📱 सोशल मीडिया: अपनी बात कहने का ज़रिया या कुछ समय का भ्रम? 💬📲🌍🗣️✨ 🔓💖💡📚

Started by Atul Kaviraje, December 15, 2025, 07:08:51 PM

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Atul Kaviraje

सोशल मीडिया – अभिव्यक्ति का माध्यम या भ्रमजाल ?-

नमस्ते! 'सोशल मीडिया - अपनी बात कहने का ज़रिया या भ्रम?' इस सोशल टॉपिक पर, मैं एक सुंदर, मतलब वाली, आसान, सीधी, ढीली-ढाली, रसीली और तुकबंदी वाली, 7 लाइन की मराठी कविता पेश कर रहा हूँ, हर लाइन में 4 लाइनें (पाद और पद्य मिलाकर) इस तरह हैं।

📱 सोशल मीडिया: अपनी बात कहने का ज़रिया या कुछ समय का भ्रम? 💬

पहला लाइन
हाथ में मोबाइल, दुनिया में क्रांति,
सोशल मीडिया ने दी, एक नई शांति।
अपनी बात कहने का ज़रिया, विचारों को आसानी से बताना,
दुनिया करीब आई, कम्युनिकेशन की स्पीड।
मतलब: हाथ में मोबाइल आने से दुनिया में बड़े बदलाव (क्रांति) आए। सोशल मीडिया ने एक नई तरह की शांति (कनेक्शन) दी। इस ज़रिया की वजह से हम अपने विचार आसानी से बता सकते हैं और दुनिया से कम्युनिकेशन की एक स्पीड बनी है। 📲🌍🗣�✨

दूसरा श्लोक
कोई रोक नहीं, कोई डर नहीं,
हमारे दिल में जो एहसास हैं, उन्हें एक पल में डाल दो।
कला, ज्ञान और जानकारी, सब कुछ एक क्लिक पर मिल जाता है,
यही पॉजिटिव पावर का असली आधार है।
मतलब: इस पर कोई रोक नहीं, या किसी चीज़ का डर नहीं। हम अपने मन के एहसास को एक पल में डाल सकते हैं। कला, ज्ञान और सारी जानकारी एक क्लिक पर मिल जाती है। यही पॉजिटिव पावर का असली आधार है। 🔓💖💡📚

तीसरा कड़वा
लेकिन इसका दूसरा पहलू अलग है,
सुख, दुख सब, यहीं हैं।
फोटो और वीडियो, वो सारे फिल्टर,
ज़िंदगी का सच, यहां कड़वा हो जाता है।
मतलब: लेकिन इस मीडियम का दूसरा पहलू बहुत अलग है। इस पर दिखने वाली हर चीज़ झूठी (लगने वाली) है। फोटो और वीडियो को कई फिल्टर का इस्तेमाल करके खूबसूरत बनाया जाता है, जिसकी वजह से यहां ज़िंदगी का सच कड़वा लगता है। 🎭😢📸🚫

चौथी कड़वाहट
दूसरों की खुशी से हम दुखी हो जाते हैं,
हमें लगता है कि हमारी ज़िंदगी कैसी है।
चैट और लाइक की बहुत ज़्यादा भूख लगती है,
खुशी डिप्रेशन की खाई में धकेल दी जाती है।
मतलब: दूसरों की पोस्ट की हुई खुशी देखकर हम दुखी हो जाते हैं, और हमारी ज़िंदगी बोरिंग (रुखी) लगने लगती है। चैट और लाइक की बहुत ज़्यादा भूख लगती है। इस वजह से खुश मन डिप्रेशन के गड्ढे में धकेल दिया जाता है। 🙁👍💬😔

पांचवीं कड़वाहट
रील्स और पोस्ट में समय बर्बाद होता है,
असली दुनिया से संपर्क टूट जाता है।
लोगों को डिजिटल की लत लग गई है,
लोग इंसानी रिश्ते भूल गए हैं।
मतलब: हमारा सारा समय रील्स (छोटे वीडियो) और पोस्ट देखने में बर्बाद होता है। इस वजह से असली दुनिया से हमारा संपर्क टूट जाता है। डिजिटल मीडिया की बहुत ज़्यादा लत लग गई है। इस वजह से लोग इंसानी रिश्ते भूल गए हैं। ⏰💻🔗💔

छठी कड़वी बात
सच को वेरिफ़ाई करने की ज़रूरत नहीं है,
फ़ेक न्यूज़ से बड़ा हंगामा होता है।
नफ़रत और बुराई आसानी से फैलती है,
इमोशंस के खेल में, समझदारी पीछे छूट जाती है।
मतलब: कोई भी बात सच है या नहीं, यह चेक करने की हिम्मत किसी में नहीं है। फ़ेक न्यूज़ से समाज में बहुत कन्फ़्यूज़न होता है। नफ़रत और नेगेटिव बुराई आसानी से फैलती है। इमोशंस के इस खेल में, लोग सोचना भूल जाते हैं। 📰❌🤬🧠

सातवीं कड़वी-मीठी बात
मीडिया पावर है, इसे ध्यान से इस्तेमाल करें,
ज़िंदगी का बैलेंस बनाए रखें, इसे चेक करके।
यह सिर्फ़ एक भ्रम है, असली दुनिया बाहर है,
चलो सच का इंतज़ार करें, चलो ज़िंदगी को पब्लिक करें।
मतलब: सोशल मीडिया एक पावरफ़ुल मीडियम है, लेकिन इसका इस्तेमाल ध्यान से करना चाहिए। ज़िंदगी का बैलेंस ठीक से चेक करना चाहिए। सोशल मीडिया सिर्फ़ एक भ्रम है, असली दुनिया बाहर है। चलो सच का इंतज़ार करें और ज़िंदगी को खुशहाल बनाएं। ⚖️🧘�♂️🚪😊

✨ कविता का सुंदर और सही टाइटल ✨
📱 सोशल मीडिया: अपनी बात कहने का एक ज़रिया या कुछ समय का भ्रम? 💬

📜 कविता का छोटा मतलब 📜
यह कविता सोशल मीडिया के दो पहलुओं पर रोशनी डालती है। एक तरफ, यह अपनी बात कहने और जानकारी देने का एक ताकतवर ज़रिया है, जो दुनिया को जोड़ता है। दूसरी तरफ, यह ज़रिया ज़िंदगी की झूठी खुशी दिखाता है, जो लोगों को डिप्रेशन की ओर ले जाता है। इसकी नेगेटिविटी है 'लाइक' की भूख, समय की बर्बादी, असली दुनिया से दूरी और फेक न्यूज़ का फैलना। कविता इस ताकत का समझदारी से इस्तेमाल करने, ज़िंदगी में बैलेंस बनाने और असली दुनिया पर ध्यान देने का मैसेज देती है।

🌟 इमोजी समरी 🌟
📲🌍🗣�✨ 🔓💖💡📚 🎭😢📸🚫 🙁👍💬😔 ⏰💻🔗💔 📰❌🤬🧠 ⚖️🧘�♂️🚪😊

--अतुल परब
--दिनांक-04.12.2025-गुरुवार.
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