बेखौफ भक्ति समारोह ॥🍂🙏🕊️✨💀🛡️🚩🙌🐎🏔️❤️🌟💰🚫🍃🕉️🎭⚖️🚫⛓️😊🕯️🌊🌈👣🚩🛐🌻

Started by Atul Kaviraje, December 24, 2025, 06:55:37 PM

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Atul Kaviraje

संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा-
अभंग क्र.२२
आम्ही जरी आस । जालों टाकोनि उदास ॥१॥

आतां कोण भय धरी । पुढें मरणाचें हरी ॥ध्रु.॥

भलते ठायीं पडों । देह तुरंगीं हा चढो ॥२॥

तुमचें तुम्हांपासीं । आम्ही आहों जैसीं तैसीं ॥३॥

गेले मानामान । सुखदुःखाचें खंडन ॥४॥

तुका म्हणे चित्तीं । नाहीं वागवीत खंती ॥५॥

॥ कविता: बेखौफ भक्ति समारोह ॥

1. मैंने यह उम्मीद छोड़ दी है
लाइन-1: मैंने यह उम्मीद छोड़ दी है, मैंने उम्मीद का यह सारा फंदा छिपा लिया है, मैं अब पूरी तरह से उदास हो गया हूँ।
लाइन-2: मुझे दुनिया की मोह माया ने छुआ नहीं, मुझे अब सिर्फ पांडुरंग याद है।
लाइन-3: मन के कोने में कोई उम्मीद नहीं बची, मैं भक्ति पर अटूट ध्यान लगा चुका हूँ।
लाइन-4: मैंने अपना मन आपके चरणों में रख दिया है, अब यह जीवन धन्य और पवित्र हो गया है। 🍂🙏🕊�✨

मतलब: मैंने दुनिया की सभी इच्छाओं को छोड़ दिया है और निराश हो गया हूँ। अब मेरे मन में कोई उम्मीद नहीं बची है, बस भगवान की भक्ति पर ध्यान है।

2. मौत का कोई डर नहीं बचा
लाइन-1: मौत का कोई डर नहीं बचा, अब डर कौन पकड़े, हे मणि, हमने मौत को जीत लिया है।
लाइन-2: मैंने आपके नाम की शरण ली है, अब मौत का यह बड़ा फंदा छूट गया है।
लाइन-3: हमने जान लिया है कि शरीर नश्वर है, यह आत्म-सुख का दिव्य धाम है।
लाइन-4: समय भी घिसेगा, आप हमारे सामने आएंगे, आपकी मातृ शक्ति हमारे सिर पर है। 💀🛡�🚩🙌

मतलब: भगवान उसे मिलते हैं जिसने मौत का डर छोड़ दिया है। हरि का नाम जपकर हमने मौत के डर पर जीत हासिल कर ली है, क्योंकि हम जान गए हैं कि यह शरीर नश्वर है।

3. शरीर की यह अवस्था सुंदर है
लाइन-1: शरीर की यह अवस्था सुंदर है, इस शरीर को अपनी जगह पर आने दो, हे भगवान, हमारा स्नेह आपसे बंधा है।
लाइन-2: शरीर तेज गति से दौड़ने वाले घोड़े जैसा है, हमारी आत्मा आपके प्यार से अभिभूत है।
लाइन-3: यह नश्वर शरीर कहीं भी हो, अब आप ही हमारा अटूट धैर्य हैं।
लाइन-4: ये आपकी भक्ति का रंग है, शरीर आपका अंग बन गया है। 🐎🏔�❤️🌟

मतलब: हमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारा शरीर किस हालत या जगह पर है। हम शरीर से परे जाकर आत्मा के रूप में स्थापित हो गए हैं।

4. दुनिया की ये शान बेकार है
लाइन-1: दुनिया की ये शान बेकार है। आपकी शान आपके साथ रहे, हम विट्ठल नाम के पंख हैं।
लाइन-2: हम जैसे हैं, वैसे ही हैं, हम विट्ठल के प्यार में पागल पंख हैं।
लाइन-3: हमें दौलत मिले या न मिले, आपका नाम हमारे होठों पर है।
लाइन-4: ये सादगी की बड़ी दौलत है, आपके नाम से हमें शांति मिलती है। 💰🚫🍃🕉�

मतलब: दुनिया की शान दुनिया के लिए खुशी का ज़रिया बने। हम जैसे हैं, भगवान के रूप में खुश हैं। हमारा असली धन विट्ठल का नाम है।

5. यह सम्मान का अंत है
लाइन-1: यह सम्मान का अंत है, सम्मान चला गया, अब झगड़ा खत्म हो गया, विट्ठल की भक्ति की यह खुशबू आ गई।
लाइन-2: अब सुख-दुख का इनकार आ गया, अब इस दुनिया का बंधन टूट गया।
लाइन-3: कोई भी निंदा करे या पूजा करे, विट्ठल ही हमारे शाश्वत आनंद हैं।
लाइन-4: मन की यह समता अब डगमगानी नहीं चाहिए, यह आपकी माँ की कृपा का फल है। 🎭⚖️🚫⛓️

मतलब: अब किसी ने हमारा सम्मान किया हो या अपमान, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सुख और दुख दोनों की भावनाएँ अब हमारे मन में नहीं हैं।

6. खांट न वागे चिट्टी
लाइन-1: खांट न वागे चिट्टी, जैसा आप कहते हैं, मन में कोई पछतावा नहीं बचा, हम अब विट्ठल के संत बन गए हैं।
लाइन-2: संतोष का यह अमृत, भक्ति में कोई अहंकार नहीं है।
लाइन-3: दुख भाग गया है दिल के दरवाजे पर, विट्ठल हमारे रक्षक बनकर खड़े हैं।
लाइन-4: मन की यह चांदनी ठंडी हो गई है, तुम्हारा नाम अब विमल हो गया है। 😊🕯�🌊🌈

मतलब: तुकाराम महाराज कहते हैं, अब मेरे मन में कोई पछतावा या दुख नहीं बचा है। हम पूरी तरह संतुष्ट हैं और भक्ति की खुशी में नहाकर चले गए हैं।

7. यह जीवन चरणों में अर्पित है
लाइन-1: यह जीवन विट्ठल के चरणों में अर्पित है विट्ठल मुखी आवाज़ है, भक्तों की पुकार का आपका जवाब है।
लाइन-2: हम तुमसे एक हो गए हैं हरि, अब घर की ये चाहत भारी नहीं रही।
लाइन-3: अभंग ही हमारा सहारा है, तुम्हारे चरणों में हम बार-बार झुकते हैं।
लाइन-4: ये नाम अटूट रहे, सिर्फ़ तुम्हारा चेहरा, तुम्हारे दर्शन में हम खुश हो गए हैं। 👣🚩🛐🌻

मतलब: आख़िरकार, हम भगवान से इतने एक हो गए हैं कि अपना वजूद ही भूल गए हैं। उनका नाम लेकर हम पूरी तरह खुश हैं।

इमोजी समरी:
🍂 (वैराग्य) • 🙏 (समर्पण) • 💀 (मृत्यु) • 🐎 (शरीर) • 💰🚫 (बलिदान) • 🎭 (वैराग्य) • 😊 (संतुष्टि) • 🚩 (भक्ति) • 🕉� (आत्म-साक्षात्कार)

🍂🙏🕊�✨💀🛡�🚩🙌🐎🏔�❤️🌟💰🚫🍃🕉�🎭⚖️🚫⛓️😊🕯�🌊🌈👣🚩🛐🌻

--अतुल परब
--दिनांक-17.12.2025-बुधवार.
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