🧘 स्वामी विवेकानंद की फ़िलॉसफ़ी: 'उदासीनता' और ज़िंदगी के बारे में बराबरी- 2-⚖️

Started by Atul Kaviraje, December 14, 2025, 12:37:00 PM

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Atul Kaviraje

स्वामी विवेकानंद के कोट्स-
कोट 16
न तो नफ़रत, न ही ज़िंदगी से खुशी, बल्कि एक तरह की बेपरवाही।

🧘 स्वामी विवेकानंद की फ़िलॉसफ़ी: 'उदासीनता' और ज़िंदगी के बारे में बराबरी ⚖️

📜 डिटेल्ड मराठी आर्टिकल: 'उदासीनता' ज़िंदगी के बारे में – बराबरी का आदर्श 🌊

स्वामी विवेकानंद के कोट्स:
"न तो नफ़रत, न ही ज़िंदगी से खुशी, बल्कि एक तरह की बेपरवाही।"

6. पॉजिटिविटी को अपनाना

नेगेटिविटी नहीं:
यह उदासीनता ज़िंदगी के प्रति नफ़रत या नेगेटिविटी नहीं है

नेगेटिविटी दुख की एक गहरी भावना है।

पॉजिटिव बैलेंस:
जब हम किसी भी चीज़ को लेकर बहुत ज़्यादा उत्साहित नहीं होते हैं,
तो फेल होने पर निराश होने की संभावना कम हो जाती है।

यह एक पॉजिटिव बैलेंस है।

ऑप्टिमिज़्म:
भविष्य के बारे में बेवजह उम्मीदें रखे बिना,
अभी के पल को महत्व देना,
जिससे शांत ऑप्टिमिज़्म बढ़ता है।

😊✨🚫

7. असलियत को मानने की ताकत

रियलिस्टिक नज़रिया:
यह उदासीनता हमें ज़िंदगी की कड़वी सच्चाई को मानने की ताकत देती है।

ज़िंदगी खुशी और दुख का संगम है।

ज़रूरी चीज़ों को मानना:
ज़िंदगी में कुछ चीज़ें ज़रूरी होती हैं,
और उन पर दुख मनाए बिना आगे बढ़ जाते हैं।

उदाहरण:
बीमारी, मौत और जुदाई जैसी ज़रूरी चीज़ों को मानने के लिए तैयार रहना।

💔🤝🎯

8. 'मैं' का गायब होना

अहंकार का खत्म होना:
जब 'मैं' खुशी चाहता है
और दर्द नहीं चाहता,
तो अहंकार बढ़ता है।
उदासीनता अहंकार को कम करती है।

यूनिवर्सल चेतना:
यह समझना कि हम सिर्फ़ शरीर या मन नहीं हैं,
बल्कि यूनिवर्सल चेतना का एक हिस्सा हैं।

मुक्ति का एहसास:
जब 'मैं' कम होता है,
तो व्यक्ति को आध्यात्मिक मुक्ति (आज़ादी) का एहसास होता है।

🤏🔥🌌

9. डर और असफलता पर काबू पाना

असफलता का महत्व:
यह उदासीनता सफलता में ज़्यादा खुश न होना और असफलता में निराश न होना सिखाती है।
दोनों अनुभवों को बराबर महत्व देना।

निडरता:
भविष्य से ज़्यादा लगाव न होने से,
व्यक्ति निडर हो जाता है,
क्योंकि हारने का डर नहीं रहता।

स्थिर फोकस:
फेलियर से फोकस नहीं भटकता,
क्योंकि उसे पता होता है कि खुशी और दुख दोनों
टेम्पररी हैं।

🛡�🚀🎯

10. परम शांति और समाधि

ट्रांसेंडेंस की स्थिति:
यह इक्विनिमिटी हमें जीवन में सभी डुअलिटी (गर्मी/सर्दी, सम्मान/अपमान) से परे ले जाती है।

अंतिम लक्ष्य:
यह परम शांति
और समाधि पाने का एक ज़रूरी तरीका है।

योगस्थता:
यह विचार भगवद गीता में योगस्थ (योग में बैलेंस्ड) की स्थिति के बारे में बताता है।

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--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-12.12.2025-शुक्रवार.
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