"कृष्ण की सीख: अर्जुन का दिलासा"🏹 🐎 🚩 ⚔️ 🔥 🏛️ ⚖️ 🎡 🎯 📜 ✨ 🙏 🕉️ 🔱 🔓 🦁

Started by Atul Kaviraje, December 23, 2025, 07:04:30 PM

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Atul Kaviraje

॥ ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका ॥
॥ अथ प्रथमोऽध्यायः – अध्याय पहिला ॥

॥ अर्जुनविषादयोगः ॥

आजिचें हें झुंज । काय जन्मा नवल तुज ? ।हें परस्परें तुम्हां व्याज । सदांचि आथी ॥ २५ ॥
आजचे हे युद्ध तुला जन्मात नवीन आहे का ? तुम्हा एकमेकांना लढावयास निमित्त हे नेहेमीचेच आहे. ॥२-२५॥

पार्ट 2:  कविता

टाइटल: "कृष्ण की सीख: अर्जुन का दिलासा"

1. कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान पर
कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान पर, पार्थ का सारथी खड़ा था, गांडीव हाथ से गिर गया, उसका दिल परेशान था।
कृष्ण ने कहा, "अर्जुन, तुम्हारे लिए क्या नया है, ऐसा कौन सा युद्ध है जो तुमने कभी नहीं देखा, बताओ, स्टेज क्या है?"
मतलब: कुरुक्षेत्र पर अर्जुन की बुद्धि परेशान थी, तब कृष्ण पूछते हैं कि क्या यह युद्ध तुम्हारे लिए नया है? 🏹 🐎 🙇�♂️ 🚩

2. तुमने कई लड़ाइयाँ लड़ी हैं
तुमने कई लड़ाइयाँ लड़ी हैं, युद्ध के मैदान जीते हैं, आज हम क्यों भूल जाते हैं, तुम्हारी महानता।
वीरता तुम्हारे शरीर में है, गति तुम्हारे बाणों में है, तुम किससे डरते हो, इसे अपने मन में रखते हो, इसे अपने मन में रखते हो?
मतलब: तुमने पहले भी कई युद्ध जीते हैं, फिर आज तुम्हारी स्पीड क्यों कम हो गई? ⚔️ 🔥 💪 🛡�

3. कौरव पांडव दुश्मनी
कौरव पांडव दुश्मनी, ये कहानी पुरानी है, वजह सिर्फ़ आज है, तुम इसे अपनी आँखों से देख सकते हो।
बचपन की नफ़रत, अब बढ़ गई है, सच के लिए लड़ते-लड़ते, तुम्हारा मन क्यों झूठ बोल रहा है?
मतलब: तुम्हारी दुश्मनी पुरानी है, आज का युद्ध तो बस एक बहाना है। सच के लिए लड़ने से डरो मत। ⏳ 🏛� 🎭 ⚖️

4. वो ज़हरीला लड्डू
वो ज़हरीला लड्डू और, लाक्षागृह का जाल, क्या तुम कभी भूले हो, अर्जुन, वो संकट का समय।
तुम द्वंद्व में जीते, अपनी सारी दौलत, कौरवों का छल याद करो, अपनी हिम्मत दिखाओ। अर्थ: कौरवों के किए अन्याय को याद करो और अब अपनी हिम्मत दिखाओ। 🎲 🔥 😡 🔱

5. आपसी दुश्मनी
ये आपसी दुश्मनी, हमेशा जलती हुई, अब युद्ध के मैदान में, क्यों तुम्हारा मन नरम पड़ता है।
ये 'हित' का कारण है, ये कर्म का चक्र, वीर बनकर खड़े हो, क्यों झुकते हो?

अर्थ: ये युद्ध का कारण कर्म के चक्र से आया है, वीर बनकर खड़े हो। 🎡 🎯 🦁 🕉�

6. ज्ञानेश्वरी की कविता
ज्ञानेश्वरी की कविता, अर्थ गहरा बोलता है, कृष्ण के ये शब्द अमृत के वचनों जैसे हैं।
अब अपनी आँखों से भ्रम का वो पर्दा हटाओ, अपने स्वधर्म की रस्सी पकड़ो, भ्रम की बेड़ियाँ तोड़ो।

अर्थ: मौली की कविता भ्रम दूर करने और स्वधर्म पर चलने का संदेश देती है। 📜 ✨ 🕊� 🔓

7. अध्यात्म ही जीवन है
अध्यात्म ही जीवन है, यह कविता है, जो विपत्ति से लड़ता है, वही विजयी होता है।
श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित होकर, मुझे यह गीत गाने दो, सत्य की रक्षा करने दो, उनके चरणों में अपना सिर झुकाने दो।
अर्थ: जो विपत्ति से लड़ता है, वही जीतता है। आओ, श्री कृष्ण के चरणों में सिर झुकाएँ। 🙏 🚩 🕉� 🔱

इमोजी सारांश (सारांश): 🏹 🐎 🚩 ⚔️ 🔥 🏛� ⚖️ 🎡 🎯 📜 ✨ 🙏 🕉� 🔱 🔓 🦁

--अतुल परब
--दिनांक-20.12.2025-शनिवार.
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