम ज़्यादा नहीं करते,
तो हम आज़ाद हो जाते हैं।

बैलेंस्ड नज़रिया:
चीज़ों, लोगों और घटनाओं से ज़्यादा लगाव या नफ़रत न होना,
यानी एक बैलेंस्ड नज़रिया बनाना।

🚫🔗⚖️

3. काम में डिटैचमेंट

नतीजे की उम्मीद न करना:
गीता में कर्म योग के अनुसार,
बिना नतीजे की उम्मीद किए अपना काम करना।
यह डिटैचमेंट का प्रैक्टिकल रूप है।

एक्टिविटी लेकिन डिटैचमेंट:
यह डिटैचमेंट हमें काम करने से नहीं रोकता,
बल्कि, यह हमें डिटैच्ड होकर काम को और अच्छे से करने के लिए मोटिवेट करता है।

उदाहरण:
अर्जुन, जिन्होंने निष्काम कर्म योग से लड़ाई लड़ी,
जिनके मन में नतीजों के लिए कोई लगाव या नफ़रत नहीं थी।

🎯⚙️🕊�

4. मेंटल शांति और स्टेबिलिटी

मन की स्टेबिलिटी:
जब मन बहुत ज़्यादा खुशी से उछलता नहीं है
और बहुत ज़्यादा दुख से टूटता नहीं है,
तो वह शांत और स्टेबल रहता है।

इमोशनल कंट्रोल:
यह शांति हमारी भावनाओं पर सबसे अच्छा कंट्रोल है।

स्थिर बुद्धि:
सबसे मुश्किल हालात में भी,
यह शांति का तोहफ़ा है।

🧠🧊 शांति

5. आध्यात्मिक तरक्की का आधार

भ्रम से अलग होना:
ज़िंदगी में यह शांति हमें भ्रम के जाल से बाहर निकलने में मदद करती है।

अलगाव की शुरुआत:
त्याग का मतलब अपना घर छोड़ना नहीं है,
बल्कि मन से लगाव छोड़ देना है।
यह शांति उस अलगाव का पहला कदम है।

आत्म-ज्ञान की प्राप्ति:
जब मन सुख और दुख के द्वंद्व से मुक्त हो जाता है,
तो वह आत्म-ज्ञान पाने के लिए सही हो जाता है।

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--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-12.12.2025-शुक्रवार.
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