🐍 नागोबा की म्हसवड की पालकी यात्रा-🐍🚩✨🙏 🐍🥛🔥💖 🥁🕺🏽🎉🎊 🤞 प्रसाद 💯❤️

Started by Atul Kaviraje, December 18, 2025, 08:07:10 PM

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Atul Kaviraje

नागोबा यात्रा पालखी- म्हसवड, तालुका-माण-

🐍 नागोबा की म्हसवड की पालकी यात्रा

टाइटल: नागोबा की म्हसवड की पालकी यात्रा

तारीख: 07.12.2025, रविवार

स्पेशल: नागोबा यात्रा पालकी
जगह: म्हसवड, तालुका मान, सतारा

भक्तिभाव: पूरा (BHAKTIBHAV PURN)

कड़वे 1: यात्रा की शुरुआत
सातवां (7) दिन, म्हसवड का यह गांव,
आज भक्तों के बीच नागोबा यात्रा का माहौल है।
मान तालुका की शान, पालकी का यह पड़ाव,
नाग देवता की पूजा का यह रास्ता, रोशन हो गया है। 🐍🚩✨🙏

मतलब: आज 7 दिसंबर, रविवार है और आज म्हसवड (मान तालुका) में भक्तों के बीच नागोबा यात्रा का माहौल है। यह यात्रा मान तालुका की शान है और पालकी की रस्म एक बड़ा इवेंट है। नाग देवता की पूजा का यह तरीका आज पब्लिश किया गया है।

कड़वे 2: नाग देवता के दर्शन
नाग देवता हवा से प्रकट हुए, उनका रूप भक्तों ने अपने में समा लिया, उनकी चमक उसके साथ तालमेल बिठा रही थी।
दूध और धूप ले जाई गई, उनकी पूजा हुई,
सांपों का डर दूर हुआ, आध्यात्मिक जीवन आया। 🐍🥛🔥💖

मतलब: नाग देवता (सर्प देवता) हवा से प्रकट होते हैं। उनका चमकीला रूप भक्तों ने अपने में समा लिया। दूध और धूप ले जा कर उनकी पूजा की जाती है। इस दर्शन से सांपों का डर दूर होता है और आत्मा को शांति मिलती है।

कड़वे 3: पालकी की रस्म
पालकी तैयार थी, वह काठी के साथ चल पड़ी,
ढोल और झांझ की आवाज़ तेज़ थी।
भव्य नृत्य हुआ, भक्त लौटे,
महास्वादों की यात्रा की शुरुआत अनोखी थी। 🥁🕺🏽🎉🎊

मतलब: नागदेवता की पालकी (या काठी) तैयार है और जुलूस के लिए निकल चुकी है। इलाका ढोल और ताशों की तेज़ आवाज़ से भर गया है। यात्रा के दौरान 'गाजी' नाम का एक पारंपरिक नृत्य किया जाता है, जिसमें भक्त बारी-बारी से हिस्सा लेते हैं। यह म्हस्वाद यात्रा की एक खास और अनोखी पहचान है।

कड़वे 4: मन्नतें और आस्था
कितनी मन्नतें मानीं, कितनी इच्छाएं रखीं,
नागोबा की कृपा से सभी इच्छाएं पूरी हुईं।
यहां मुर्गे और बकरे की बलि देने का रिवाज है,
लेकिन सच्ची भक्ति, यही सच्ची भक्ति है। 🤞 प्रसाद 💯❤️

मतलब: भक्तों ने कई मन्नतें मानीं और मन में कई इच्छाएं रखीं। नागोबा की कृपा से उनकी सभी इच्छाएँ पूरी हुई हैं। यहाँ, कुछ भक्तों द्वारा मुर्गे और बकरे की बलि देने का रिवाज़ है (पारंपरिक लोक संस्कृति के हिस्से के तौर पर), लेकिन भगवान के प्रति सच्ची भक्ति ही सच्ची भक्ति है।

कड़वे 5: मान देश का वैभव
मान देश की धरती के ये महान देवता,
नागोबा की कृपा, सब पर तुरंत होती है।
सूखे के संकट में, उन्होंने बड़ा सहारा दिया,
जीवन खुशहाल हो गया, घर का तिजोरी भर गया। 🏞� सूखा 🌾💰

मतलब: ये मान देश (मान तालुका) की धरती के महान देवता हैं। नागोबा की कृपा सब पर तुरंत होती है। सूखे के संकट में, इस देवता ने बड़ा सहारा दिया। इसलिए, जीवन खुशहाल हो गया और घर का तिजोरी (अनाज/धन से) भर गया।

कड़वे 6: सुरीली आवाज़ और तुकबंदी
एक रसीली, सीधी-सादी कविता, तुकबंदी मीठी है,
नागोबा की यात्रा की, यह चाहत बढ़ाती है।
चरणों से गाओ, भक्ति की यह पुकार,
विश्वास और भरोसे की, डर नहीं टूटेगा। 📜🗣�🔊🔗

मतलब: यह कविता मीठी, सीधी-सादी और मीठी तुकबंदियों से सजी है। यह नागोबा की तीर्थ यात्रा की चाहत बढ़ाती है। हम भक्ति की यह पुकार चरणों और छंदों के ज़रिए कर रहे हैं। विश्वास और भरोसे की यह नींव कभी नहीं टूटेगी।

कड़वे 7: आखिरी प्रणाम
हे नागोबा देवा, आपके चरणों में हमारा प्रणाम,
साल दर साल, हम यह चंदन चढ़ाएंगे।
अगली तीर्थ यात्रा की उत्सुकता, आज से शुरू हुई है,
भक्तों की यह सेवा, आपकी कृपा से सफल हुई है। 🙏💐⏳🌟

मतलब: हे नागोबा देवा, आपके चरणों में हमारा प्रणाम। हर साल हम आपको भक्ति का चंदन चढ़ाएंगे। हमने अभी अगले साल की तीर्थ यात्रा की इच्छा शुरू की है। भक्तों की यह सेवा आपकी कृपा से सफल हुई है।

इमोजी समरी (इमोजी का सारांश):
🐍🚩✨🙏 🐍🥛🔥💖 🥁🕺🏽🎉🎊 🤞 प्रसाद 💯❤️ 🏞� सूखा 🌾💰 📜🗣�🔊🔗 🙏💐⏳🌟

--अतुल परब
--दिनांक-07.12.2025-रविवार.
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