⛰️ श्री रेणुका यात्रा: सौंदत्ती की भक्ति गंगा 🚩🛕 ✨💖 📣💛🤝😊 ✨ माँ 💖🙌 🚶‍♀️

Started by Atul Kaviraje, December 14, 2025, 09:23:51 PM

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Atul Kaviraje

श्री रेणुका यात्रा-सौंदत्ती, जिल्हा-बेळगाव-

नमस्ते! गुरुवार, 4 दिसंबर, 2025 के दिन, 'श्री रेणुका यात्रा-सौंदत्ती, ज़िला-बेलगाम' टॉपिक पर, मैं भक्ति से भरी, सुंदर, मतलबी, सरल, सीधी, रसीली और तुकबंदी वाली, 7 छंदों वाली एक लंबी मराठी कविता पेश कर रहा हूँ, हर छंद में 4 लाइनें (पाद और पद्य मिलाकर) इस तरह हैं।

⛰️ श्री रेणुका यात्रा: सौंदत्ती की भक्ति गंगा 🚩

पहला छंद
कर्नाटक की धरती पर, बेलगाम की इज्जत,
सौंदत्ती क्षेत्र, रेणुका का स्थान।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर, यह त्योहार बड़ा है,
माँ के दर्शन के लिए, हमेशा भीड़ लगी रहती है।

मतलब: कर्नाटक राज्य में बेलगाम ज़िला इस सौंदत्ती क्षेत्र की वजह से बहुत इज्जतदार है, जहाँ रेणुका देवी रहती हैं। मार्गशीर्ष पूर्णिमा का यह त्योहार बहुत बड़ा है और भक्तों में माँ के दर्शन करने की होड़ लगी रहती है। 🇮🇳 🛕 ✨💖

दूसरा कड़वा
येलकोट येलकोट, जय जय मल्हार की धूम,
हर तरफ खजाने का फूटना।
महाराष्ट्र और कर्नाटक का, जुड़वाँ प्यार का बंधन,
माँ की कृपा से जीवन में खुशियाँ हों।
मतलब: 'येलकोट येलकोट, जय जय मल्हार' के जयकारे हर तरफ गूंज रहे हैं। हर तरफ पीला खजाना फूट रहा है। इस तीर्थ यात्रा के ज़रिए महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों का प्यार भरा रिश्ता एक हो जाता है। माँ की कृपा से हमारे जीवन में खुशियाँ हों। 📣💛🤝😊

तीसरा कड़वा
माँ का सुंदर रूप, जिसे देखकर आँखें भर आती हैं,
सारे दुख, परेशानियाँ, पल भर में दूर हो जाती हैं। जमधगी की पत्नी, वही माँ अंबाबाई,
आइए हम सब उनके चरणों में सिर रखकर खुश हों।

मतलब: रेणुका माता का सुंदर रूप देखकर आँखें संतुष्टि से भर जाती हैं। हमारे सारे दुख और परेशानियाँ पल भर में दूर हो जाती हैं। जमदग्नि ऋषि की पत्नी, वही हमारी अंबा माता हैं। आइए हम सब उनके चरणों में सिर रखकर खुश हों। ✨ माँ 💖🙌

चौथी कड़वी
भक्तों का हुजूम इस पवित्र भूमि पर उमड़ पड़ा है,
पैदल चलते हुए, बिना किसी परवाह के।
भक्त कावड़ियां लेकर आते हैं, माया के बहाव के साथ,
रेणुका को पुकारते हुए, बड़ी आस्था के साथ।

मतलब: भक्तों का हुजूम इस पवित्र भूमि पर उमड़ पड़ा है। वे पैदल चलते हुए, बिना किसी परवाह के। माँ के बहाव के कारण, भक्त कावड़ियां लेकर आते हैं और बड़ी आस्था के साथ, रेणुका माता की स्तुति करते हैं। 🚶�♀️ 👣 🚩💪

पांचवां कड़वा
सिर पर कुंकवा तिला, खज़ाना छलक उठा,
माँ को चढ़ाया, फूलों का ये धन।
जब आरती हुई, तो सभी भक्त दंग रह गए,
माँ की भक्ति के रंग में रंग गए।
मतलब: भक्त माथे पर कुंकवा तिला लगाते हैं और पीले रंग का भंडारा लगाते हैं। फूलों की माला माँ को चढ़ाई जाती है। जब आरती हुई, तो सभी भक्त भक्ति में डूब गए। वे माँ की भक्ति के रंग में रंग गए। 🔴💛🌼🎶

छठा कड़वा
यहाँ मिलती है धर्म और नैतिकता की शिक्षा,
एकता का बीज, मन में हमेशा जड़ जमाए रहता है।
तीर्थ यात्रा के ज़रिए संस्कृति को बचाना चाहिए,
आने वाली पीढ़ी को यही विश्वास देना चाहिए। अर्थ: इस इलाके में धर्म और नैतिकता की शिक्षा मिलती है। एकता (एकता) का बीज हमेशा मन में बसा रहता है। इस तीर्थ यात्रा के ज़रिए हमें अपनी संस्कृति को बचाकर रखना चाहिए और यही विश्वास अगली पीढ़ी को देना चाहिए। 📜🤝🌱✨

सातवीं कड़वाहट
माँ रेणुका, आपका आशीर्वाद आपके साथ रहे,
आप हमें जीवन के संघर्षों से बचाएँ।
अगले साल, हम फिर इसी जगह पर मिलेंगे,
आपकी कृपा के बिना, इस दुनिया में कोई कहानी (अस्तित्व) नहीं है।
अर्थ: हे माँ रेणुका, आपका आशीर्वाद हमेशा हम पर बना रहे। हमें जीवन के सभी संघर्षों से बचाएँ। अगले साल, हम फिर इसी जगह पर मिलेंगे। आपकी कृपा के बिना, इस दुनिया में कोई कहानी (अस्तित्व) नहीं है। 💖 आशीर्वाद 💫🔚

✨ कविता का सुंदर और सही टाइटल ✨
⛰️ श्री रेणुका यात्रा: सौंदत्ती की भक्ति गंगा 🚩 (जय जय मल्हार)

📜 कविता का छोटा मतलब 📜
यह कविता बेलगाम ज़िले के सौंदत्ती से श्री रेणुका (अंबाबाई) की तीर्थ यात्रा के बारे में बताती है, जो मार्गशीर्ष पूर्णिमा को होती है। यह तीर्थ यात्रा महाराष्ट्र और कर्नाटक के भक्तों को जोड़ती है, जहाँ 'येलकोट येलकोट, जय जय मल्हार' की धुन पर भंडारा होता है। जमदग्नि ऋषि की पत्नी इस माँ के दर्शन से भक्तों के दुख दूर होते हैं। भक्त पैदल, कांवड़ लेकर आते हैं। यह तीर्थ यात्रा सिर्फ़ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता, नैतिकता और आस्था का भी एक अहम प्रतीक है।

🌟 इमोजी समरी (इमोजी समरी) 🌟
🇮🇳 🛕 ✨💖 📣💛🤝😊 ✨ माँ 💖🙌 🚶�♀️ 👣 🚩💪 🔴💛🌼🎶 📜🤝🌱✨ 💖 आशीर्वाद 💫🔚

--अतुल परब
--दिनांक-04.12.2025-गुरुवार.
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