"कर्तव्य और रिश्तों का संघर्ष"🏹🤔⚖️🛡️🚩💡🙏☀️💡🕉️🙏☀️💡🕉️🙏

Started by Atul Kaviraje, December 23, 2025, 07:02:01 PM

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Atul Kaviraje

॥ ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका ॥
॥ अथ प्रथमोऽध्यायः – अध्याय पहिला ॥

॥ अर्जुनविषादयोगः ॥

तूं आधींचि काय नेणसी ? । कीं हे गोत्रज नोळखसी ? ।वायांचि काय करिसी । अतिशो आतां ? ॥ २४ ॥
हे तू पूर्वीच जाणत नव्हतास का ? किंवा या भाऊबंदांची तुला ओळख नव्हती का ? आताच त्यांच्याबद्दल हा विनाकारण फाजिल कळवळा का ? ॥२-२४॥

॥कविता: धोखे का पर्दा ॥

शीर्षक: "कर्तव्य और रिश्तों का संघर्ष"

1.
कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में, अर्जुन व्याकुल था,
अपने दोस्तों को सामने देखकर, उसका भ्रम और मज़बूत हो गया।
धनुष उसके हाथ से फिसल गया, आँखों में आँसू आ गए,
कृष्ण पार्थ से कहते हैं, अब क्या हुआ?

अर्थ: युद्ध के मैदान में अर्जुन को लालच आ गया और वह दुखी होकर रोने लगा। 🏹😢🌀🕉�🏹😢🌀🕉�

2.
"पहले क्या सोचा था?", भगवान का यह सवाल,
युद्ध के ये नतीजे, क्या तुम्हें साफ़ नहीं थे?
अन्याय की कहानी पुरानी है, तुम सब जानते हो,
अब क्यों पीछे हट रहे हो, पीठ दिखा रहे हो?

अर्थ: तुम युद्ध के नतीजे पहले से ही जानते थे, तो अब क्यों पीछे हट रहे हो? 🤔📜🔥⚔️🤔📜🔥⚔️

3.
आपकी जान-पहचान पुरानी है, इन सभी कुलों से,
आप भीष्म-द्रोण को जानते हैं, उनका अपार अभिमान।
फिर आज रिश्तों का यह पत्ता क्यों टूटा?
कर्तव्य पथ पर धैर्य क्यों खोया?

अर्थ: आप जानते थे कि ये आपके रिश्तेदार हैं, फिर अब क्यों दुखी हो रहे हैं? 🤝👴👨�🏫❓🤝👴👨�🏫❓

4.
यह अत्यधिक शोक व्यर्थ है, पार्थ आपको शोभा नहीं देता,
आप क्षत्रिय धर्म भूल जाते हैं, अपना अर्थ खो देते हैं।
आपका रोना बेकार है, कायरता की निशानी है,
आपको सत्य और न्याय की रक्षा करनी चाहिए।

अर्थ: यह रोना कायरता है, आपको सत्य की रक्षा करनी चाहिए। 🛡�⚔️🚫😭🛡�⚔️🚫😭

5.
माया और मोह का ये पर्दा फाड़ दो,
तुम हिम्मत से इस भ्रम के तूफ़ान का सामना करो।
तुम्हारी ये दया अब, अधर्म की खाद,
तुम्हारी ये युद्ध की आवाज़ अब जगाओ।

मतलब: भ्रम को छोड़कर, हिम्मत से युद्ध का सामना करो, झूठी दया मत रखो। 🌪�✂️🚩💪🌪�✂️🚩💪

6.
कर्म का ये खेल अलग है, फल भोगते,
आज न्याय पाने के लिए दुश्मन से लड़ते।
छोड़ दो ये घोर दुख, हाथ में गांडीव लो,
जीत का ये टीला लगेगा, कुरुक्षेत्र की मिट्टी।

अर्थ: दुख छोड़ो और लड़ने के लिए गांडीव धनुष हाथ में लो। 🏹✋✨🚩🏹✋✨🚩

7.
कृष्ण अर्जुन को जीवन का सार बताते हैं,
कर्तव्य के आगे रिश्तों का यह बोझ तुच्छ है।
ज्ञानेश्वरी की कविताओं में ज्ञान संचित है,
भ्रम का यह घना कोहरा, प्रकाश में सूख गया।

अर्थ: कर्तव्य के आगे रिश्ते गौण हैं, ज्ञानेश्वरी में यही ज्ञान का प्रकाश है। ☀️💡🕉�🙏☀️💡🕉�🙏
कविता सारांश इमोजी: 🏹🤔⚖️🛡�🚩💡🙏

--अतुल परब
--दिनांक-19.12.2025-शुक्रवार.
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