📜 कविता: योगेश्वरी माता की यात्रा 🚩🏰🌸📯🚶 📣🌊🔱💖 👣🚶‍♀️🧡🛕 🚩✨😌🙌 📖⚖️

Started by Atul Kaviraje, December 14, 2025, 09:17:15 PM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

योगेश्वरी यात्रा-अंबाजोगाई-

नमस्ते! गुरुवार, 4 दिसंबर, 2025 के दिन, 'योगेश्वरी यात्रा-अंबाजोगाई' टॉपिक पर, मैं एक भक्ति से भरा, सुंदर, मतलब वाला, आसान, सादा, सीधा, ढीला-ढाला, रसीला और तुकबंदी वाला, 7 कड़े पेश कर रहा हूँ, हर कड़े में 4 लाइनें (पाद और पद्य मिलाकर) हैं।

📜 कविता: योगेश्वरी माता की यात्रा 🚩

कड़ा 1

अंबाजोगाई शहर, आज पूरी तरह सजा हुआ है,
योगेश्वरी माता की यात्रा शुरू हो गई है।
भक्तों के झुंड दूर-दूर से यहाँ जमा हुए हैं,
आस्था की राह पर, दर्शन करने आए हैं।
मतलब: अंबाजोगाई शहर आज पूरी तरह सजा हुआ है, क्योंकि योगेश्वरी देवी की यात्रा (सवारी) शुरू हो गई है। दूर-दूर से भक्तों के झुंड यहाँ जमा हुए हैं, वे आस्था की राह पर माँ के दर्शन करने आए हैं। 🏰🌸📯🚶

कड़वे 2

सारा आसमान जयकारों से गूंज रहा है,
सारा आसमान गुनगुना रहा है, यात्रा में भक्ति का सागर उमड़ रहा है।
ये जगत जननी माँ ब्याह रही हैं,
इनकी कृपा से सभी अम्बा खुश रहें।

मतलब: सारा आसमान जयकारों से गूंज रहा है, इस यात्रा में भक्ति का महाप्रवाह उमड़ पड़ा है। ये योगेश्वरी माता (जगदम्बा) ब्याह रही हैं। इनकी कृपा से अंबाजोगाई का परिवेश खुशियों से भर जाए।

📣🌊🔱💖

कड़वे 3

पैदल आए हैं, कावड़ियां लेकर,
उनके दिल में माँ की चाहत, बिना थके।
माथे पर चंदन लगा है, चेहरे पर उनका नाम है,
जीवन सार्थक हो, बस यही एक काम है।
मतलब: भक्त पैदल आए हैं, कावड़ियां लेकर। उनके दिल में माँ के लिए तड़प है, जिसकी वजह से वे बिना थके सफर कर रहे हैं। उनका बस यही काम है कि माथे पर चंदन और चंदन लगाकर और माँ का नाम जपकर जीवन को सार्थक बनाया जाए।

कड़वे 4

मंदिर का शिखर आसमान को छूता हुआ लगता है,
चमकती मूर्ति को देखकर आत्मा शांत हो जाती है।
माया का हाथ भक्तों के सिर पर फिरता है,
सारे दुख और तकलीफें पल भर में गायब हो जाती हैं।
मतलब: मंदिर का शिखर आसमान (स्वर्ग) को छूता हुआ लगता है। माँ की चमकती मूर्ति को देखकर मन शांत हो जाता है। माँ माया का हाथ अपने भक्तों के सिर पर फिराती है, जिसकी वजह से सारे दुख और तकलीफ पल भर में गायब हो जाते हैं। 🚩✨😌🙌

कड़वे 5

यहाँ धर्म और नैतिकता की शिक्षा दी जाती है,
सत्य और न्याय की कहानी रोज़ सामने आती है।
यह ज्ञानी मुकुंदराज की पवित्र भूमि है,
संत परंपरा की सच्ची जन्मभूमि।
मतलब: इस पवित्र भूमि में धर्म और नैतिकता की शिक्षा दी जाती है। यहाँ हमेशा सत्य और न्याय की कहानी सुनाई जाती है। यह ज्ञानेश्वर और मुकुंदराज की पवित्र भूमि है, जो संत परंपरा की सच्ची जन्मभूमि है।
📖⚖️🧘�♀️🏛�

कड़वे 6

अब माँ के चरणों में प्रणाम करो,
सारी चिंताएँ, सारी दुनिया के दुख भूल जाओ।
उनकी शक्ति अपार है, वे परम सहारा हैं,
उनकी कृपा के बिना, इस दुनिया में कोई मुक्ति नहीं है।
मतलब: अब माँ के चरणों में प्रणाम करो। दुनिया की सारी चिंताएं और दुख भूल जाओ। उनकी शक्ति बहुत बड़ी है, वही हमारा आखिरी सहारा हैं। उनकी कृपा के बिना इस दुनिया में कोई मोक्ष नहीं है।

🙇�♀️ शक्ति 🕉�🌍

कड़वे 7

हे योगेश्वरी माता, आपकी यात्रा पूरी हुई,
भक्तों के दिल खुशी से भर गए, नाती-पोते धन्य हो गए।
यह प्रसाद लेकर, चलो घर लौटते हैं,
जल्द ही फिर मिलेंगे, आपकी याद आती है।
अर्थ: हे योगेश्वरी माता, आपकी यात्रा अब पूरी हुई। भक्तों के दिलों में खुशी की लौ जल गई है। हम यह प्रसाद लेकर घर लौट रहे हैं। जल्द ही फिर मिलेंगे, आपको याद करते हुए।
🎁💖👋🏠

इमोजी समरी

🏰🌸📯🚶 📣🌊🔱💖 👣🚶�♀️🧡🛕 🚩✨😌🙌 📖⚖️🧘�♀️🏛� 🙇�♀️ शक्ति 🕉�🌍 🎁💖👋🏠

--अतुल परब
--दिनांक-04.12.2025-गुरुवार.
===========================================