वैष्णव धर्म समानता का 🕊️🌎🙏❌🚪 | 👂💖🤝✨ | 🚫😠💡🙏 | 🤝👑🌎💔 | 💖🕊️🚫🌿 |

Started by Atul Kaviraje, December 24, 2025, 06:52:45 PM

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Atul Kaviraje

संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा-
अभंग क्र.२१
विष्णुमय जग वैष्णवांचा धर्म । भेदाभेदभ्रम अमंगळ ॥१॥

अइका जी तुम्ही भक्त भागवत । कराल तें हित सत्य करा ॥ध्रु.॥

कोणा ही जिवाचा न घडावा मत्सर । वर्म सर्वेश्वरपूजनाचें ॥२॥

तुका म्हणे एका देहाचे अवयव । सुख दुःख जीव भोग पावे ॥३॥

📜 कविता

टाइटल: वैष्णव धर्म समानता का 🕊�

(संत तुकाराम महाराज अभंग नंबर 21)

1. विष्णु से भरी दुनिया

सारी दुनिया विष्णु से भरी है, वैष्णव का यह धर्म महान है,
भेद के भ्रम का, वह अंधकार अशुभ है।
तुकोबास द्वारा खोला गया समानता का दर्शन,
सभी प्राणियों में, देखना ही संचार है! 🌎🙏❌🚪

मतलब: यह पूरी दुनिया विष्णु से भरी है और यही वैष्णव का महान धर्म है। भेद (अज्ञान) का भ्रम अशुभ और महान अंधकार है। तुकाराम महाराज ने समानता का दर्शन सिखाया है। सभी प्राणियों में ईश्वर को देखना, यही सच्चा आचरण है।

2. भक्तों के कर्म

ऐका, तुम भक्त हो, भगवत के उपासक हो,
तुम्हारे कर्म लाभकारी हों, सत्य के प्रकाशक हों।
जो भी करो, अच्छे के लिए करो, मन को पवित्र रखो,
निस्वार्थ भावना का, आदर्श दुनिया में रखो! 👂💖🤝✨

अर्थ: हे भगवान के भक्तों और उपासकों, सुनो। तुम्हारे कर्म हितकारी (हित) होने चाहिए और वे सच्चे मन (सत्य) से किए जाने चाहिए। दुनिया में निस्वार्थ भावना का आदर्श बनाए रखो।

3. ईर्ष्या का त्याग

कोई किसी आत्मा, मन से ईर्ष्या न करे,
यही भगवान का स्वरूप है, आओ पूजा का सत्य जानें।
मंदिरों और मूर्तियों में भगवान को पाना आसान लगता है,
लेकिन हर जीव में हरि को देखना, यह रहस्य महान है! 🚫😠💡🙏

अर्थ: किसी भी जीव से ईर्ष्या (घृणा) अपने मन में न आने दो। यही भगवान की पूजा का सच्चा रहस्य है, इस सत्य को जानो।
मंदिरों में मूर्ति पूजा करना आसान लगता है, लेकिन हर जीव में भगवान को देखना, यह एक महान रहस्य है।

4. ऊंच-नीच का कोई फर्क नहीं, सब इंसान बराबर हैं,
घास में जो रहता है, वो विट्ठल है, पंढरी के भगवान।
इस मायावी दुनिया में, एक पल के लिए भ्रम तोड़ दो,
एकनिष्ठ बुद्धि से जियो, हर जगह हरि को देखो! 🤝👑🌎💔

मतलब: ऊंच-नीच का कोई फर्क नहीं, सब इंसान बराबर हैं। जानवरों की दुनिया में पंढरी के विट्ठल रहते हैं। मायावी दुनिया में, एक पल के लिए भेदभाव का यह भ्रम तोड़ दो। एकनिष्ठ बुद्धि से जियो और हर जगह भगवान को देखो।

5. दया और प्यार

दया और शांति रखो, मन में सद्गुणों की खुशबू आने दो,
भगवान के प्यार की, यही अनमोल संदेश है।
ईर्ष्या मन को गंदा करती है, सद्गुणों का फल खो जाता है,
सबसे प्यार करने से मुक्ति का रास्ता बनता है! 💖🕊�🚫🌿

मतलब: अपने मन में दया और शांति रखो, सद्गुणों की खुशबू बनी रहे। यही भगवान के प्यार का अनमोल संदेश है। जलन करने से मन खराब होता है और सद्गुणों का फल खत्म हो जाता है। सबसे प्यार करने से मुक्ति का रास्ता दिखता है।

6. समाज की सेवा

आप कहते हैं कि हम सब एक ही शरीर के हिस्से हैं, हम सब हैं,
एक दुख पाता है, दूसरा जीता है।
जैसे पैर में कांटा चुभता है तो हाथ उसे निकालने के लिए दौड़ता है,
वैसे ही समाज के दुख में हमें सहारा देने के लिए दौड़ना चाहिए! 👤🤝💔🩹

मतलब: तुकाराम महाराज कहते हैं, हम सब एक ही शरीर के हिस्से हैं। अगर एक इंसान को दुख होता है तो दूसरा भी उस दर्द को सहता है। जैसे पैर में कांटा चुभने पर हाथ उसे निकालने के लिए दौड़ता है, वैसे ही हमें समाज के दुख में सहारा देने के लिए दौड़ना चाहिए।

7. वैष्णव धर्म का संकल्प

आइए, आज हम संकल्प लें, वैष्णव धर्म का जाप करें,
भेदभाव का भ्रम छोड़कर, सबमें हरि पापु बनें।
यही तुकोबा की शिक्षा है, यही समता का प्रकाश है,
आइए हम विश्व बंधुत्व बनाए रखें, जीवन में विकास होगा! 🙏🚩✨🌍

अर्थ: आज हम वैष्णव धर्म का संरक्षण करने का संकल्प लें। आइए हम भेदभाव का भ्रम छोड़कर सब में ईश्वर को देखें। यही तुकाराम महाराज की शिक्षा है और समता का प्रकाश है। यदि आप विश्व बंधुत्व बनाए रखेंगे, तो जीवन में निश्चित रूप से विकास होगा।

🎉 इमोजी सारांश – कविता:
🌎🙏❌🚪 | 👂💖🤝✨ | 🚫😠💡🙏 | 🤝👑🌎💔 | 💖🕊�🚫🌿 | 👤🤝💔🩹 | 🙏🚩✨🌍

🌎🙏❌🚪👂💖🤝✨🚫😠💡👑💔💖🕊�🌿👤🩹🚩🌍

--अतुल परब
--दिनांक-16.12.2025-मंगळवार.
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