वैराग्य का आनंद ॥🤬🤜🙏🌸🚫🧘‍♂️✨💎🥨🤕🍎⚖️😊🛶🌊🌾🕉️ विठ्ठल 🤝🔥🎭🌊💃👑👣🛐🕯

Started by Atul Kaviraje, December 24, 2025, 06:57:57 PM

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Atul Kaviraje

संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा-
अभंग क्र.२३
निंदी कोणी मारी । वंदी कोणी पूजा करी ॥१॥

मज हें ही नाहीं तें ही नाहीं । वेगळा दोहीं पासुनी ॥ध्रु.॥

देहभोग भोगें घडे । जें जें जोडे तें बरें ॥२॥

अवघें पावे नारायणीं । जनार्दनीं तुकयांचें ॥३॥

॥ कविता: वैराग्य का आनंद ॥

1. चाहे निंदा हो या पूजा
लाइन-1: चाहे निंदा हो या पूजा, कोई मेरी निंदा करे, कोई मुझे मारे।
लाइन-2: कोई मेरी पूजा करे, कोई अपनी जान और आत्मा कुर्बान कर दे।
लाइन-3: मैं तारीफ से खुश न होऊं, मैं निंदा से दुखी न होऊं।
लाइन-4: मेरा पैसा चला गया, अब सारा फर्क वही है। 🤬🤜🙏🌸

मतलब: दुनिया मुझे मारे या पूजे, मुझे कुछ महसूस नहीं होता। मैं तारीफ और निंदा दोनों से परे हो गया हूं।

2. मैं सबसे अलग हूं
लाइन-1: मैं सबसे अलग हूं, मुझे यह महसूस नहीं होता, वह महसूस नहीं होता।
लाइन-2: मैं दोनों से अलग हूं, आत्मा के आनंद में जिंदा हूं।
लाइन-3: शरीर के ये सारे खेल, मैं ही अकेला गवाह हूँ।
लाइन-4: तेरे प्यार का असर, दुनिया टूटी। 🚫🧘�♂️✨💎

मतलब: मैं इन दोनों हालत से अलग हूँ। मैं शरीर से परे एक आत्मा हूँ और सिर्फ़ गवाह बनकर सब कुछ देख रहा हूँ।

3. यह शारीरिक सुख का कर्म
लाइन-1: यह शारीरिक सुख का कर्म शारीरिक सुख का भोग है, यही किस्मत का फल है।
लाइन-2: शरीर को जो भी फ़ायदा हो, उसमें मेरी कोई ताकत नहीं है।
लाइन-3: चाहे दुख हो या सुख, जो भी मिले अच्छा है।
लाइन-4: विट्ठल की मर्ज़ी के बिना यहाँ कुछ भी नहीं बचता। 🥨🤕🍎⚖️

मतलब: शरीर को जो भी सुख या दुख भोगना पड़ता है, वह कर्म का फल है। जो भी मेरे हिस्से में आता है, मैं उसे भगवान का आशीर्वाद मानकर स्वीकार करता हूँ।

4. संतोष सबसे बड़ा धन है
लाइन-1: संतोष सबसे बड़ा धन है, चाहे मुझे कुछ मिले या न मिले, मन आपको याद करता है।
लाइन-2: जीवन में जो कुछ भी होता है, मैं उसे आपको अर्पित करता हूँ।
लाइन-3: किसी चीज़ की इच्छा नहीं, किसी चीज़ का आकर्षण नहीं।
लाइन-4: आपके नाम की नाव में, डूबने का डर नहीं। 😊🛶🌊🌾

मतलब: मुझे किसी चीज़ की इच्छा नहीं है। जो कुछ भी होता है, मैं उसे भगवान को अर्पित करता हूँ। जिसके पास संतोष है, उसे किसी चीज़ का डर नहीं रहता।

5. नारायणी, सब कुछ चला गया
लाइन-1: नारायणी, सब कुछ चला गया, नारायणी को देख लो, तुम नारायण बन गए हो।
लाइन-2: भक्त और भगवान, यह जीवन एक हो गया है।
लाइन-3: जनार्दन गायब हो गए, अब मैं आपका हूँ।
लाइन-4: ब्रह्मांड के इस कोने में, मुझे आपके दर्शन होते हैं। 🕉� विट्ठल 🤝🔥

मतलब: तुकाराम महाराज कहते हैं कि उनका 'मैं-लेकिन' अब खत्म हो गया है। वे पूरी तरह से नारायण में डूब गए हैं और अब उन्हें हर जगह भगवान दिखते हैं।

6. द्वंद्व से परे की स्थिति
लाइन-1: द्वंद्व से परे की स्थिति मान और अपमान के कांटे, अब हमें नहीं चुभते।
लाइन-2: आपकी भक्ति के फूलों से, हमारे दिल नाचते हैं।
लाइन-3: दुनिया के ये सारे काम, पानी के इस बुलबुले की तरह हैं।
लाइन-4: हमने आपके नाम का पांडुरंग, यह चूड़ा थाम रखा है। 🎭🌊💃👑

मतलब: दुनिया का मान और अपमान अब हमें छू नहीं सकता। हम भगवान की भक्ति में इतने लीन हैं कि दुनिया के मामले हमें पानी के बुलबुले जैसे लगते हैं।

7. शांति का यह सागर
लाइन-1: शांति का यह सागर अब मन कहता है, यह सिर्फ़ तुम्हारी खुशबू है।
लाइन-2: यह मन की शांति की खुशबू है, खुशबू निकल गई है।
लाइन-3: यह ध्यान हमेशा बना रहे, यह तुम्हारा नाम हमेशा बना रहे।
लाइन-4: मैंने अपनी आत्मा का घर तुम्हारे चरणों में पा लिया है। 👣🛐🕯�🌻

मतलब: अब मेरे दिल में सिर्फ़ भगवान हैं। यह मन की शांति ही मेरी सच्ची दौलत है और मैंने भगवान के चरणों में अपना असली घर पा लिया है।

इमोजी समरी:
🤬 (निंदा/गुस्सा) • 🧘�♂️ (साक्षी/आत्मा) • 🥨 (कर्म) • 😊 (संतुष्टि) • 🕉� (ईश्वर) • 🎭 (अपमान) • 👑 (भक्ति) • 👣 (स्वार्थ)

इमोजी समरी:
🤬 (निंदा) • 🙏 (प्रणाम) • 🧘�♂️ (वैराग्य) • ⚖️ (प्रारब्ध) • 😊 (संतुष्टि) • 🕉� (अद्वैत) • 👣 (शरण) • ✨ (सेल्फ-इफेक्शन)

🤬🤜🙏🌸🚫🧘�♂️✨💎🥨🤕🍎⚖️😊🛶🌊🌾🕉� विठ्ठल 🤝🔥🎭🌊💃👑👣🛐🕯�🌻

--अतुल परब
--दिनांक-18.12.2025-गुरुवार.
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