💎 अष्टान्हिका पर्व: आत्म-शुद्धि का समापन 🙏 (जैन)-😇🚫 🛕💧 पवित्र 🙏🌿 🎊🎉💡

Started by Atul Kaviraje, December 14, 2025, 09:23:14 PM

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Atul Kaviraje

अष्टान्हिक पर्व समारोप-जैन-

नमस्ते! गुरुवार, 4 दिसंबर, 2025 के दिन, 'अष्टान्हिका पर्व समारोप (जैन)' टॉपिक पर, मैं भक्ति से भरी एक लंबी मराठी कविता पेश कर रहा हूँ, सुंदर, मतलब वाली, सरल, सीधी, सीधी, ढीली, रसीली और तुकबंदी वाली, 7 श्लोक, हर श्लोक में 4 लाइनें (पाद और पद्य मिलाकर)।

💎 अष्टान्हिका पर्व: आत्म-शुद्धि का समापन 🙏 (जैन)

पहला श्लोक
नौ दिन का त्योहार, आज पूरा हुआ,
भक्ति से भरा अष्टान्हिका का समारोह।
व्रत, तपस्या और नियम, बीच-बीच में रखे,
पुण्य के रास्ते पर, रोज़ प्रशस्ति की।
मतलब: यह नौ दिन का त्योहार (मार्गशीर्ष शुद्ध अष्टमी से पूर्णिमा तक) आज पूरा हो गया है। अष्टान्हिका पर्व भक्ति से भरा त्योहार है। हमने व्रत, तपस्या और नियमों का पूरे मन से पालन किया। हम हमेशा नेकी के रास्ते पर चले। 🗓�✨🧘�♂️ पवित्रता

दूसरा कड़वा
इस एपिसोड में दिखा जैन धर्म का सार,
आत्मा की शुद्धि, यहाँ अनुभव की।
त्रिकाल पूजा, और शास्त्रों का ज्ञान,
हमने किया मोक्ष के रास्ते की ओर, आज हम निकले।
मतलब: इस एपिसोड में, हमने जैन धर्म की बेसिक फिलॉसफी का अनुभव किया। यहाँ हमने आत्मा की शुद्धि का अनुभव किया। हमने दिन में तीन बार पूजा और शास्त्रों का अध्ययन (स्वाध्याय) किया। आज हमने मोक्ष के रास्ते पर अपनी यात्रा शुरू की है। 🕉� आत्मा 📚 कैमिनो

तीसरा कड़वा
जिनों की पूजा, दिल से की,
उनके चरणों में रखा, सब कुछ नया।
अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधुओं का चिंतन,
पंचपरमेष्ठी, यही सही मतलब है। अर्थ: हमने पूरे मन से जिनों (तीर्थंकरों) की पूजा की। अपने सभी नए संकल्प उनके चरणों में रखे। अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु, इन पाँचों परम पुरुषों का चिंतन करना ही सच्ची वाणी है। 🙌 जिन 💎 गुरु

चौथा कड़वा
क्षमा, मार्दव, आर्जव, दस धर्मों का महत्व,
इनका पालन करने से ही जीवन में तरक्की होती है।
आज त्योहार का समापन हो रहा है, हमें यह सबक लेना चाहिए,
क्रोध, लोभ, भ्रम, क्रोध से बचें।
अर्थ: इस त्योहार ने क्षमा (माफी), मार्दव (विनम्रता), आर्जव (सादगी) जैसे दस धर्मों का महत्व सिखाया। इन धर्मों का पालन करने से ही जीवन में तरक्की होती है। आज त्योहार का समापन करते हुए हमें यह सबक लेना चाहिए, कि हमें क्रोध, लोभ, भ्रम और गुस्से से दूर रहना चाहिए। ⚖️ पुण्य 😇🚫

पांचवां कड़वा
आज मंदिर में खास महाभिषेक हुआ,
सोने के कलश, देवता को विराजमान किया।
सभी प्राणी सुखी रहें, यही सच्ची प्रार्थना है,
जियो और जीने दो, यही जैन धर्म की परंपरा है।
मतलब: आज मंदिर में देवताओं का खास तौर पर सोने के कलशों से अभिषेक किया गया। सभी प्राणी सुखी रहें, यही सच्ची प्रार्थना है। 'जियो और जीने दो' (अहिंसा) जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत है। 🛕💧 शुद्ध 🙏🌿

छठा कड़वा
पारंपरिक समारोह, उत्साह और खुशी,
भक्ति और ज्ञान का, यहीं बंधन बनता है।
नौ दिन की तपस्या, आज पूरी हुई,
आत्मा की रोशनी, यही सच्ची रोशनी है।
मतलब: यह पारंपरिक समारोह उत्साह और खुशी से भरा है। यहां भक्ति और ज्ञान का सुंदर तालमेल (बंधन) बनता है। नौ दिन की तपस्या आज पूरी हो गई। आत्मा का प्रकाश ही सच्चा प्रकाश है। 🎊🎉💡 आत्मा

सातवां कड़वा
अगले साल, हम फिर मिलेंगे,
तब तक, इस भक्ति का सार बचाकर रखें।
गुज़रे हुए देवताओं के, हम फिर दर्शन करेंगे,
चलो जैन धर्म की महानता गाते हैं।
मतलब: चलो अगले साल इस समय में फिर मिलेंगे। तब तक, इस भक्ति के मुख्य सिद्धांत (मूल) को बचाकर रखें। चलो एक बार फिर गुज़रे हुए देवताओं (जिन्होंने क्रोध और घृणा को जीत लिया है) के दर्शन करें। चलो जैन धर्म की महानता और अच्छे गुणों का गुण गाते हैं। ♾️💖🕉�👋

✨ कविता का सुंदर और सही टाइटल ✨
💎 अष्टान्हिका पर्व: आत्म-शुद्धि का समापन 🙏 (जैन समारोह)

📜 कविता का छोटा मतलब 📜
यह कविता जैन धर्म में 'अष्टान्हिका पर्व' (नौ दिन) के समापन के बारे में बताती है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा को खत्म होने वाला यह त्योहार उपवास, तपस्या और आत्म-शुद्धि के लिए ज़रूरी है। इसमें त्रिकाल पूजा, शास्त्र स्वाध्याय और पंचपरमेष्ठी के चिंतन पर ज़ोर दिया गया है। दस धर्मों का पालन करके क्रोध, लालच और भ्रम को दूर करने की सलाह दी गई है। 'जियो और जीने दो' के जैन दर्शन के महत्व पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने प्रार्थना की कि दिवंगत देवताओं के दर्शन से आत्मा को शांति और रोशनी मिले।

🌟 इमोजी समरी 🌟
🗓�✨🧘�♂️ पवित्रता 🕉� आत्मा 📚 कैमिनो 🙌 जिना 💎 गुरु ⚖️ पुण्य 😇🚫 🛕💧 पवित्र 🙏🌿 🎊🎉💡 आत्मा ♾️💖🕉�👋

--अतुल परब
--दिनांक-04.12.2025-गुरुवार.
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