📱 डिजिटल युग में कम्युनिकेशन गैप: रिश्तों में गैप को भरना-1-📱💔⏱️🗣️🚫🤔⚖️🛡️❌

Started by Atul Kaviraje, December 15, 2025, 08:18:28 PM

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Atul Kaviraje

मॉडर्न पेरेंटिंग-राजीव तांबे
डिजिटल युग में कम्युनिकेशन गैप

बच्चों के लेखक राजीव तांबे का 'मॉडर्न पेरेंटिंग' और 'डिजिटल युग में कम्युनिकेशन गैप' जैसे बहुत ज़रूरी टॉपिक पर आधारित एक डिटेल्ड, एनालिटिकल आर्टिकल

📱 डिजिटल युग में कम्युनिकेशन गैप: रिश्तों में गैप को भरना

निबंध - मराठी

📝 टेक्नोलॉजी और टूटा हुआ कम्युनिकेशन
बच्चों के लेखक राजीव तांबे के अनुसार, मॉडर्न पेरेंटिंग में सबसे बड़ी समस्या माता-पिता और बच्चों के बीच कम्युनिकेशन गैप है। टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल और बिज़ी लाइफस्टाइल के कारण यह गैप बढ़ता जा रहा है। माता-पिता और बच्चे दोनों ही स्क्रीन में लगे रहते हैं, जिससे उनके बीच इमोशनल और मतलब वाला कम्युनिकेशन खत्म होता जा रहा है। यह आर्टिकल 10 ज़रूरी पॉइंट्स के ज़रिए डिजिटल युग में कम्युनिकेशन गैप के कारणों और समाधानों को समझाता है।

1. फिजिकल मौजूदगी, इमोशनल गैरमौजूदगी 📵
1.1. 'फ़ोन' और 'बच्चों' के बीच रिश्ता: पेरेंट्स का ध्यान लगातार अपने मोबाइल फ़ोन या दूसरे गैजेट्स पर रहता है, तब भी जब वे अपने बच्चों के साथ बैठे होते हैं। इससे बच्चों को लगता है कि गैजेट्स उनसे ज़्यादा ज़रूरी हैं।

(उदाहरण): पिता अपने बच्चों के खिलौनों को देखे बिना बस 'हम्म' कहते हैं और ज़रूरी ईमेल चेक करने में बिज़ी रहते हैं।

1.2. ध्यान से सुनने की कमी: पेरेंट्स ध्यान से नहीं सुनते, जिससे बच्चों में अपनी राय बताने का मोटिवेशन कम हो जाता है।

1.3. बच्चे की 'बॉडी' लैंग्वेज: जब कोई बच्चा खुद को नज़रअंदाज़ महसूस करता है, तो उसका दर्द उसकी बॉडी लैंग्वेज से ज़ाहिर होता है, जिसे पेरेंट्स अक्सर पहचान नहीं पाते।

इमोजी समरी: 📱👂❌🥺➡️ 😔

2. समय की क्वालिटी, क्वांटिटी नहीं ⏱️

2.1. 'क्वालिटी टाइम' की गलतफहमी: कई पेरेंट्स घर पर बहुत समय बिताते हैं, लेकिन वे उस समय को बस एक जगह बैठकर स्क्रीन देखते हुए बिताते हैं, जिसे वे 'क्वालिटी टाइम' मानते हैं।

2.2. डेडिकेटेड टाइम की कमी: बच्चों को डेडिकेटेड टाइम दें, जिसमें सिर्फ़ उनकी पसंदीदा चीज़ें और इमोशनल बातें हों, बिना किसी बाहरी रुकावट के।

2.3. 'रेगुलरिटी' ज़रूरी है: बातचीत भले ही रोज़ 10-15 मिनट की हो, लेकिन वह रेगुलर (Consistent) होनी चाहिए, ताकि बातचीत की आदत बनी रहे।

इमोजी समरी: ⏱️❌✅🤝➡️ 📈

3. 'इंस्टेंट' रिस्पॉन्स कल्चर का स्ट्रेस ⚡

3.1. गैजेट्स का 'इंस्टेंट' रिस्पॉन्स: टेक्नोलॉजी में हर एक्शन का तुरंत रिस्पॉन्स मिलता है। इसलिए, बच्चे भी अपने पेरेंट्स से तुरंत रिस्पॉन्स चाहते हैं।

3.2. माता-पिता की लापरवाही और बच्चों का गुस्सा: अगर माता-पिता तुरंत जवाब नहीं देते हैं, तो बच्चों में फ्रस्ट्रेशन और गुस्सा बढ़ता है, जिससे बातचीत तुरंत टूट जाती है।

3.3. सब्र सिखाना: माता-पिता को बच्चों को सब्र और इंतज़ार करने की अहमियत सिखानी चाहिए।

इमोजी समरी: ⚡😠⏳🧠➡️ 🧘

4. इमोशनल एक्सप्रेशन में रुकावट 💔

4.1. स्क्रीन के पीछे इमोशन: बच्चे अक्सर अपनी भावनाओं को सीधे बताने के बजाय इमोजी या मैसेज के ज़रिए बताते हैं।

4.2. इमोशनल लिटरेसी की कमी: माता-पिता अपने बच्चों से सीरियस टॉपिक पर बात करते समय उनकी इमोशनल लिटरेसी को डेवलप नहीं करते हैं।

4.3. 'रोल मॉडल' की कमी: माता-पिता परिवार में अपनी भावनाओं को खुलकर नहीं बताते हैं, इसलिए बच्चे उनकी नकल करते हैं।

इमोजी समरी: 🥺🎭🤐💖➡️ 🗣�

5. नेगेटिव कम्युनिकेशन और क्रिटिसिज़्म 🚫
5.1. नेगेटिव वर्बल बॉम्बार्डमेंट: जब कम्युनिकेशन शुरू होता है, तो यह अक्सर 'आपने क्या नहीं किया' या 'आपकी गलतियों' पर फोकस होता है, जिससे पॉजिटिव कम्युनिकेशन नहीं होता।

5.2. उपदेश देने की आदत: पेरेंट्स तुरंत उपदेश देने वाले रोल में आ जाते हैं। बच्चे 'जैसा मैं कहूँ वैसा करो' वाले रोल की वजह से बातचीत से बचते हैं।

5.3. कम्पेरिजन और डायलॉग: अगर आप इसकी कम्पेयर 'शर्माजी के बेटे' से करते हैं, तो डायलॉग पूरी तरह से बंद हो जाता है और बच्चा निराश महसूस करता है।

इमोजी समरी: ❌⚖️💬🤐➡️ 😔

आर्टिकल समरी (समरी इमोजी):
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--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-13.12.2025-शनिवार.
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