खुद से

Started by शिवाजी सांगळे, December 15, 2025, 03:24:31 PM

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शिवाजी सांगळे

खुद से

बैठीं है तनहाई "खुद से"
लेकर फूल उम्मीद के

कबतक यूहीं आजमाते रहेंगे
हम खुद से खुद की दूरियाँ
चाहकर भी, डूबना गहराई में
डूबने ना दे, सुकूँ से दरिया

अच्छाइयों का शौक है किसे?
ढूंढते हैं आजकल बुराइयां
क्या होगा, पता नहीं आजका?
पढेंगे जरूर लोग कहानियां

©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९
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