🔱 कविता: भक्ति की भक्ति 🔱🎉 👑🙏💖🐄🥛🌊🧘‍♂️🕉️😊✨🙏✨👑🎯

Started by Atul Kaviraje, December 15, 2025, 08:53:47 PM

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Atul Kaviraje

संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा-
अभंग क्र.१९
ब्रम्हादिक जया लाभासि ठेंगणे । बळिये आम्ही भले शरणागत ॥१॥

कामनेच्या त्यागें भजनाचा लाभ । जाला पद्मनाभ सेवाॠणी ॥ध्रु.॥

कामधेनूचिया क्षीरा पार नाहीं । इच्छेचिये वाही वरुषावे ॥२॥

बैसलिये ठायीं लागलें भरतें । त्रिपुटीवरतें भेदी ऐसें ॥३॥

हरी नाहीं आम्हां विष्णुदासां जगीं । नारायण अंगीं विसावला ॥४॥

तुका म्हणे बहु लाटे हें भोजन । नाहीं रिता कोण राहत राहों ॥५॥

🔱  कविता: भक्ति की भक्ति 🔱

॥ संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा ॥

1

ब्रह्मा छोटे हो गए, लाभ मिलने वाला है,
समर्पण की शक्ति हमारे हाथ में है, हे विष्णुदास।
अहंकार त्यागकर, निरंतर सेवा करते हुए,
हम भगवान से बड़े हैं, यह महिमा प्राप्त करें।

अर्थ: ब्रह्मा की तरह, भगवान भी इस लाभ के सामने छोटे हो गए। विष्णुदास के रूप में, समर्पण की शक्ति हमारे हाथ में है। अहंकार त्यागकर, निरंतर सेवा करते हुए। इसलिए, हम भगवान से बड़े हो गए हैं, यह महिमा प्राप्त हुई है।

इमोजी सारांश: 👑🙏🙌✨

2

इच्छा त्यागी, भजन का लाभ लिया,
पद्मनाभ स्वयं हमारी सेवा के ऋणी हो गए।
पवित्र भक्ति, फल की कोई आशा नहीं,
निस्वार्थ प्रेम से, विट्ठल की छाप बन गई।

मतलब: सभी इच्छाओं को त्यागकर भक्ति का लाभ मिला। विट्ठल (पद्मनाभ) खुद हमारी सेवा के कर्जदार हो गए। उन्होंने अपनी भक्ति को पवित्र किया, फल की इच्छा नहीं की। उन्हें निस्वार्थ प्रेम से विट्ठल का आभास (अनुभव) मिला।

इमोजी समरी: 💖 त्याग 🙏🕉�

3
जैसे कामधेनु दूध देती है, अनंत दूध देती है,
वैसे ही भक्ति का भंडार, हमेशा सब्र से भरता है।
इच्छा के अनुसार बारिश होती है, यहाँ आनंद है,
यह रूहानी महिमा है, इसकी कोई सीमा नहीं है।

मतलब: जैसे कामधेनु लगातार दूध देती रहती है, वैसे ही भक्ति का भंडार हमेशा सब्र से भरता है। यहाँ इच्छा के अनुसार आनंद की बारिश होती है। यह रूहानी महिमा है, जिसकी कोई सीमा नहीं है।

इमोजी समरी: 🐄🥛🌊✨

4
यह बारह जगहों में भरता है, यह आनंद का है,
त्रिपुटी से परे, अद्वैत सत्य का है।
ज्ञान, ज्ञाता, जानने वाला तीनों, यहाँ एक हो गए हैं,
शरीर की चेतना भूल गई है, यहाँ निरंतर चेतना है।

मतलब: जहाँ कोई बस जाता है, वहाँ आनंद की लहर आती है। अद्वैत सत्य का यह रूप त्रिपुटी से परे है। ज्ञान, ज्ञेय और ज्ञाता सब एक हो गए हैं। शरीर की चेतना भूलकर, यहाँ अनंत चेतना को प्राप्त किया है।

इमोजी समरी: 🧘�♂️🌌🌊🔥

5
हरि से कोई जुदाई नहीं, हम दुनिया में विष्णुदास हैं,
नारायण बस गए हैं, अपना शरीर।
मैं और तुम नहीं, प्रेम एक हो गया है,
आत्मा में ईश्वर हो गए हैं, यही शांति का नियम है।

मतलब: हम विष्णुदास का दुनिया में भगवान से कोई अलगाव नहीं है। क्योंकि नारायण हमारे अपने शरीर (आत्मा) में बस गए हैं। 'मैं और तुम' जैसा कोई फर्क नहीं है, प्यार एक हो गया है। क्योंकि भगवान आत्मा में बस गए हैं, शांति का नियम मिल गया है।

इमोजी समरी: 🤝💖😊🕉�

6
तुम कहते हो लहरें, खाना बहुत मीठा है,
कोई बेकार नहीं जीता, कोई चाहत नहीं।
इस आनंद के पल में, भूख के लिए कोई जगह नहीं,
यह परफेक्शन की हालत, जीवन का वरदान है।

मतलब: तुकाराम महाराज कहते हैं, यह (भक्ति वाला) खाना बहुत रिच (समृद्ध) और मीठा है। कोई खाली हाथ नहीं जाता, कोई चाहत (इच्छा) नहीं रहती। इस आनंद के पल में, भूख के लिए कोई जगह नहीं। यह परफेक्शन की हालत जीवन का वरदान है।

इमोजी समरी: 🍚👑🎯💖

7

सरेंडर का यह फ़ॉर्मूला, अभी अपने दिल में बसा लो,
यह तुकोब का अभंग है, मोक्ष की कहानी।
अभ्यास और भक्ति से, भगवान के कर्जदार बनो,
पवित्र वचन का यह खज़ाना, इस पल अनमोल है।

मतलब: सरेंडर का यह फ़ॉर्मूला अभी अपने दिल में बसा लो। तुकाराम महाराज का अभंग मोक्ष का रास्ता दिखाता है। अभ्यास और भक्ति से, भगवान के कर्जदार बनो। पवित्र वचन का यह खज़ाना बहुत अनमोल है।

इमोजी समरी: 🙏✨👑🎯

🎉 कविता का इमोजी समरी 🎉
👑🙏💖🐄🥛🌊🧘�♂️🕉�😊✨

--अतुल परब
--दिनांक-14.12.2025-रविवार.
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