"समत्व योग: बेपरवाही का महामंत्र"🌟💯🏆🕉️🤝💔🚫👑🌌🗝️🧘‍♀️✨🛡️🚀⚖️🧠🎯⚙️🕊️✨

Started by Atul Kaviraje, December 14, 2025, 12:39:23 PM

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Atul Kaviraje

स्वामी विवेकानंद के कोट्स-
कोट 16
न नफ़रत, न ज़िंदगी से खुशी, बल्कि एक तरह की बेपरवाही।

🧘 स्वामी विवेकानंद की फ़िलॉसफ़ी: ज़िंदगी और संतुलन के बारे में 'बेपरवाही' ⚖️

📜 ज़िंदगी के बारे में 'बेपरवाही' – संतुलन का आदर्श 🌊

स्वामी विवेकानंद के शब्द:
"न नफ़रत, न ज़िंदगी से खुशी, बल्कि एक तरह की बेपरवाही।"

(न नफ़रत, न ज़िंदगी से खुशी, बल्कि एक तरह की बेपरवाही।)

📜  कविता: ज़िंदगी के बारे में 'बेपरवाही' 🌊

टाइटल: "समत्व योग: बेपरवाही का महामंत्र"

कड़वी कविता 1:

ज़िंदगी से नफ़रत मत करो, बहुत ज़्यादा खुश मत हो,
विवेकानंद कहते हैं, थोड़ी सी बेपरवाही रखो;
यही बीच का रास्ता है, सुख-दुख से परे,
अलग-थलग रहो, मन को अंदर से शांत रखो।

मतलब:
ज़िंदगी को बुरा मत समझो, बहुत ज़्यादा खुश मत हो।
विवेकानंद कहते हैं, एक तरह की बेपरवाही रखो।
यह बीच का रास्ता है, जो सुख-दुख से परे है।
दुनिया से अलग होकर अपने मन को शांत रखो।

⚖️🧘�♂️🧠😔

कड़वे 2:

बहुत ज़्यादा लगाव और बहुत ज़्यादा नफ़रत, दोनों ही बंधन के कारण हैं,
बेपरवाही मानने से तुम्हारा मन आज़ाद होता है;
सोने की कीमत और मिट्टी की कहानी, इन सबको एक जैसा जानकर,
यही बराबरी रखो, ज़िंदगी की सच्चाई जानो।

मतलब:
बहुत ज़्यादा लगाव और बहुत ज़्यादा नफ़रत, दोनों ही बंधन के कारण हैं।
बेपरवाही मानने से मन आज़ाद होता है।
सोने की कीमत और मिट्टी की कहानी एक जैसी समझो।
इसी संतुलन को बनाए रखते हुए, जीवन की सच्चाई को जानो।

🔗🚫💖🌍

कड़वे 3:

कर्म योग दोस्त है, यह वैराग्य की सोच,
फल की कोई उम्मीद नहीं, कर्म में अंतहीन आनंद;
बिना इच्छा के कर्म करते हुए, हमेशा सतर्क रहो,
चाहे नतीजा अच्छा हो या बुरा।

मतलब:
कर्म योग दोस्त है, यह वैराग्य की सोच रखो।
फल की उम्मीद किए बिना, लगातार कर्म में डूबे रहो।
बिना इच्छा के कर्म करते हुए हमेशा सतर्क रहो।
चाहे नतीजा अच्छा हो या बुरा।

🎯⚙️🕊�✨

कड़वे 4:

डर और असफलता, इन पर काबू पाकर,
तुम बिना थके आगे बढ़ते हो, मन में धैर्य रखते हुए;
तेज़ खुशी नहीं है, इसलिए दुख गहरा नहीं होता,
स्थिर मन से देखो, जीवन साक्षी है।

मतलब:
डर और नाकामी पर जीत हासिल करके,
आप बिना थके, मन में सब्र रखते हुए आगे बढ़ते हैं।
तेज़ खुशी नहीं है, इसलिए दुख गहरा नहीं होता।
ज़िंदगी को स्थिर मन से देखो, यही साक्षी का जीवन है।

🛡�🚀⚖️🧠

कड़वे 5:

यह उदासीनता, डिप्रेशन या निष्क्रियता नहीं है,
यह आध्यात्मिक मार्ग है, आत्म-ज्ञान का सत्य;
माया के जाल से, इस विवेक को निकालो,
वैराग्य की सीढ़ियों पर, तुम इसे ज़रूर रखोगे।

मतलब:
यह उदासीनता डिप्रेशन या निष्क्रियता नहीं है।
यह आध्यात्मिक मार्ग है, आत्म-ज्ञान का सत्य।
यह विवेक हमें माया के जाल से बाहर निकालता है।
वैराग्य की पहली सीढ़ी पर मज़बूती से कदम रखो।

🌌🗝�🧘�♀️✨

कड़वे 6:

असलियत को मानने की ज़बरदस्त ताकत आती है,
वह बिना किसी गहरी भक्ति के, आने वाले दुखों को मान लेता है;
वह बीमारी, मौत और जुदाई को बराबर मानता है,
वह दुनिया में आज़ाद और गर्वित हो जाता है।

मतलब:
असलियत को मानने की ज़बरदस्त ताकत आती है।
वह बिना ज़्यादा दुख के, आने वाले दुखों को मान लेता है।
वह बीमारी, मौत और जुदाई को बराबर मानता है।
वह दुनिया में आज़ाद और आत्म-सम्मान के साथ रहता है।

🤝💔🚫👑

कड़वे 7:

जो बेपरवाही देता है, परम शांति का योग,
सभी झगड़ों से परे, दुनिया में योग का आनंद लो;
विवेकानंद का यह ज्ञान, जीवन को अनमोल बनाता है,
सावधान रहो, इसे पकड़ो, योग का मूल्य।

मतलब:
जो बेपरवाही देता है, परम शांति का योग।
जीवन में सभी संघर्षों से परे जाकर, व्यक्ति योग का अनुभव करता है।
विवेकानंद का यह ज्ञान जीवन को अनमोल बनाता है।
सावधान रहें, इस योग के मूल्य को स्वीकार करें।

🌟💯🏆🕉�

✨ पूरे लेख और कविता का सारांश (इमोजी सारांश) ✨

🧘�♂️ स्वामी विवेकानंद + ⚖️ समभाव + 🚫 लगाव/तिरस्कार +
🧠 उदासीनता + 🕊� वैराग्य + 🎯 कर्म योग +
🌌 आत्म-ज्ञान + 🏆 स्थिरता
= योग जीवन और सर्वोच्च शांति! 🙏

--अतुल परब
--दिनांक-12.12.2025-शुक्रवार.
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